निज्जर बनाम पन्नून: भारतीय राजदूत ने बताया, कनाडा और US के आरोपों पर भारत की प्रतिक्रिया क्यों है अलग अलग?
Indian envoy on Khalistan: वाशिंगटन ने खालिस्तान अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नून की कथित हत्या की साजिश में "भारतीय कनेक्शन" पर दिल्ली के साथ "कानूनी रूप से प्रस्तुत करने योग्य" इनपुट साझा किए हैं, लेकिन ओटावा ने अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़े केवल "आरोप" साझा किए हैं। कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा ने कनाडाई मीडिया को दिए गये इंटरव्यू में ये कहा है।
भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा ने कहा है, कि "अमेरिका की तरफ से जो कनेक्शन दिए गये हैं, वो 'भारत सरकार कनेक्शन' नहीं है, बल्कि वो भारत में 'लोगों' से जुड़े हैं।
यानि, संजय कुमार वर्मा का कहना है, कि अमेरिका ने गुरपतवंत सिंह पन्नून की हत्या की साजिश को भारत सरकार से नहीं, बल्कि भारत के किसी नागरिक से जोड़ा है।
यह पहली बार है, कि किसी वरिष्ठ भारतीय अधिकारी ने इन दोनों देशों में खालिस्तान अलगाववादियों के खिलाफ कथित हत्या की साजिशों के संबंध में अमेरिका और कनाडा ने भारत के साथ जो साझा किया है, उसके बीच अंतर को स्पष्ट किया है।

निज्जर बनाम पन्नून पर भारत बनाम कनाडा-अमेरिका
आपको बता दें, कि ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने पिछले हफ्ते एक रिपोर्ट में कहा था, कि अमेरिका ने अमेरिकी धरती पर पन्नुन की हत्या की साजिश को विफल कर दिया और इस साजिश में शामिल होने की चिंताओं पर भारत को चेतावनी जारी की है। इस रिपोर्ट के आने के बाद दिल्ली ने कहा, कि उसने ऐसे इनपुट को "गंभीरता से" लिया है। और संबंधित विभागों द्वारा इनकी "पहले से ही जांच की जा रही है।"
दिल्ली की यह प्रतिक्रिया निज्जर की हत्या में भारत सरकार के एजेंटों के संभावित संबंध के बारे में कनाडाई प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो के "विश्वसनीय आरोपों" पर प्रतिक्रिया देने के तरीके से बहुत अलग थी।
कनाडाई टीवी चैनल सीटीवी को दिए एक साक्षात्कार में, उच्चायुक्त वर्मा ने अमेरिकी इनपुट के बारे में पूछे जाने पर कहा, कि "वे इनपुट अमेरिका में गैंगस्टरों, ड्रग तस्करों, आतंकवादियों और बंदूक चलाने वालों के बीच एक सांठगांठ हैं, और ऐसी धारणा है, कि कुछ भारतीय कनेक्शन हो सकते हैं, और अब जब मैं भारतीय कनेक्शन कहता हूं, तो मेरा मतलब भारत सरकार के कनेक्शन से नहीं है, बल्कि वहां 1.4 अरब लोग हैं, इसलिए कुछ भारतीय कनेक्शन हैं, और वे जांच के लिए तैयार हैं। क्योंकि, हमें ऐसे इनपुट मिले हैं, जो कानूनी रूप से प्रस्तुत करने योग्य हैं।"
भारतीय राजदूत ने इंटरव्यू में आगे कहा, कि "जहां तक मैं समझता हूं और जानता हूं, कि भारत और अमेरिका के बीच का संबंध काफी एडवांस स्टेज में है और इसीलिए मेरा मानना है, कि भारत के साथ बेहतर जानकारी साझा की जाएगी।"
इसके विपरीत, भारतीय राजदूत ने प्रधानमंत्री ट्रूडो द्वारा लगाए गए "आरोपों" पर भारतीय और कनाडाई अधिकारियों के बीच बातचीत के बारे में कहा, कि "हां, बातचीत हुई। लेकिन हमें अपने कानूनी अधिकारियों के पास वापस जाकर जांच करने की अनुमति लेने के लिए कुछ विशिष्ट और प्रासंगिक (सबूत) की आवश्यकता थी। इसलिए, जब तक इस प्रकार के इनपुट नहीं होंगे, कानून के शासन वाले देश में, हमारे लिए जांच पर आगे बढ़ना संभव नहीं होगा।"
इसीलिए कनाडा मामले में उन्होंने कहा, "मैं फिर से अपनी स्थिति दोहराऊंगा, कि हमारे पास जांच करने के लिए कोई विशिष्ट या प्रासंगिक जानकारी नहीं है।"
यह पूछे जाने पर, कि अगर निज्जर की हत्या में भारत की कोई भूमिका नहीं है, तो वह सहयोग क्यों नहीं कर रहा है, भारतीय राजदूत ने कहा, कि "इस पर दो प्वाइंट हैं। एक तो यह, कि जांच पूरी हुए बिना ही भारत को दोषी करार दे दिया गया। क्या यह क़ानून का शासन है?"
भारतीय राजदूत ने आगे कहा, कि "क्योंकि भारत को सहयोग करने के लिए कहा गया था। और यदि आप विशिष्ट आपराधिक शब्दावली को देखें, जब कोई हमसे सहयोग करने के लिए कहता है, तो इसका अर्थ है, कि आपको पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है, और बेहतर होगा कि आप सहयोग करें। इसलिए हमने इसे बिल्कुल अलग व्याख्या में लिया है। लेकिन, हमने हमेशा कहा है, कि अगर कुछ विशिष्ट और प्रासंगिक जानकारी है, और हमें बताया गया है, तो हम उस पर गौर करेंगे। और यह बात पहले दिन से ही कही गई थी। इसलिए हमने कभी नहीं कहा, बेशक, हमने सहयोग शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है, क्योंकि हमें लगता है, कि यह अपमानजनक है। लेकिन हमने हमेशा कहा है, कि हमें कुछ विशिष्ट और प्रासंगिक दें, और हम इस पर गौर करेंगे।"












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