भारतीय छात्र ने छोड़ दी यूक्रेन से आने वाली फ्लाइट, कहा- अपने डॉगी के बिना नहीं आऊंगा

नई दिल्ली, कीव, 27 फरवरी। यूक्रेन पर रूस के हमले को चार दिन बीत चुके हैं। इस हमले के चलते यूक्रेन में पढ़ने गए हजारों भारतीय छात्र वहां फंस गए हैं। अब तक तमाम ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिनमें छात्रों ने सरकार से उन्हें वापस निकालने की अपील की है।इन छात्रों को निकालने के लिए भारत सरकार लगातार प्रयासरत है। अब तक सैकड़ों छात्रों को विशेष विमानों के जरिए देश लाया गया है। लेकिन एक भारतीय छात्र ऐसा भी है जिसने देश वापस आने से इनकार कर दिया है। इस छात्र ने अपने कुत्ते को अकेले छोड़कर आने से इनकार कर दिया है।

बिना डॉगी के आने से किया इनकार

बिना डॉगी के आने से किया इनकार

ऋषभ कौशिक खार्कीव यूनिवर्सिटी ऑफ रेडियो इलेक्ट्रॉनिक्स में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है। उन्हें भी हजारों छात्रों की तरह यूक्रेन से घर आना है लेकिन उनके सामने मुश्किल है उनका पालतू कुत्ता मलिबू, जिसे अकेला छोड़कर वह वापस नहीं आ सकते।

सोशल मीडिया पर ऋषभ का एक वीडियो सामने आया है जिसमें ऋषभ को इस बारे में बात करते सुना जा सकता है। इसमें ऋषभ ने बताया है कि कैसे यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास और दिल्ली में केंद्र की एनीमल क्वारंटाइन और सर्टिफिकेट सर्विस उन्हें रोक रही है। उन्होंने बताया कि उनसे कई दूसरे डॉक्यूमेंट मांगे जा रहे हैं।

डॉगी के साथ बंकर में हैं छिपे

डॉगी के साथ बंकर में हैं छिपे

एक तरफ जहां रूसी सेना यूक्रेन में आगे बढ़ती जा रही है ऐसे में ऋषभ ने अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि "वे मुझसे एयर टिकट भेजने की मांग कर रहे हैं। कैसे मैं हवाई टिकट भेज सकता हूं जब यूक्रेन का एयर स्पेस ही बंद है?"

कौशिक ने आगे यूक्रेन में अपने मुश्किल हालात के बारे में भी बताया है। उन्होंने कहा कि वह अपने डॉगी मलीबू के साथ बंकर में छिपे हुए हैं। उन्होंने इसे (डॉगी को) पिछले साल खार्कीव से रेस्क्यू किया था।

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    27 फरवरी को थी उनकी फ्लाइट

    27 फरवरी को थी उनकी फ्लाइट

    उन्होंने कहा आज सुबह हम सभी बमबारी की आवाज के साथ जागे हैं.. यहां तक कि मेरा डॉगी भी डरा हुआ है। वह सारा वक्त चीखता रहता है। साथ ही यह भी बताया कि हमेशा थोडी-थोड़ी देर पर अपने डॉगी को गर्म करने के लिए उन्हें ठंडे बंकर से बाहर आना पड़ता है।

    उन्होंने कहा मैं यहां कीव में फंसा हुआ जबकि मेरी फ्लाइट 27 फरवरी को ही थी.. भारत सरकार ने अगर कानून के मुताबित मुझे जरूरी एनओसी दी होती तो अब तक मैं भारत में होता।

    यूक्रेन से छात्रों को लाने में मुश्किल

    यूक्रेन से छात्रों को लाने में मुश्किल

    रूस की सेनाएं जब राजधानी कीव के करीब पहुंची हुई हैं और कब्जे के लिए भीषण संघर्ष चल रहा है ऐसे समय में करीब 18000 भारतीय छात्र इस समय यूक्रेन में फंसे हुए हैं। इन सभी छात्रों को वापस लाने के लिए भारत सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इस अभियान में सबसे बड़ी बाधा यूक्रेन का एयरस्पेस बंद होना है जिसके चलते सरकार सीधी उड़ान नहीं संचालित कर पा रही है।

    इन छात्रों को वापस लाने के लिए इन छात्रों को यूक्रेन की सीमा से सटे दूसरे देशों में लाया जा रहा है जहां से विमान के माध्यम से इन्हें वापस देश लाने की व्यवस्था की जा रही है।

    वर्तमान में छात्रों को सुरक्षित लाने की प्रक्रिया में हंगरी, रोमानिया, पोलैंड और स्लोवाक रिपब्लिक की मदद ली जा रही है।

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