Strait of Hormuz में भारत की कूटनीतिक जीत, ईरान ने दी भारतीय जहाजों को निकलने की अनुमति
Indian ships Pass Strait of Hormuz: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा और समुद्री व्यापार का केंद्र बन गया है। युद्ध जैसी स्थिति के कारण जहां ज्यादातर जहाज इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर फंसे हुए हैं, वहीं खबर है कि भारत के झंडे वाले दो जहाज सुरक्षित रूप से इस जलडमरूमध्य से गुजरने में सफल रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार ये दोनों भारतीय जहाज 11 मार्च की रात से 12 मार्च की सुबह के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से आगे बढ़े। हालांकि इस संबंध में अभी तक भारत सरकार या संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

Strait of Hormuz में भारतीय जहाजों को मिली परमिशन: 'पुष्पक' और 'परिमल' रवाना
सूत्रों के अनुसार, भारतीय ध्वज वाले दो जहाज, जिनका नाम 'पुष्पक' (Pushpak) और 'परिमल' (Parimal) बताया जा रहा है, बुधवार रात और गुरुवार सुबह के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजर गए हैं। जहां दुनिया भर के अन्य देशों के जहाज युद्ध की चपेट में आने के डर से खड़े हैं, वहीं भारतीय जहाजों को ईरान द्वारा सुरक्षित रास्ता देना भारत की सफल कूटनीति का परिणाम माना जा रहा है।
इससे पहले बुधवार, 11 मार्च को ही सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर आ रहा 'शेनलोंग सुएज़मैक्स' (Shenlong Suezmax) मुंबई बंदरगाह पहुंचा था। इस जहाज का कैप्टन भी भारतीय था।
भारतीय कप्तान वाला जहाज भी सुरक्षित पहुंचा था मुंबई
इससे दो दिन पहले भी एक अहम घटना सामने आई थी। लाइबेरिया के झंडे वाला एक तेल टैंकर, जिसमें सऊदी अरब का कच्चा तेल लदा था और जिसका कप्तान भारतीय था, सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर मुंबई बंदरगाह पहुंच गया था।
यह जहाज उन शुरुआती पोतों में से एक था जिसने हालिया संघर्ष के बाद इस संवेदनशील समुद्री मार्ग को पार किया। दरअसल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद से इस क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है और कई जहाजों ने इस रास्ते से गुजरना बंद कर दिया है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने ईरान से की बात
इस बीच भारत भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मंगलवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया में मौजूदा तनाव और सुरक्षा हालात पर चर्चा हुई। भारत की चिंता इस वजह से भी ज्यादा है क्योंकि देश की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर आता है।
दो हफ्ते से जारी है टकराव के बीच ईरान की चेतावनी-अनुमति लेकर ही गुजरें जहाज
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव को लगभग दो हफ्ते हो चुके हैं। इस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य दोनों देशों के बीच एक अहम विवाद का केंद्र बन गया है। ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर अपने नियंत्रण का दावा किया है, जबकि अमेरिका इस दावे को चुनौती दे रहा है। यही कारण है कि इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है।
ईरान ने हाल ही में इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को सख्त चेतावनी भी दी है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल अलीरेजा तंगसीरी ने कहा कि जो भी जहाज इस मार्ग से गुजरना चाहता है, उसे पहले ईरान से अनुमति लेनी होगी।
उन्होंने दावा किया कि बुधवार को दो जहाजों ने चेतावनी को नजरअंदाज किया, जिसके बाद उन्हें निशाना बनाया गया। तंगसीरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि जो जहाज बिना अनुमति के इस मार्ग से गुजरने की कोशिश करेंगे, उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है जो फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है। रिपोर्टों के मुताबिक हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल इस मार्ग से होकर गुजरता है। यह दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत है। वैश्विक LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) का बड़ा हिस्सा भी इसी रास्ते से भेजा जाता है। अगर इस मार्ग में थोड़ी देर के लिए भी रुकावट आती है तो इसका असर तेल की कीमतों, वैश्विक बाजारों, सप्लाई चेन और आम लोगों के बजट पर पड़ सकता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मार्ग
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और पश्चिम एशिया से आने वाला तेल व गैस अक्सर होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही देश तक पहुंचता है। ऐसे में अगर इस मार्ग पर तनाव या अवरोध बना रहता है तो इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा, तेल की कीमतों और रसोई गैस की सप्लाई पर पड़ सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव ने वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। हालांकि दो भारतीय जहाजों का इस संवेदनशील मार्ग से सुरक्षित गुजरना राहत की खबर है, लेकिन क्षेत्र में जारी तनाव के चलते स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है।
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