यूक्रेन से लौटे भारतीय मेडिकल छात्रों के लिए 'गुड न्यूज', अब दूसरे देशों में पूरी कर सकेंगे अपनी पढ़ाई
युद्धग्रस्त यूक्रेन से पढ़ाई बीच में छोड़कर लौटे भारतीय मेडिकल छात्रों के लिए राहत की खबर है। बता दें कि एनएमसी ने इन छात्रों को दुनिया की किसी भी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने की अनुमति दे दी है।
नई दिल्ली/कीव, 7 सितंबर : युद्धग्रस्त यूक्रेन से लौटे भारतीय मेडिकल छात्रों (Indian medical students) को अब दुनिया के किसी भी देश के यूनिवर्सिटी से अपनी एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई पूरी करने की अनुमति मिल गई है। खबर के मुताबिक,राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने छात्रों के विशेष परिस्थितियों का ख्याल करते हुए, इस संबंध में एक आदेश जारी किया है। एनएमसी ने यूक्रेन की तरफ से पेश किए गए एकेडमिक मोबिलिटी प्रोग्राम को मान्यता देने के लिए सहमति दे दी है लेकिन इन मेडिकल छात्रों को यूक्रेन की मूल विश्वविद्यालय से ही डिग्री प्रदान की जाएगी।

यूक्रेन में पढ़ने वाले मेडिकल छात्रों को बड़ी राहत
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के इस आदेश से यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले हजारों छात्रों को बड़ी राहत मिली है। बता दें कि, रूस और यूक्रेन के बीच 24 फरवरी को जंग छिड़ने के बाद देश में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्र स्वदेश लौट आए थे। ऐसे में इनकी पढ़ाई अधर में लटक गई थी।

अब विदेशों जाकर कर सकते हैं पढ़ाई
एनएमसी एक्ट के मुताबिक, विदेशी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को अपनी शिक्षा पूरी करने और एकल विश्वविद्यालय से डिग्री प्राप्त करने की जरूरत होती है। हालांकि, एनएमसी ने मंगलवार को सार्वजनिक नोटिस जारी करते हुए कहा कि, यूक्रेन की तरफ से पेश किए गए मोबिलिटी प्रोग्राम पर विदेश मंत्रालय के परामर्श से आयोग में विचार किया गया है। विचार -विमर्श के बाद छात्रों को सूचित किया गया कि, अकादमिक गतिशीलता कार्यक्रम वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों में अन्य विश्वविद्यालय के लिए एक अस्थायी स्थांतरण है।

डिग्री यूक्रेन की विश्वविद्यालय से प्राप्त होंगी
एनएमसी के आधिकारिक सूचना में साफ तौर पर कहा गया है कि, युद्धग्रस्त यूक्रेन से लौट् मेडिकल छात्र दुनिया के किसी भी कॉलेज से पढ़ाई कर सकते हैं, लेकिन आपको डिग्री मूल यूक्रेन के विश्वविद्यालय की तरफ प्रदान की जाएगी। आयोग यूक्रेन में पढ़ रहे भारतीय मेडिकल छात्रों के संबंध में अकादमिक गतिशीलता कार्यक्रम के लिए नो ऑब्जेक्शन देता है, बशर्ते कि स्क्रीनिंग टेस्ट रेगुलेशन 2002 के अन्य मानदंड पूरे होने चाहिए."

छात्रों की पढ़ाई अधर में लटक गई थी
बता दें कि, रूस और यूक्रेन के बीच 24 फरवरी में शुरू हुआ युद्ध अभी भी जारी है। जंग के बीच भारत सरकार ने एक विशेष अभियान चलाकर यूक्रेन में फंसे अपने नागरिकों को वापस स्वदेश बुला लिया था। ऐसे में बड़ी तादाद में भारतीय मेडिकल छात्रों को यूक्रेन से अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर वापस आना पड़ा था। वहीं, स्वदेश आने के बाद से मेडिकल छात्र लागातर भारत सरकार से अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए भारतीय विश्वविद्यालयों में दाखिले की मांग कर रहे थे।












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