इंडियन एयर फोर्स बनाम PLA, भारत-चीन में अगर आज जंग हुई, तो किसकी वायुसेना पड़ेगी भारी?
भारत और चीन, दोनों ही देशों ने अपनी रक्षा बजट में बेतहाशा वृद्धि की है, लेकिन चीन की वायुसेना की क्षमता भारत के मुकाबले काफी ज्यादा है। लेकिन, इसके बाद भी इंडियन एयरफोर्स से उलझने की क्षमता चीन के पास नहीं है।
Indian Air Force VS Chinese Air Force: भारत और चीन, दुनिया के दो सबसे ज्यादा आबादी वाले देश हैं, लेकिन दोनों ही हमेशा से जंग के मुहाने पर खड़े रहते हैं। खासकर पिछले कुछ सालों में कई बार जंग की नौबत आ चुकी है और एक बार फिर से दोनों ही देश आमने-सामने हैं। 1962 में दोनों ही देशों के बीच जंग हो चुकी है और गलवान घाटी में हिंसक झड़प और अब तवांग में टकराव... दोनों देश एक बार फिर से तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। हालांकि, 1962 के युद्ध में वायु शक्ति की कोई खास भूमिका नहीं थी, लेकिन आज, दोनों पक्षों के पास आधुनिक और सक्षम वायु सेनाएं हैं, और वे एक हवाई युद्ध में आमने-सामने आ सकते हैं। लिहाजा, ये जानना जरूरी है, कि आखिर भारत और चीन के बीच किसकी वायुसेना कितनी शक्तिशाली है और जंग में किसे बढ़त मिल सकती है?

भारतीय वायुसेना के पास फाइटर जेट्स
GlobalSecurity.org के मुताबिक, साल 2020 तक भारतीय वायु सेना के पास Su-30MKI फ्लैंकर्स, डसॉल्ट राफेल, मिराज 2000s, मिग-29 फुलक्रम्स, आधुनिक मिग-21s और स्वदेशी तेजस फाइटर जेट्स के बेड़े हैं। इसके साथ ही इंडियन एयरफोर्स के पास पुराने विमानों में जगुआर ग्राउंड अटैक प्लेन और मिग -27 फाइटर जेट्स भी शामिल हैं। इंडियन एयरफोर्स के पास कुल 2263 एयरक्राफ्ट्स हैं, जिनमें से 173 फाइटर एयरक्राफ्ट हैं, जबकि 405 मल्टीपल एयरक्राफ्ट हैं। भारतीय वायुसेना के पास इनके अलावा 120 अटैक एयरक्राफ्ट हैं, जबकि 729 हेलीकॉप्टर्स हैं। वहीं, भारतीय वायुसेना के पास 280 फ्लैंकर्स हैं, जो रीढ़ की हड्डी मानी जाती है।

चीनी वायुसेना के पास कितने जेट्स?
GlobalSecurity.org की रिपोर्ट के मुताबिक, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स, भारतीय वायु सेना की तरह ही फ़्लैंकर्स पर बहुत अधिक निर्भर रहती है। चीन के पास मुख्य रूप से J-11 फ्लैंकर हैं, जो रूस की Su-27 की कॉपी है। 2020 तक चीन के पास बेसलाइन J-11 के 312 फाइटर जेट्स होने के साथ-साथ Su-35S के 24 फ़्लैंकर्स मौजूद हैं। वहीं, चीन के पास मोटे तौर पर 65 Su-30MKK फ़्लैंकर्स और 75 J-11B फ़्लैंकर्स हो सकते हैं। इनके अलावा चीन ने बड़ी संख्या में J-10 फायरबर्ड मल्टी-रोल फाइटर्स, पुराने J-7 फिशबेड और J-8 फिनबैक फाइटर्स और JH-7 फ्लाउंडर फाइटर-बॉम्बर्स को भी अपने वायुसेना के बेड़े में जोड़ रखा है।

