Indian Students in Iran: ईरान क्यों जाते हैं भारतीय छात्र, इजराइल हमलों के बीच वापसी यूक्रेन जैसी क्यों नहीं?
Indian Students in Iran: इजराइल ईरान जंग के साए तले घिरे हजारों भारतीयों में सबसे बेचैन वो 1500 से 2000 छात्र हैं, जो ईरान सिर्फ तालीम के लिए गए थे। किसी ने डॉक्टर बनने का सपना लेकर वीज़ा लिया था, तो कोई मजहबी इल्म की तलाश में ईरान की राजधानी तेहरान या क़ुम पहुंचा था। लेकिन इजराइली के बाद हमलों हालात ऐसे हैं कि सैकड़ों भारतीय छात्र बंकरों में रातें गुज़ार रहे हैं और मां-बाप भारत में बैठकर हर फोन कॉल का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।
जब ईरान और इजरायल के बीच तनातनी बढ़ी, तब वहां मौजूद भारतीय छात्रों के सिर पर भी संकट के बादल मंडराने लगे। अब सवाल ये है - ईरान में ऐसा क्या है, जो हर साल भारत से बड़ी संख्या में छात्र ईरान के तेहरान (Tehran), क़ुम (Qom), मशहद (Mashhad), इस्फहान (Isfahan) आदि में पढ़ाई के लिए जाते हैं? और अब जब हालात बिगड़ चुके हैं, तो भारत उन्हें कैसे सुरक्षित निकालेगा?

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Why Indians study in Iran: क्यों जाते हैं भारतीय छात्र ईरान?
भारत से हर साल सीमित संख्या में छात्र ईरान में पढ़ाई के लिए जाते हैं। इनमें दो प्रमुख श्रेणियां हैं।
1. मेडिकल छात्र: ईरान के कुछ विश्वविद्यालय कम फीस और अच्छी बुनियादी सुविधाओं के साथ MBBS या समकक्ष मेडिकल डिग्रियां कराते हैं। भारतीय छात्र निजी कॉलेजों की ऊंची फीस से बचने के लिए ईरान को विकल्प मानते हैं। ईरान सरकार या वहां के धार्मिक संस्थान भारतीय छात्रों को स्कॉलरशिप ऑफर करते हैं, जिससे छात्रों को रहने और खाने का खर्च भी मिलता है। तेहरान यूनिवर्सिटी, अल-ज़हरा यूनिवर्सिटी आदि में विदेशी छात्रों के लिए विशेष प्रोग्राम चलते हैं।
2. धार्मिक छात्र (शिया समुदाय से): भारत के लखनऊ, हैदराबाद, जम्मू-कश्मीर जैसे इलाकों से शिया मुस्लिम छात्र ईरान के क़ुम (Qom), मशहद (Mashhad) जैसे धार्मिक केंद्रों में इस्लामी स्टडीज़, अरबी-फारसी भाषा और फिक्ह (इस्लामी कानून) की पढ़ाई के लिए जाते हैं। ईरान की हौज़ा प्रणाली अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए भी खुली है। फारसी भाषा, साहित्य और ईरानी संस्कृति में रुचि रखने वाले कुछ भारतीय छात्र भी रिसर्च और उच्च शिक्षा (PhD, Masters) के लिए ईरानी विश्वविद्यालयों में दाखिला लेते हैं।
Israel Iran War 2025: इजराइल ईरान युद्ध के बीच फंस गए छात्र
साल 2022 में जब रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने ऑपरेशन गंगा चलाकर करीब 22,500 भारतीयों को यूक्रेन से सुरक्षित निकाला था, लेकिन ईरान में ऐसा अभियान चलाना अब उतना आसान नहीं है। ईरान में इस समय करीब 10,000 भारतीय नागरिक हैं, जिनमें से लगभग 1,500-2,000 छात्र, 6,000 कामगार, और कई नाविक शामिल हैं।
यूक्रेन और ईरान की निकासी में अंतर
यूक्रेन से भारतीयों की निकासी इसलिए आसान हुई थी क्योंकि उसके पश्चिमी पड़ोसी देशों (पोलैंड, हंगरी, रोमानिया आदि) ने भारत को सहयोग दिया। लेकिन ईरान में भारत के चारों ओर भूगोल और कूटनीतिक चुनौतियां हैं।
- पाकिस्तान ने अपना हवाई मार्ग बंद कर रखा है।
- अफगानिस्तान से लॉजिस्टिक सपोर्ट अस्थिर है।
- अजरबैजान और पाकिस्तान की नज़दीकी भी बाधा है।
- ईरान का हवाई क्षेत्र इजराइल के साथ संघर्ष के कारण बंद है।
indian embassy in iran: छात्रों की सुरक्षा और मौजूदा स्थिति
भारतीय दूतावास ने तेहरान में रह रहे भारतीयों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। मीडिया की खबरों के अनुसार पहले बैच में 110 छात्रों ने ईरान-अर्मेनिया सीमा पार की है। लगभग 600-700 छात्रों को क़ुम (Qom) भेजा गया है। अराक, खोरमाबाद, इस्फहान, तबरीज़ और केरमंशाह जैसे शहरों की ओर जाना मुमकिन नहीं क्योंकि वे परमाणु और सैन्य क्षेत्रों के करीब हैं।
अर्मेनिया निकासी के लिए क्यों मुफ़ीद?
यूक्रेन की तरह, ईरान में भी हवाई मार्ग बंद होने के कारण जमीनी मार्ग ही विकल्प है। अर्मेनिया, ईरान की सीमावर्ती देश है और भारत के साथ उसका भूराजनीतिक तालमेल बेहतर है। अजरबैजान और पाकिस्तान भारत विरोधी स्थिति में हैं। अफगानिस्तान और पाकिस्तान से निकासी असुरक्षित है। तुर्कमेनिस्तान निकासी का अगला संभावित मार्ग बन सकता है।
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