Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

इस कमी की वजह से गिरा था अभिनंदन का विमान, वायुसेना ने सुधारी गलती.. अब बनाया 'हवाई चक्रव्यूह', जानें क्या है?

Indian Air Force: पांच साल पहले, भारत के लड़ाकू विमानों ने 1971 युद्ध के बाद पहली बार जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर बमबारी करने के लिए पाकिस्तान की सीमा पार की थी। जिसके बाद पाकिस्तानी वायु सेना ने इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैमर के साथ जवाबी कार्रवाई की थी।

उस दौरान एक भारतीय लड़ाकू विमान पाकिस्तान की सीमा में गिर गया था और हमारे बहादुर पायलट अभिनंदन को पाकिस्तानी सेना ने पकड़ लिया था। हालांकि, एक हफ्ते के अंदर अभिनंदन को पाकिस्तान से वापस ले आया गया, लेकिन उस घटना के बाद भारतीय वायु सेना (IAF) को एक ऑपरेशनल डेटा लिंक की जरूरत महसूस हुई, क्योंकि पाकिस्तानी इलेक्ट्रॉनिक जैमर ने भारतीय भारतीय सुखोई और मिराज के बीच के कम्युनिकेशन को ब्लॉक कर दिया था।

Indian Air Force

इलेक्ट्रॉनिक युद्ध का युग

इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के युग में वो पहला मौका था, जब इंडियन एयरफोर्स को परेशान होना पड़ा था और भारतीय वायुसेना के मिग-21 एविएटर विंग कमांडर अभिनंदन, जिन्हें पाकिस्तान में पकड़ लिया गया था, वो जैमर की वजह से ग्राउंड कंट्रोलर की तरफ से भेजे गये निर्देशों को नहीं सुन सके थे।

अभिनंदन के पास सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो नहीं था और इलेक्ट्रॉनिक जैमर की वजह से अभिनंदन का संपर्क ग्राउंड स्टेशन से कट गया था। सॉफ्टवेयर से संचालित होने वाले रेडियो की कमी ने भारतीय वायुसेना के ऑपरेशन को बुरी तरह से प्रभावित किया था और ये पहली बार था, जब विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम ने किसी भी युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

आधुनिक लड़ाई में विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम में ही सबसे पहले युद्ध जीते या हारे जाते हैं।

ये एक अदृश्य युद्ध का मैदान होता है, जो युद्ध लड़ने का एक भौतिक आधार देता है। यह एक ऐसा स्थान है, जहां गोलियों और बमों के बजाय ऊर्जा और सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है। यह किसी भी बल को किसी भी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ असममित लाभ प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।

भारतीय वायुसेना की क्षमता में यह महत्वपूर्ण कमी तब उजागर हुआ, जब पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों ने सीमा पार की थी। उस समय की रिपोर्टों में सुझाव दिया गया था, कि चूंकि पाकिस्तानी एयरफोर्स के पास बेहतर इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैमर थे, वे उस समय हवाई उड़ान भरने वाले भारतीय लड़ाकू जेटों के बीच के कम्युनिकेशन को ब्लॉक करने में सक्षम थे।

यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया है, कि "इंडियन एयरफोर्स का हवा से जमीन और जमीन से हवा का नेटवर्क अब काफी ज्यादा आगे बढ़ गया था, लेकिन हवा से हवा का नेटवर्क पिछड़ गया। हमने न तो इसे आयात किया और न ही इसे स्वदेशी रूप से विकसित किया।"

हालांकि, सूत्र ने स्पष्ट रूप से यह कहने से इनकार कर दिया, कि इससे पाकिस्तान के जवाबी हमलों पर भारत की प्रतिक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

लेकिन साधारण भाषा में समझें, तो इसका मतलब यह है, कि उड़ने वाले राडार कुशलतापूर्वक स्थिति को ग्राउंड स्टेशनों तक पहुंचा सकते हैं, जो बदले में लड़ाकू विमानों को जानकारी भेजेंगे। लेकिन, विभिन्न लड़ाकू विमानों के बीच कम्युनिकेश नहीं था।

लिहाजा, इस जगह पर ODL फैसिलिटी की जरूरत होती है।

ऑपरेशनल डेटा-लिंक, यानि ODL टेक्नोलॉजी से फाइटर जेट्स के बीच का कम्युनिकेशन तैयार किया जाता है, जिसपर किसी भी इलेक्ट्रॉनिक जैमर का असर नहीं होता है और इससे डेटा एक्सचेंज की सुविधा भी मिलती है। उस ढांचे के भीतर, ओडीएल नेटवर्क पार्टियों को वास्तविक समय में एक-दूसरे के सेंसर फ़ीड को देखने में सक्षम बनाता है। ओडीएल नेटवर्क में फीड रडार, सोनार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (ईओ) सिस्टम जैसे कैमरे भी लगे होते हैं।

इसे इस तरह से समझ सकते हैं, कि एक फाइटर जेट हवाई क्षेत्र में घुसपैठ करने वाले दुश्मन के फाइटर जेट की पहचान करने के लिए allying airborne early warning and control (AEW&C) सिस्टम का इस्तेमाल करता है, जो ग्राउंड स्टेशन पर मौजूद रडार से मिल रहे डेटा का इस्तेमाल करता है। इस सिस्टम के जरिए एक देश के विमानों के बीच आपसी कम्युनिकेश स्थापित होता है और खतरे का मुकालबा किया जा सकता है।