भारत के मुकाबले चीन बड़ी ताकत, लेकिन...
चीन के पास तकनीकी रूप से बड़ी ताकत है, लेकिन भारत से मुकाबला होने की स्थिति में चीन की वायुसेना को मुंह की खानी पड़ सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह ये है, कि भले ही देखने में चीन की वायुसेना का आकार भारतीय वायुसेना से काफी बड़ा लगता हो, लेकिन चीन सिर्फ भारत के साथ ही नहीं उलझा है, बल्कि चीन को अपनी ताकत का एक बड़ा हिस्सा ताइवान स्ट्रेट में और दक्षिण चीन सागर में खर्च करना पड़ता है, जो चीन के लिए भारत से ज्यादा जरूरी है। दक्षिण चीन सागर में तनाव के साथ-साथ चीन का जापान के साथ सेनकाकू द्वीपों पर भी तनाव चल रहा है और चीन सेनकाकू द्वीप में भी घुसपैठ करता रहता है, लिहाजा जापान के साथ एक समुद्री क्षेत्रीय विवाद के साथ, चीन को एक साथ तीन मोर्चों पर संघर्ष का सामना करने के लिए तैयार रहना होता है, लिहाजा किसी भी हालत में चीन अपनी पूरी ताकत भारत के खिलाफ झोंक नहीं सकता है।

क्या चीन, भारतीय वायुसेना पर भारी पड़ेगा?
FlightGlobal.com के मुताबिक, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी एयर फोर्स के पास लगभग 190 लड़ाकू और लड़ाकू-बमवर्षक हैं, लेकिन उनमें से 100 से ज्यादा पुराने J-7, J-8, और Q-5 विमान हैं, जिसे उसने जापान के साथ तनाव को देखते सेनकाकू मोर्चे की तरफ लगा रखा है। हालांकि, भारत भी चीन के साथ साथ पाकिस्तान के मोर्च पर भी उलझा हुआ है और इंडियन एयरफोर्स को अपनी शक्ति का एक हिस्सा पाकिस्तान के लिए बचाकर रखना पड़ रहा है, लेकिन भारत के साथ सबसे अच्छी बात ये है, कि भारत का पाकिस्तान मोर्चा भी चीन मोर्चे का ही विस्तार है, क्योंकि वो पूरा क्षेत्र हिमालयन ही है।

उलझने पर चीन को सिर्फ घाटा ही घाटा
पाकिस्तान के अधिकांश लड़ाकू विमान आज भी मिराज III, मिराज 5 और जे-7 जैसे पुराने डिजाइन के हैं। इसमें कोई शक नहीं, कि चीन अपनी पूरी शक्ति को एक साथ ले आए, तो वो इंडियन एयरफोर्स पर भारी पड़ जाएगा, लेकिन चीन के लिए ऐसा करना संभव नहीं है, क्योंकि फिर चीन को जिस विध्वंस का सामना करना पड़ेगा, उससे उसे ताइवान को हमेशा के लिए भूलना होगा और दक्षिण चीन सागर से भी हाथ धोना पड़ जाएगा। इसके अलावा पूर्वी चीन सागर में भी चीन अत्यधिक कमजोर हो जाएगा। और FlightGlobal.com के मुताबिक, चीन अगर अपनी शक्ति का सिर्फ एक हिस्सा भेजता है, तो इंडियन एयरफोर्स उसे फौरन कुचलने की क्षमता रखती है। लिहाजा, एक्सपर्ट्स का मानना है, कि चीन सिर्फ भारत को उलझाना चाहता है, वो किसी भी हाल में भारत से उलझना नहीं चाहता है।

इंडियन एयरफोर्स है बिल्कुल बेखौफ
दूसरी ओर, भारत के सामने ऐसी कोई समस्या नहीं है। ऐसे में उसके पास चीन के साथ हवाई युद्ध जीतने का एक अच्छा मौका है, सिर्फ इसलिए कि भारतीयों को संभावित दूसरे मोर्चे का सामना नहीं करना है। इसके साथ ही पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF), अपने बेड़े और रणनीतिक लिस्ट के मामले में भारतीय वायु सेना (IAF) की तुलना में अधिक शक्तिशाली है, लेकिन, भारतीय वायुसेना रणनीतिक उद्देश्यों और अनुभवी सैनिकों के लिए अपने प्लेटफार्मों और ठिकानों के लिहाज से अधिक विश्वसनीय है, लिहाजा हिमालयन क्षेत्र में अगर युद्ध होता है, तो भारत के पास एक साथ कई ठिकानों से हमला करने की क्षमता हासिल होगी और भारत अपनी नौसेना को भी चीन के खिलाफ उतार सकता है, जबकि चीन ऐसा नहीं कर पाएगा।












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