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फारस की खाड़ी में इंडियन एयरफोर्स दिखा रहा दम, UAE और अमेरिका का मिला साथ, पाकिस्तान की हालत पतली

फारस की खाड़ी में पाकिस्तान के दोस्त के साथ भारत विश्व का सबसे बड़ा मिलिट्री ड्रिल "डेजर्ट-फ्लैग" को अंजाम देने जा रहा है। भारत के इस वारड्रिल से पाकिस्तान परेशान हो गया है।

अबूधाबी: फारस की खाड़ी में पाकिस्तान का होश उड़ाने भारत तैयार हो गया है और भारत का साथ दे रहा है पाकिस्तान का ही दोस्त मुल्क UAE। जी हां फारस की खाड़ी में इंडियन एयरफोर्स पहली बार युद्धाभ्यास "डेजर्ट-फ्लैग" का आगाज कर रहा है जिसने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के पेशानी पर परेशानी ला दिया है। भारत के लिए ये युद्धाभ्यास कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण है मोदी सरकार की ये बड़ी डिप्लोमेटिक उपलब्धि मानी जा रही है। वहीं, पाकिस्तान के लिए ये युद्धाभ्यास कई मायनों में परेशान करने वाला है क्योंकि खाड़ी देशों में जिन देशों को पाकिस्तान अपना दोस्त समझता है, हर वो देश इस एयरफोर्स ड्रिल में शामिल हो रहे हैं साथ ही F-16 को लेकर भी पाकिस्तान के माथे पर पसीने आ गये हैं।

फारस की खाड़ी में IAF का युद्धाभ्यास

फारस की खाड़ी में IAF का युद्धाभ्यास

सामरिक लिहाज से भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले फारस की खाड़ी में पहली बार इंडियन एयरफोर्स युद्धाभ्यास करने जा रहा है। इस युद्धाभ्यास में भारत के साथ संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हो रहा है, लिहाजा इस युद्धाभ्यास का महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है। भारत की तरफ से इस युद्धाभ्यास में बुधवार को 6 सुखोई-30MKI फाइटर जेट, दो C-17 ग्लोबमास्टर-3 एयरक्राफ्ट और इंडियन एयरफोर्स के करीब 125 जवान इस 'डेजर्ट फ्लैग' युद्धाभ्यास में हिस्सा लेंगे। भारत के साथ इस युद्धाभ्यास में अमेरिका, फ्रांस, साउथ कोरिया, यूएई, सऊदी अरब और बहरीन एयरफोर्स भी शामिल हो रहा है। ग्रीस, जॉर्डन और कुवैत इस एयरफोर्स वारफेयर को ऑब्जर्वर बनकर वॉच करेंगे। युद्धाभ्यास में अमेरिका की F015 और F-16 एयरक्राफ्ट को शामिल किया गया है जबकि फ्रांस ने रफाल और मिराज-2000 को युद्धाभ्यास में भेजा है। इस युद्धाभ्यास में भारत समेत विश्व की बड़ी बड़ी शक्तियां अपना वर्चस्व दिखाने की कोशिश करेंगी। साथ ही माना जा रहा है कि इस संयुक्त युद्धाभ्यास में हर देश अपनी अपनी शक्ति को आजमाने की कोशिश करेगी।

