भारतीय अधिकारी भागे-भागे रवाना हुए लंदन.. आचार संहिता लगने से पहले कौन सी डील फाइनल करना चाहती है मोदी सरकार?

India-UK FTA Deal: भारत में अगले दो से तीन हफ्तों के अंदर लोकसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता का ऐलान होने वाला है, लेतकिन 2024 के आम चुनावों की तारीखों की घोषणा से पहले भारतीय अधिकारी लंदन पहुंच गये हैं और एक प्रमुख डील फाइनल करने की कोशिश कर रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अधिकारियों का दल भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते यानि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को फाइनल करने की कोशिश कर रहा है और वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को लंदन के लिए रवाना हुआ है।

india uk free trade agreement

माना जा रहा है, कि भारतीय अधिकारियों का दल उस वक्त लंदन के लिए रवाना हुआ है, जब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने पिछले दो सालों से भारत और ब्रिटेन के बीच एफटीए को लेकर चल रही बातचीत की समीक्षा की है और इसके चार दिनों के बाद दल लंदन के लिए निकला है।

कितना महत्वपूर्ण है भारत-ब्रिटेन FTA

भारतीय अधिकारियों का लंदन दौरा काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आम चुनावों की तारीखों की घोषणा एक महीने से भी कम समय में होने की उम्मीद है, जिससे आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) लागू हो जाएगी, जो सौदे की घोषणा करने की केंद्र सरकार की क्षमता को सीमित कर देगी।

इस महीने डील को पूरा करने का प्रयास इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ब्रिटेन में भी इसी साल के अंत तक चुनाव होने हैं। लिहाजा, दोनों देशों के अधिकारियों के बीच इस डील को लेकर काफी तेजी से बातचीत चल रही है और ब्रिटेन के एक प्रतिनिधिमंडल ने जनवरी में भारत का भी दौरा किया था।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार के एक अधिकारी ने कहा, कि "भारत-यूके एफटीए पर हस्ताक्षर अभी भी संभव है और वाणिज्य सचिव और अन्य वार्ताकार यूके के लिए रवाना हो रहे हैं। यदि एफटीए का ठोस निष्कर्ष निकाला जाता है, तो इसकी घोषणा की जा सकती है और इसमें कोई संशोधन होने की संभावना नहीं है, क्योंकि एनडीए सरकार के फिर से सत्ता में आने की उम्मीद है।"

इससे पहले, द इंडियन एक्सप्रेस ने यूके के एक अधिकारी के हवाले से खबर दी थी, कि इस डील पर अगले तीन हफ्तों में हस्ताक्षर किए जा सकते हैं, लेकिन भारत को थोड़ा और खुलने की जरूरत है, क्योंकि यह एक उच्च टैरिफ वाला देश है और यूके पहले से ही बहुत खुला है।

भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट एक विकसित देश के साथ पहला पूर्ण एफटीए होगा, जो सर्विस सेक्टर, कपड़ा और चमड़ा उद्योग जैसे कई श्रम गहन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण लाभ हासिल कर सकता है।

चीन को काउंटर करना चाहता है भारत

नई दिल्ली के लिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसने चीन के नेतृत्व वाले क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) जैसे क्षेत्रीय व्यापार समझौतों को खारिज कर दिया है और भारत ने अमेरिका के नेतृत्व वाले इंडो-पैसिफिक आर्थिक ढांचे (आईपीईएफ) में भी शामिल होने का भी फैसला नहीं किया है।

जबकि, भारत के मुख्य व्यापारिक प्रतिद्वंदी वियतनाम और दक्षिण एशियाई देश काफी तेजी के साथ अन्य देशों के साथ एफटीए और क्षेत्रीय व्यापारिक सौदे कर अपनी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत कर रहे हैं। कोविड महामारी के बाद वियतनाम काफी तेजी से खुद को चीन के विकल्प के तौर पर पेश कर रहा है और काफी तेज निवेश हासिल कर रहा है।

दूसरी तरफ, अप्रवासी विरोधी रुख बढ़ने से ब्रिटेन में राजनीतिक माहौल गर्म बना हुआ है। हालांकि, भारत ने एफटीए के तहत अपने सर्विस सेक्टर के कार्यबल के लिए ज्यादा पहुंच की मांग की है। जबकि, उच्च ब्याज दरों और खर्च में कटौती के बीच ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था मंदी में डूब गई है।

लेकिन, भारत की उच्च टैरिफ दर व्यापार भागीदारों के लिए हमेशा से चिंता का विषय रही है, क्योंकि भारत दुनिया में सबसे अधिक आयात टैक्स लगाने वाले देशों में शामिल है। जहां भारत से यूके में आयातित वस्तुओं पर औसत टैरिफ 4.2 प्रतिशत है, वहीं यूके से आयातित वस्तुओं पर भारत में औसत टैरिफ 14.6 प्रतिशत है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी भारत की तरफ से लगाए जाने वाले काफी ज्यादा टैक्स की आलोचना कर चुके हैं।

यूनाइटेड किंगडम ने भारत से कारों और व्हिस्की सहित अन्य वस्तुओं पर टैक्स कम करने के लिए कहा है। जबकि, भारत ने यूके में अपने सर्विस सेक्टर के कार्यबल के लिए बेहतर पहुंच की मांग की है। कारों और व्हिस्की पर बातचीत विवादास्पद रही है क्योंकि भारतीय उद्योग ब्रिटेन के बाजार में ज्यादा पहुंच की मांग कर रहा है।

भारतीय व्हिस्की निर्माताओं ने कहा है, कि यूके को अपने तीन साल के परिपक्वता नियम को आसान बनाना चाहिए, जो एक बाधा के रूप में काम करता है, और नई दिल्ली भी ऑटो क्षेत्र में, विशेष रूप से ईवी सेगमेंट में डिस्काउंट मांग रही है। लिहाजा, अब देखना होगा, कि क्या आचार संहिता के घोषणा से पहले दोनों देश किसी फाइनल नतीजे पर पहुंचते हैं या नहीं?

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