कनाडा सस्ते श्रम के लिए भारतीयों का कर रहा शोषण! परेशान छात्रों ने सुनाई आपबीती, काम खत्म..फिर देखते भी नहीं!
टोरंटो में अर्न्स्ट एंड यंग के पूर्व सलाहकार अंशदीप बिंद्रा ने बताया, जब उन्हें हमारी जरूरत थी, तो उन्होंने हमारा शोषण किया। लेकिन जब हमें उनकी मदद या समर्थन की जरूरत होती है, तो कोई नहीं आता।
भारत, फिलीपिंस (India, Philippines) और अन्य देशों से आए हजारों छात्र कनाडा (canada) में अपनी बेहतर जिंदगी का ख्वाब लेकर आते हैं। वे यहां लाखों रुपये खर्च करके पढ़ाई करते हैं और अपने आने वाले भविष्य के निर्माण में जुट जाते हैं। हालांकि,कनाडा सरकार भारत जैसे देशों से आने वाले छात्रों का कैसे इस्तेमाल करती है यह बेहद चौंकाने वाला है। पिछले साल, प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Prime Minister Justin Trudeau) की सरकार ने लगभग 50 हजार विदेशी छात्रों को रोजगार तलाशने के लिए स्नातक होने के बाद 18 महीने तक देश में रहने की अनुमति दी थी। यह वह वक्त था जब कोरोना महामारी से धीरे-धीरे उबरने के बाद अर्थव्यवस्था सुधरने की राह पर थी और कंपनियों में कामगारों को रखने की ज्यादा जरुरत थी।

कनाडा में भारतीय छात्रों का शोषण!
मीडिया रिपोर्ट की माने तो श्रम की कमी और ऊंची बेरोजगारी दर, जो इस सितंबर में 5.2 प्रतिशत तक गिरने के क्रम में कनाडा के इमीग्रेशन मिनिस्टर सीन फ्रेजर ने देश में गंभीर श्रम की कमी को कम करने के उद्देश्य से एक नए अस्थायी उपायों की घोषणा की। हालांकि, एक साल से अधिक समय के बाद इनमें से कुछ स्थायी निवासी उम्मीदवारों को काम करने या देश में रहने के लिए उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया गया। टोरंटो के पास सेनेका कॉलेज के एक एकाउंटेंट और पूर्व छात्र डैनियल डिसूजा ने अपनी खराब होती स्थिति के बारे में कहा, 'मैं घर पर बैठा हूं और अपनी बचाई हुई कमाई से जीवन यापन कर रहा हूं। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि, कनाडा को विदेशी छात्रों की अधिक सराहना करनी चाहिए न कि सस्ते श्रम के तौर पर उनका इस्तेमाल करना चाहिए। देश में विभिन्न स्तरों पर शिक्षा प्राप्त करने वाले 1.83 लाख भारतीय छात्र हैं। कनाडा विदेशों में अकादमिक डिग्री प्राप्त करने वाले भारतीयों के लिए दूसरा सबसे पॉपुलर लोकेशन है।

भारतीयों को सस्ता कामगार समझता है कनाडा
वहीं, 2021 के कार्यक्रम के तहत कई स्नातकों की तरह डिसूजा का करियर भी रुक गया है और उनका भविष्य अनिश्चितता की दौर से गुजर रहा है। वहीं, इमीग्रेशन मिनिस्टर सीन फ्रेजर ने कहा कि कनाडा ने जनवरी से अब तक 4.52 लाख से अधिक अध्ययन परमिट आवेदनों को मंजूरी दी है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में 3.67 लाख आवेदनों को मंजूरी दी गई थी। पिछले वर्ष की तुलना में यह 23 प्रतिशत की वृद्धि है।

छात्र काफी मुश्किलों में जी रहे हैं
2021 में कनाडा में 6.20 लाख से अधिक छात्र थे, जिनमें से एक तिहाई भारत से थे।कई स्नातक जो 2021 के कार्यक्रम का हिस्सा थे, उन्हें अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी, क्योंकि उनका वर्क परमिट खत्म हो गया था। भले ही उनके आवेदनों को मंजूरी दे दी जाती है, लेकिन छात्रों को नौकरी, आय या स्वास्थ्य और सामाजिक लाभ के बिना महीनों मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कुल मिलाकर देखा जाए तो वर्तमान में उनका जीवन अधर में तो लटका हुआ है।

जरूरत खत्म..फिर देखते भी नहीं!
वहीं, टोरंटो में अर्न्स्ट एंड यंग के पूर्व सलाहकार अंशदीप बिंद्रा ने बताया, जब उन्हें हमारी जरूरत थी, तो उन्होंने हमारा शोषण किया। लेकिन जब हमें उनकी मदद या समर्थन की जरूरत होती है, तो कोई नहीं आता। हम शुल्क और करों का भुगतान करते हैं और बदले में हमें कुछ नहीं मिल रहा है। उन्होंने कनाडा सरकार पर नाराजगी प्रकट करते हुए आगे कहा कि, हमने देश में श्रम की कमी को हल करने में मदद की लेकिन आप यह नहीं समझेंगे।

कनाडा के विकास में भारतीयों का बड़ा योगदान
भारतीय छात्रों को उम्मीद थी कि परमिट विस्तार से उन्हें कनाडा में कार्य अनुभव हासिल करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा। हालांकि आवेदनों के एक बैकलॉग में फंसने के कारण उन्हें संसाधित करने की अनुमति देने के लिए सिस्टम को 10 महीने के लिए बंद कर दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि, एक बार सिस्टम सक्रिय हो जाने के बाद छात्रों ने खुद को प्रवासियों के साथ प्रतिस्पर्धा करते दिखे, जिसके कारण स्थायी निवास प्राप्त करने की संभावना भी कम होती दिख रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय छात्र कनाडा की अर्थव्यवस्था में सालाना 21 अरब डॉलर (15.3 अरब डॉलर) से अधिक का योगदान करते हैं।
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