अमेरिका को एक बार फिर ठेंगा दिखाते हुए रूस से 2 बिलियन डॉलर की डील करेगा भारत
नई दिल्ली, 12 अप्रैल: भारत ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से किफायती दाम पर तेल खरीदना क्या शुरू किया, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को जैसे मिर्ची लग गई। जबकि, यूरोप के कई देश रूस से अपना ऊर्जा आयात घटाने को कभी भी तैयार नहीं हुए हैं। यह मामला सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्चुअल मुलाकात में भी उठा है। लेकिन, भारत ने जैसा कि हमेशा से संकेत दिया है कि यह अपनी विदेश नीति में देशहित को सबसे ऊपर रखता है और रखता रहेगा। अब खबरें हैं कि भारत रूस पर लगी सैकड़ों पाबंदियों के बावजूद वहां अपना निर्यात बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है।

रूस से 2 बिलियन डॉलर की डील करेगा भारत
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत, रूस के साथ 2 बिलियन डॉलर के अतिरिक्त कारोबार की योजना बना रहा है। इस मामले की जानकारी रखने वालों के मुताबिक दोनों देशों के बीच लोकल करेंसी में द्विपक्षीय कारोबार जारी रखने को लेकर रास्ता निकाला जा रहा है। यह सब उस स्थिति में हो रहा है, जब यूक्रेन पर हमले की वजह से रूस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की भरमार हो रही है। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने अपनी पहचान नहीं जारी होने की शर्त पर बताया है कि मोदी सरकार भारत में बने कई उत्पादों के लिए रूस के बाजार को उदार बनाने को लेकर उसके साथ बातचीत कर रहा है। यह जानकारी ऐसे वक्त में मिली है, जब दोनों सरकारें व्यापारिक संतुलन के रास्ते तलाशने के लिए रुपये और रूबल में कारोबार करने के प्रस्ताव पर काम कर रही हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि वाणिज्य मंत्रालय ने इसपर टिप्पणी के लिए भेजे ईमेल का तत्काल कोई जवाब नहीं दिया है।

रूस को निर्यात बढ़ाने पर काम कर रहा है भारत-रिपोर्ट
जानकारी के मुताबिक अब भारत उन उत्पादों का रूस को निर्यात करना चाहता है, जो दूसरे देश अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर से लगाई गई पाबंदियों की वजह से रोक चुके हैं। इन चीजों में दवा उत्पाद, प्लास्टिक, ऑर्गेनिक और इनॉर्गेनिक केमिकल्स, होम फर्मिशिंग, चावल, चाय और कॉफी, दूध से बने उत्पाद आदि शामिल हैं। रूस में तेल की कीमतें घटने के बाद भारत की ओर से इसके आयात बढ़ाने को लेकर इसकी काफी आलोचना हो चुकी है। सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच जो वर्चुअल बैठक हुई थी, उसमें भी बाइडेन ने यही कहा था कि वह भारत को सहयोग करने के लिए तैयार है, जिससे ऊर्जा उत्पाद में इसे रूस पर ज्यादा निर्भर रहने की जरूरत ना पड़े।

रूस से बढ़ रहा है भारत का कारोबार-रिपोर्ट
व्यापार विभाग के आंकड़ों के एक विश्लेषण से पता चलता है कि भारत, रूस की जरूरतों वाली 20 वस्तुओं का निर्यात आसानी से बढ़ा सकता है। भारत जिन चीजों का निर्यात बढ़ा सकता है, उनमें समुद्री उत्पाद, कपड़े और परिधान, जूते, मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी अन्य वस्तुएं आदि शामिल हैं। वर्तमान में भारत से रूस को होने वाला निर्यात बहुत ही कम यानी 3 बिलियन डॉलर का है। जबकि इसकी तुलना में अमेरिका को 68 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निर्यात करता है। यह ज्यादा हो सकता है, लेकिन लॉजिस्टिक लागत, स्वच्छता संबंधी नियम, भाषा संबंधी बाधा और रूस की सरकारी कंपनियों में इसके कम आवंटन की वजह से नहीं हो पाता है। अप्रैल, 2021 से पहले 11 महीने में रूस के साथ भारत का कुल द्विपक्षीय व्यापार 11.8 डॉलर का रहा है। यह पिछले पूरे साल के 8.1 बिलियन डॉलर से ज्यादा है।

भारत के लिए राष्ट्रहित सबसे अहम
जब भी बड़ी वैश्विक शक्तियों के बीच तनाव की स्थिति पैदा होती है, तटस्थ भूमिका निभाने की भारत की परंपरा सी रही है। इस समय भारत ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के साथ क्वाड सुरक्षा गठबंधन में भी शामिल है और ये सारे रूस के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है, लेकिन भारत अपनी नीति खुद तय कर रहा है और किसी भी चीज से ज्यादा राष्ट्रहित को अहमियत दे रहा है।












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