यूक्रेन को हथियार सप्लाई के लिए भारत-जर्मनी में सीक्रेट बातचीत.. खोजी पत्रिका का दावा, दोस्त रूस क्या करेगा?
India Russia Ukraine War: जर्मनी की एक मीडिया ऑउटलेट ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा है, कि यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई के लिए भारत और जर्मनी के बीच सीक्रेट बातचीत चल रही है। ये रिपोर्ट जर्मन पत्रिका डेर स्पीगेल में छपी है, जिसने जियो-पॉलिटिक्स में हलचल मचा दी है।
ऐसा बताया जा रहा है कि जर्मनी, यूक्रेन को गोला-बारूद की आपूर्ति के लिए भारत सरकार के साथ गुप्त बातचीत कर रहा है, जिससे भारत के यूक्रेन युद्ध को लेकर अब तक बनाए गये संतुलन की परीक्षा हो सकती है। माना जा रहा है, कि ये खुलासा यह नई दिल्ली को मुश्किल स्थिति में डाल सकता है, क्योंकि पुतिन के नेतृत्व वाले रूस को अलग-थलग करने वाले वैश्विक प्रतिबंधों के बावजूद मॉस्को के साथ भारत के संबंध लगातार फल-फूल रहे हैं।

जर्मन पत्रिका डेर स्पीगेल का सनसनीखेज दावा
ये रिपोर्ट जर्मन पत्रिका डेर स्पीगेल में छपी है, जिसमें दावा किया गया है, कि चूंकि यूक्रेन को अमेरिकी सैन्य सहायता अमेरिकी संसद ने रोक रखी है और यूरोपीय देशों के पास यूक्रेन को पर्याप्त तोपखाने, गोला बारूद और बाकी के हथियारों के स्टॉक नहीं है, इसलिए यूरोपीय देशों की सरकारें, हथियारों के स्टॉक के लिए दुनिया भर में खोज कर रही हैं।
जर्मन मीडिया ने ये खुलासा उस वक्त किया है, जब रणनीतिक तौर पर काफी अहम माने जाने वाले यूक्रेनी शहर अवदिव्का पर इस महीने रूस ने कब्जा कर लिया है, जिसे यूक्रेन का गढ़ माना जाता था। इसके अलावा, डोनबास पर भी एक बार फिर से रूस का नियंत्रण हो गया है, जहां रूसी सेना ने यूक्रेन की तुलना में 10 गुना प्रोजेक्टाइल तैनात कर दिए थे।
रूसी समाचार आउटलेट प्रावाडा ने पत्रिका की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है, कि बर्लिन में यूरोपीय राजनयिकों और नौकरशाहों की एक अनौपचारिक बैठक में इस बात पर चर्चा की गई है, कि यूक्रेनी गोला-बारूद भंडार को कैसे बढ़ाया जाए।
और इसी बैठक में भारत को लेकर चर्चा की गई, जहां यूरोपीय अधिकारियों ने कहा, कि भारत हजारों राउंड में चलने वाले तोपखाने के हथियारों का एक विशाल बड़ा भंडार रखता है।
इसी बैठक ने भारत सरकार को दुविधा में डाल दिया है और दावा किया गया है, कि भारत इस बातचीत को सीक्रेट रखने की कोशिश करेगी, क्योंकि भारत ने लगातार पश्चिमी देशों के बढ़ते दबाव के बावजूद, अभी भी रूस के साथ मजबूत संबंध बनाए हुए है।
डेर स्पीगल के मुताबिक, एक राजनयिक समाधान यह है, कि बर्लिन "मध्यस्थों के माध्यम से" गोला-बारूद प्राप्त कर सकता है। यानि, भारत किसी और देश को हथियार बेचे और फिर उस देश से जर्मनी हथियार खरीद ले और फिर उसे यूक्रेन में पहुंचाया जाए।
जर्मनी की अपनी हालिया यात्रा के दौरान, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया, कि भले ही यूरोप ऊर्जा खरीद के लिए मध्य पूर्व की तरफ शिफ्ट हो रहा है, लेकिन भारत रूस के साथ उसी तरह से व्यवहार नहीं कर सकता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, कि प्रत्येक देश अपने पिछले अनुभवों के आधार पर संबंध बनाता है और पश्चिमी देशों ने हथियारों की आपूर्ति के लिए भारत के मुकाबले पाकिस्तान को हमेशा से प्राथमिकता दी है।
अभी तक जर्मन पत्रिका की इस रिपोर्ट पर भारत की तरफ से प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
यूरोप के पास खत्म हो रहे हैं हथियारों के भंडार
यूरोपीय संघ के शीर्ष राजनयिक, जोसेप बोरेल ने 19 फरवरी को सदस्य देशों से आग्रह किया था, सदस्य देश यूरोपीय संघ के बाहर सस्ते, तेज और बेहतर हथियारों की तलाश करे। भारत के अलावा यूरोपीय देश, अरब देशों से भी हथियार खरीदने की संभावना पर विचार कर रहे हैं।
यूक्रेनी सेना में गोला-बारूद की कमी गंभीर होती जा रही है, क्योंकि 61 अरब अमेरिकी डॉलर की अमेरिकी फंडिंग अमेरिकी संसद में फंसी हुई है। हाल के दिनों में मीडिया रिपोर्टों ने संकेत दिया है, कि यूक्रेन को कुछ ही हफ्तों में गोले और हवाई सुरक्षा जैसी आपूर्ति की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिका का मानना है, कि हथियार खत्म होते ही रूस पूरी तरह से यूक्रेन पर हावी हो सकता है और रूसी राष्ट्रपत को इस लड़ाई में महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है।
इससे पहले जनवरी 2024 की शुरुआत में भी ऐसी रिपोर्टें सामने आईं थीं, कि भारतीय गोला-बारूद युद्ध के मैदान में पहुंच गया है। कुछ ऐसे वीडियो सामने आए थे, जिसमें देखा गया था, कि यूक्रेनी सैनिक भारत में बने गोला-बारूद का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ऐसी संभावना जताई गई है, कि भारत ने पोलैंड को तोपखाने के जो गोले बेचे थे, वो गोले पोलैंड ने यूक्रेन तक पहुंचाए।
वहीं, यूक्रेन को इस वक्त हर महीने कम से कम 2 लाख राउंड तोपखाने के गोलों की जरूरत है, लेकिन यूरोपी के पास यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई करने के संसाधन नहीं हैं।
यूक्रेन में जो तोप के गोले मिले थे, उसे म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) ने बनाए थे, जो भारतीय रक्षा मंत्रालय की सहायक कंपनी है और न केवल 155 मिमी बल्कि 105 मिमी और 125 मिमी के गोला-बारूद का भी निर्माण करती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात और आर्मीनिया भारतीय 155 मिमी तोप के गोलों का ज्ञात ग्राहक हैं। जबकि, एक अनाम यूरोपीय देश, संभवतः पोलैंड या स्लोवेनिया ने हाल ही में भारत से तोपखाने के गोले खरीदे हैं।












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