लेकिन, पाकिस्तान के साथ उस वक्त जो मुकाबला हुआ था, उस दौरान इंडियन एयरफोर्स के बीच कम्युनिकेशन टूट गया था। जबकि, पाकिस्तानी एयरफोर्स ने स्वदेशी रूप से विकसित लिंक-17 का इस्तेमाल किया था। पाकिस्तान ने दावा किया, कि उसने अपने एयरफोर्स को एक नेटवर्क प्रोटोकॉल दिया है जिसका उपयोग वह हवाई संपत्तियों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए कर सकता है, विशेष रूप से स्वदेशी रूप से निर्मित जेएफ -17 'थंडर' के लिए। ओडीएल के कारण, जेएफ -17 विस्तारित-एयर रेंज का फायदा उठा सकता है और फिर उसका AEW&C सिस्टम रडार से जो जानकारी फाइटर जेट को भेजता है, वो लगातार जारी रहता है।

Indian Air Force

भारत ने सुधारी अपनी कमी

इंडियन एयरफोर्स के तत्कालीन वायुसेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल आर.के.एस.भदौरिया ने एक डिफेंस मैग्जीन को दिए गये इंटरव्यू में स्वीकार किया था, कि ऑपरेशनल डेटा लिंक की कमी के कारण 27 फरवरी को भारतीय वायुसेना की प्रतिक्रिया में बाधा उत्पन्न हुई थी। उन्होंने कहा, कि उनका कहना था, "यदि आप विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम में युद्ध नहीं जीतते हैं, तो आप युद्ध बिल्कुल भी नहीं जीत सकते हैं। यही कारण है कि अमेरिकी सेना ने विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम को युद्ध का मैदान बताया है।"

यानि, उस वक्त अभिनंदन के विमान से संपर्क टूटने की वजह भारत की कमजोरी ऑपरेशनल डेटा-लिंक (ओडीएल) की कमी थी। जिसके बाद इंडियन एयरफोर्स ने अपनी इस कमी को सही किया है भदौरिया ने कहा, कि भारतीय वायुसेना का इरादा उसके बाद इस सिस्टम से अपने सभी लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, कमांड और नियंत्रण विमानों सहित अपने सभी हवाई प्लेटफार्मों को कनेक्ट करना था।

भारतीय वायुसेना ने पिछले पांच सालों में अपनी उस कमी को दूर किया है और कम्युनिकेशन का नेटवर्क तैयार किया है, जो किसी भी हाल में ब्लॉक नहीं हो सकता है।

इंडियन एयरफोर्स अपने सभी हवाई प्लेटफार्मों के साथ-साथ ग्राउंड स्टेशनों को एयरबोर्न प्लेटफार्मों से जोड़ने वाले सुरक्षित क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर नेटवर्क की पूरी श्रृंखला चाहता है, जिसमें एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली (IACCS) रीढ़ की हड्डी के रूप में काम करेगी। इससे ऑपरेशन के दौरान लगातार ग्राउंड स्टेशन से मदद लेने और जरूरत के मुताबिक फैसले लेने में सुविधा मिलेगी।

आकाश में भारत ने कैसे बनाया चक्रव्यूह?

पांच साल पहले हुई गलती को सुधारते हुए इंडियन एयरफोर्स ने इजराइल से बीएनईटी सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (एसडीआर) की खरीद में तेजी लाई और उन्हें अपने विमान बेड़े के साथ एकीकृत किया है। उस वक्त भारतीय वायुसेना के मिराज-2000, मिग-29 और सुखोई-30 लड़ाकू विमानों के लिए इजरायली फर्म Rafael से एसडीआर की आपातकालीन खरीद की गई थी।

हैदराबाद स्थित एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स लिमिटेड और इजराइल स्थित राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड ने भारतीय वायुसेना को बीएनईटी-एआर एसडीआर की आपूर्ति करने के लिए एस्ट्रा राफेल कॉमसिस प्राइवेट लिमिटेड (एआरसी) नाम से एक ज्वाइंट वेंचर कंपनी का निर्माण किया। इसका कम एआरसी बीएनईटी-एआर एसडीआर के ऑपरेशन से संबंधित तमाम कामों को संभालना है।

एसडीआर न केवल हवा में लड़ाकू विमानों के बीच, बल्कि हवा में और जमीन पर मौजूद लड़ाकू विमानों के बीच, और सबसे महत्वपूर्ण, हवा में लड़ाकू विमानों और अवाक्स के बीच भी सुरक्षित संचार सुनिश्चित करेगा। इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग की स्थिति में, संचार दूसरी बैंडविर्थ पर ट्रांसफर हो जाएगा, और मिशन बिना किसी बाधा के चल सकता है। एसडीआर सुरक्षित डेटा लिंकिंग प्रदान करेगा, जिसका अर्थ है कि हर किसी को पता चल जाएगा, कि अन्य लोग कहां हैं, इस प्रकार बेहतर "लड़ाकू नियंत्रण" में मदद मिलेगी और अभिनंदन जैसा हादसा दोबारा नहीं होगा।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+