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भारतीय मूल की जर्नलिस्ट मेघा को पुलित्जर अवार्ड, चीन के जुल्म को किया था उजागर

उइगर मुस्लिमों के खिलाफ चीन की बर्बरता को लेकर इनवेस्टिगेशन करने और अपनी साहसिक रिपोर्टिंग के जरिए चीन का सच दुनिया के सामने लाने के लिए मेघा राजगोपालन को इस प्रतिष्टित अवार्ड के लिए चुना गया है।

न्यूयॉर्क, जून 12: भारतीय मूल की पत्रकार मेघा राजगोपालन को प्रतिष्ठित पुलित्जर अवार्ड से सम्मानित किया गया है। दुनियाभर के पत्रकारों और जर्नलिज्म की दुनिया के लिए पुलित्जर अवार्ड सबसे बड़ा और प्रतिष्ठत अवार्ड माना जाता है। मेघा को इस बार का पुलित्जर अवार्ड दुनिया के सामने चीन का कच्चा-चिट्ठा खोलने और दुनिया के सामने चीन की बर्बरता को उजागर करने के लिए दिया गया है। इनोवेटिव इनवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग करने के लिए भारतीय मूल की जर्नलिस्ट मेघा राजगोपालन को इस अवार्ड से नवाजा गया है।

मेघा राजगोपालन को पुलित्जर अवार्ड

मेघा राजगोपालन को पुलित्जर अवार्ड

उइगर मुस्लिमों के खिलाफ चीन की बर्बरता को लेकर इनवेस्टिगेशन करने और अपनी साहसिक रिपोर्टिंग के जरिए चीन का सच दुनिया के सामने लाने के लिए मेघा राजगोपालन को इस प्रतिष्टित अवार्ड के लिए चुना गया है। मेघा को यह अवार्ड इंटरनेशनल कैटोगिरी में दिया गया है। अपनी रिपोर्ट में मेघा राजगोपालन ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए चीन के डिटेंशन कैंप का विश्लेषण किया था और बताया था कि चीन में उइगर मुस्लिमों को किस तरह से प्रताड़ित किया जाता है। शुक्रवार को पुलित्जर अवार्ड की घोषणा की गई है। मेघा राजगोपालन को पुलित्जर अवार्ड मिलने के बाद उन्हें काफी बधाई संदेश आ रहे हैं और उन्होंने ट्विटर पर अपने पिता का बधाई संदेश ट्वीट भी किया है। मैसेज में मेघा के पिता उन्हें पुलित्जर अवार्ड मिलने पर बधाई दे रहे हैं। जवाब में मेघा ने भी थैंक्स लिखा है।

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    नील बेदी को भी पुलित्जर

    वहीं, एक और भारतीय मूल के पत्रकार नील बेदी को भी लोकल रिपोर्टिंग इनवेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए पुलित्जर अवार्ड दिया गया है। अपनी स्टोरी के जरिए नील बेदी ने फ्लोरिडा में गुमशुदा बच्चों को लेकर अभियान चलाया था और इनवेस्टिगेशन जर्नलिज्म के जरिए बड़े खुलासे किए थे।

    जॉर्ज फ्लॉयड के मर्डर को रिकॉर्ड करने वाली लड़की को पुलित्जर

    जॉर्ज फ्लॉयड के मर्डर को रिकॉर्ड करने वाली लड़की को पुलित्जर

    अमेरिका में बहुचर्चित जॉर्ज फ्लॉयड मर्डर को रिकॉर्ड करने वाली महिला पत्रकार डार्नेला फ्रेजियर को भी पुलित्जर अवार्ड से सम्मानित किया गया है। उन्हें पुलित्जर साइटेशन दिया गया है। डार्नेला फ्रेजियर ने मिनेसोटा में जब पुलिसवाले जॉर्ज फ्लॉयड को मार रहे थे, उस वक्त उन्होंने पूरी घटना को रिकॉर्ड किया था। उन्हीं की रिपोर्टिंग की बदौलत अमेरिका में बवाल मच गया था और रंगभेद को लेकर अमेरिका की काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी। (तस्वीर- मेघा राजगोपालन)

    पुलित्जर अवार्ड को जानिए

    जर्नलिज्म के क्षेत्र में पुलित्जर अवार्ड को काफी ज्यादा प्रतिष्ठित माना जाता है और इसकी शुरूआत 1917 से हुई थी। पत्रकारिता के क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान देने के लिए पुलित्जर अवार्ड दिया जाता है। पहले इस अवार्ड की घोषणा 19 अप्रैल को की जानी थी, लेकिन कोविड और दूसरे वजहों से उस वक्त अवार्ड को रोक दिया गया था। पिछले साल भी कोविड 19 की वजह से विजेताओं की घोषणा काफी देर से की गई थी। वहीं, मेघा राजगोपालन को लेकर पब्लिकेशन ने कहा है कि चीन के खिलाफ उनकी निडर रिपोर्टिंग के लिए चीन की तरफ से उन्हें परेशान करने की भी कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने झुकने से साफ मना कर दिया था। उन्होंने चीन में उइगर मुस्लिमों के खिलाफ हो रहे अत्याचार के खिलाफ रिपोर्टिंग की एक सीरिज चलाई थी, जिसके आधार पर ही अमेरिका और ब्रिटेन ने उइगर मुस्लिमों के खिलाफ चीन के अत्याचार को 'नरसंहार' करार दिया था।

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