कश्मीर-लद्दाख में पहाड़ का सीना चीरकर भारत बना रहा है विश्व की सबसे ऊंची सुरंग, पाकिस्तान के पेट में उठा दर्द
डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये सुरंग भारतीय सेना को रणनीतिक तौर पर अत्यंत फायदा देने वाला है। भारत ये सुरंग विश्व में सबसे ऊंचे स्थान पर बना रहा है।
कश्मीर, अक्टूबर 02: हिमालय की विशालकाय पर्वत श्रृंखला....हर तरफ चट्टान ही चट्टान और उसके बीच से सुरंग खोदने की कोशिश में लगे सैकड़ों भारतीय मेहनतकश...। लक्ष्य बस एक, किसी हाल में सुरंग को बनाकर ही दम लेना है। भारत सरकार के इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट ने चीन और पाकिस्तान के होश उड़ा दिए हैं। आपने अकसर सुन रहे होंगे, कि चीन भारतीय सीमा से सटे इलाकों में एयरपोर्ट, हाईवे और कैंपों का निर्माण कर रहा है, लेकिन भारत जिस सुरंग का निर्माण कर रहा है, उसने पाकिस्तान और चीन..दोनों को बहुत बेचैन कर दिया है।

भारत का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट
कश्मीर को लद्दाख घाटी से जोड़ने के लिए सैकड़ों मजदूर दिन रात काम कर रहे हैं। लगातार पुलों के निर्माण किए जा रहे हैं और काम लगातार बिजली की गति से चल रहा है। रणनीतिक तौर पर देखा जाए तो लद्दाख भारत के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है, लेकिन दिक्कत ये रहती है कि लद्दाख तक सामान पहुंचाने के लिए जो रास्ता है, वो सर्दी के मौसम में काफी खतरनाक होता है, लिहाजा खाद्य आपूर्ति की सप्लाई हवाई मार्ग से करनी पड़ती है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि इस सुरंग में चार हिस्से हैं, जिनमें से पहली सुरंग (6.5 किलोमीटर) का काम पूरा हो चुका है और इस बार की सर्दियों में इस सुरंग की वजह से सोनमर्ग जाना काफी आसान हो जाएगा। सोनमर्ग चट्टानी जोजिला पर्वत दर्रे के पार लद्दाख शुरू होने से पहले शंकुधारी पहाड़ों के बीच स्थिति काफी खूबसूरत जगह है।

प्रोजेक्ट की लागत
भारतीय इंजीनियर्स 11 हजार 500 फीट की ऊंचाई पर इस सुरंग का निर्माण कर रहे हैं और आखिरी सुरंग बनाने की लागत 930 मिलियन डॉलर है और आखिरी सुरंग करीब 14 किलोमीटर लंबी होगी, जो बेहद चुनौतीपूर्ण माने जाने वाले जोजिला दर्रे को बायपास करेगी और सोनमर्ग को लद्दाख से जोड़ेगी। अधिकारियों का कहना है कि यह 11,500 फीट की ऊंचाई पर भारत की सबसे लंबी और सबसे ऊंची सुरंग होगी।

भारत को होगा जबरदस्त फायदा
इस सुरंग को बनाने में लगे कश्मीर के श्रमिक तारिक अहमद कहते हैं कि ''यह कोई आम निर्माण कार्य नहीं है, इस काम को करने से काफी कुछ सीखने को मिल रहा है''। तारिक अहमद इस सुरंग निर्माण में ड्रिल मशीन चलाते हैं और चट्टानों को चीरते हैं। निर्माण कार्य से जुड़े एक और मजदूर का कहना है कि ''सुंरग निर्माण कार्य में सैकड़ों मजदूर लगे हुए हैं और किसी को मजदूरी के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है''। भारतीय और चीनी सैनिक लद्दाख के काराकोरम पहाड़ों में अपनी वास्तविक सीमा पर 16 महीनों से अधिक समय से हिंसक गतिरोध में लगे हुए हैं, जिसे एलएसी कहा जाता है। दोनों देशों ने वहां पर तोपखाने, टैंक और लड़ाकू विमानों को तैनात कर रखा है।

काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है सुरंग
भारतीय डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत सरकार की ये सुरंग परियोजना को लद्दाख के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सेना को खाद्य आपूर्ति और हथियारों की आपूर्ति को काफी आसान कर देगा और इस सुरंग की वजह से इंडियन आर्मी को रणनीतिक तौर पर काफी ज्यादा मदद मिलेगी। भारत के राजनेता भी इस परियोजना को लेकर काफी उत्साहित हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सुरंग का जोजिला वाला हिस्सा 2026 तक काम करना शुरू कर देगा। भारत के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले हफ्ते इस परियोजना स्थल के दौरा किया है और कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि 2024 के आम चुनाव से पहले काम पूरा हो जाएगा। गडकरी ने कहा कि, "यह एक चुनौती है जिसे मैं जानता हूं, लेकिन मुझे विश्वास है कि वे इसे समय पर पूरा कर सकते हैं।" उन्होंने कहा कि, "जाहिर है, हम चाहेंगे कि यह चुनाव से पहले समाप्त हो जाए।"

भारत सरकार की क्या है योजना
सरकार जम्मू-कश्मीर में 32 किमी की कुल लंबाई की 20 सुरंगें और लद्दाख में कुल 20 किमी की 11 सुरंगों का निर्माण कर रही है। इन 31 सुरंगों की कुल लागत लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये होगी। गगनगीर और सोनमर्ग के बीच 6.5 किमी की जेड-मोड सुरंग जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर और लद्दाख में कारगिल के बीच सभी मौसमों में कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। इस सुरंग के बनने के बाद ये पहली बार होगा जब सर्दियों के मौसम में भी सोनमर्ग तक सड़क रास्ते जाया जा सकेगा।

जोजिला सुरंग: बालटाल और मीनामार्ग
श्रीनगर-लेह खंड पर बालटाल और मीनामार्ग के बीच जोजिला सुरंग लेह और श्रीनगर के बीच पूरे साल संपर्क प्रदान करेगी। 14 किमी लंबी सुरंग चुनौतीपूर्ण जोजिला दर्रे को बायपास करेगी और सोनमर्ग को लद्दाख से जोड़ेगी। यह 11,575 फीट की ऊंचाई पर होगा, जिससे यह संभवत: दुनिया में सबसे ऊंचा होगा। जाहिर सी बात है, चीन और पाकिस्तान भारत के इस प्रोजेक्ट से खुश नहीं हैं, लेकिन भारत सरकार ने इन प्रोजेक्ट के अलावा भी कई और प्रोजेक्ट इन दुर्गम इलाकों के लिए तैयार किए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले वक्त में भारत सरकार चीन की सीमा तक नये प्रोजेक्ट्स का ऐलान कर सकती है और उन इलाकों में पर्यटन का विकास कर भारत की स्थिति को काफी मजबूत करेगी।












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