खाड़ी देशों के साथ भारत की दोस्ती

खाड़ी देशों के साथ भारत की दोस्ती

भारतीय एयरफोर्स के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में भारत और खाड़ी देशों के बीच काफी अच्छे संबंध बन गये हैं। खाड़ी देशों के साथ भारतीय सेना का लगातार युद्धाभ्यास चलता रहता है साथ ही खाड़ी देशों के साथ मिलिट्री इंटेलीजेंस भी भारत शेयर करता है। और ऐसा पहली बार हो रहा है जब इंडियन एयरफोर्स बेहद महत्वपूर्ण फारस की खाड़ी में कई देशों के साथ युद्धाभ्यास कर रहा है। एयरफोर्स के अधिकारी ने बताया कि 'एयरफोर्स एक्सरसाइज में डिफेंसिव और ऑफेंसिव ऑपरेशन को अंजाम दिए जाएंगे। इसके साथ ही हम अपनी ताकत को विपरीत परिस्थितियों में परखने की कोशिश करेंगे। वहीं इंडियन एयरफोर्स एयरबॉर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्मट को भी मजबूत करेगी। साथ ही फ्लाइट रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट रिएलिस्टिक लड़ाई पर भी ध्यान दिया जाएगा'। पिछले पांच सालों में यह चौथी बार जब इंडियन एयरफोर्स कई देशों के साथ मिलकर युद्धाभ्यास कर रहा है। इससे पहले भारत 2016 में अमेरिकन 'रेड फ्लैग', 2017 में इजरायल में 'ब्लू फ्लैग', और 2018 में ऑस्ट्रेलिया में 'पिच ब्लैक' में शामिल हो चुका है।

पाकिस्तान को टेंशन

पाकिस्तान को टेंशन

फारस की खाड़ी में चलने वाले एयरफोर्स के युद्धाभ्यास में अमेरिका ने F-15 और F-16 फाइटर जेट को भाग लेने के लिए भेजा है, लिहाजा पाकिस्तान की पेशानी पर बल पड़ गये हैं। पाकिस्तान एयरफोर्स ने एफ-16 फाइटर जेट अमेरिका से लीज पर लिया हुआ है और पाकिस्तान एयरफोर्स के बेड़े में सबसे खतरनाक फाइटर जेट एफ-16 फाइटर जेट ही है। और एफ-16 फाइटर जेट के साथ भारतीय एयरफोर्स के जवान अब युद्धाभ्यास में शामिल होंगे लिहाजा इस एयरक्राफ्ट की हर बारीकियों से भारतीय एयरफोर्स के जवान वाकिफ हो जाएंगे और फिर पाकिस्तान के पास धौंस दिखाने वाला आखिरी शस्त्र भी खत्म हो जाएगा और यही बाक पाकिस्तान को खाए जा रही है। पाकिस्तान चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा है। इसके साथ ही पाकिस्तान जिन देशो को मुस्लिम मुल्क कहकर अपने पाले में करना चाहता है वो सभी देश आज भारत के साथ खड़े हैं, लिहाजा पाकिस्तान जल-भुनकर राख हो रहा है।

फारस की खाड़ी महत्वपूर्ण कैसे?

फारस की खाड़ी महत्वपूर्ण कैसे?

फारस की खाड़ी, पश्चिम एशिया में हिंद महासागर का ही एक विस्तार है, जो ईरान से लेकर अरब देशों तक फैला हुआ है। यूनाइटेड नेशंस ने इसे फारस की खाड़ी नाम दिया हुआ है। फारस की खाड़ी को आठ गल्फ कंट्री बहरीन, ईरान, कुवैत, इराक, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शेयर करता है। इन खाड़ी देशों का कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के प्रमुख उत्पादक होने से उनके आर्थिक हित भी एक तरह के ही हैं। और फारस की खाड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से काफी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।

वित्तवर्ष 2018-19 में भारत और खाड़ी देशों के बीच 162 बिलियन अमेरिकन डॉलर का व्यापार हुआ है। यह एक वित्तवर्ष में भारत द्वारा दुनिया के देशों के साथ होने वाले व्यापार का करीब 20 प्रतिशत है। करीब 75 बिलियन डॉलर का पेट्रोलियम पदार्थों और प्राकृतिक गैस का आयात भारत फारस की खाड़ी से ही करता है। इसके साथ ही खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीय हर साल करीब 40 बिलियन डॉलर भारत भेजते हैं। लिहाजा भारत के लिए ये युद्धाभ्यास कई मायनों में महत्वपूर्ण है।

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