अंतरिक्ष सेक्टर में भारत-अमेरिका के बीच ऐतिहासिक समझौता, ‘सैटेलाइट प्रोटेक्शन पैक्ट’ से टेंशन में चीन
भारत के साथ समझौते पर दस्तखत करने के बाद अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा कि, दोनों देशों के बीच आज महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं हैं जो अंतरिक्ष और साइबर स्पेस सहित उभरते रक्षा क्षेत्रों में सहयोग...
वॉशिंगटन, अप्रैल 12: यूक्रेन युद्ध के बीच में जब लग रहा था, कि भारत को लेकर अमेरिका काफी ज्यादा नाराज है, उस वक्त भारत और अमेरिका के बीच वॉशिंगटन में जो समझौते हुए हैं, उसे देखकर यही लगता है, कि असल में भारत और अमेरिका के संबंधों पर यूक्रेन युद्ध का सिर्फ एक 'छींटे' का प्रभाव पड़ा है। भारत और अमेरिका के लिए सोमवार का दिन काफी ऐतिहासिक रहा, क्योंकि एक तरफ भारतीय पीएम नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच वर्चुअल बैठक हुई, तो दूसरी तरफ भारत और अमेरिका के बीच 2+2 डॉयलॉग भी हुआ है। जिसमें दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक 'सैटेलाइट प्रोटेक्शन पैक्ट' पर समझौता किया गया है। इस समझौते का पूरा नाम 'स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस अरेंजमेंट' है।

‘सैटेलाइट प्रोटेक्शन पैक्ट’ पर समझौता
अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा कि, भारत और अमेरिका के बीच 'सैटेलाइट प्रोटेक्शन पैक्ट' पर समझौता किया गया है। दोनों देशों ने इस समझौते पर दस्तखत कर दिए हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री के मुताबिक, ये समझौते से दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों में एक नया आयाम जुड़ गया है। इस समझौते पर सोमवार को दोनों देशों के अधिकारियों ने भारत-अमेरिका 2+2 मंत्रिस्तरीय बैठक से इतर हस्ताक्षर किए हैं, जिसकी सह-मेजबानी अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन ने की थी। भारत की तरफ से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक में हिस्सा लिया था।

भारत की सुरक्षा के लिए अहम समझौता
भारत के संदर्भ में देखें, तो ये एक ऐतिहासिक समझौता है और इस समझौते के बाद भारत की सुरक्षा में एक तरह से मानिए, तो नई आंख लग गई है और इस समझौते के बाद भारत को अमेरिकी सैटेलाइट से डायरेक्ट जानकारियां मिलेंगीं, कि भारत के दुश्मन सरहदी इलाकों में क्या कर रहे हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि, इस समझौते से और ज्यादा जानकारियां साझा करने और आपसी सहयोग का समर्थन करेगा। इसके साथ ही अमेरिका ने कहा कि, हम भारत के साथ साइबर स्पेस को लेकर भी आपसी सहयोग को बढ़ा रहे हैं, जिसके तहत हम इस साल के अंत में ट्रेनिंग और एक्सरसाइज करेंगे। इसके साथ ही अमेरिका ने काफी महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि, हम भारत के साथ 'इनफॉर्मेशन शेयरिंग पार्टनरशिप को युद्ध को हर डोमेन में ध्यान में रखकर साझा करेंगे'। अमेरिका की तरफ से भारत के साथ किया गया ये समझौता इसलिए काफी ज्यादा अहम है, क्योंकि चीन के सामने हमारी साइबर टेक्नोलॉजी काफी कमजोर है।

भारतीय अंतरिक्ष सेक्टर को मदद
भारत के साथ समझौते पर दस्तखत करने के बाद अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा कि, दोनों देशों के बीच आज महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं हैं जो अंतरिक्ष और साइबर स्पेस सहित उभरते रक्षा क्षेत्रों में टेक्नोलॉजिकल मदद और सहयोग को बढ़ावा देंगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि, "उदाहरण के लिए, हम इस साल के अंत में अपने अंतरिक्ष कमान और भारत की रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी के बीच नए रक्षा अंतरिक्ष आदान-प्रदान शुरू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं'। उन्होंने कहा कि, बाइडेन प्रशासन भारत की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका और समर्थन देने के लिए कई प्राथमिकताओं पर भारत के साथ मिलकर काम कर रहा है। वहीं, अमेरिका ने भारत के साथ रक्षा, व्यापार और टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी मदद में वृद्धि की है।

क्या है ‘सैटेलाइट प्रोटेक्शन पैक्ट’?
भारत के लिए अमेरिका के साथ 'सैटेलाइट प्रोटेक्शन पैक्ट' समझौता करना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है और भारत के रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, डील भारत के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा, इसका अंदाजा भी लगाना मुश्किल है। दरअसल, इस समझौते का सबसे प्रमुख उद्येश्य है, कि दोनों देशों के जो सैटेलाइट अंतरिक्ष में हैं, वो पूरी तरह से सुरक्षित रहे। अंतरिक्ष सेक्टर में अमेरिका, चीन और रूस, दुनिया के बाकी सभी देशों से काफी ज्यादा आगे है और चीन की सरकारी मीडिया इस बात को मान चुका है, कि अगर बात अंतरिक्ष की हो, तो अमेरिका के आगे कोई भी देश नहीं ठहरता है। और भारत ने अंतरिक्ष सेक्टर में अभी तक रूस के साथ कोई करार नहीं किया है, लिहाजा, भारत के लिए अमेरिका के साथ समझौता करना काफी आसान था और भारत की सामरिक रणनिति के लिहाद से ये समझौता काफी बड़ा समझौता है।

‘सैटेलाइट प्रोटेक्शन पैक्ट’ से भारत को फायदे?
बात अगर अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स की करें, तो इस वक्त अंतरिक्ष में अमेरिका के 4318 ऑपरेशनल सैटेलाइट हैं, तो चीन के 519 ऑपरेशनल सैटेलाइट अंतरिक्ष में हैं, जबकि भारत के सिर्फ 104 ऑपरेशनल सैटेलाइट ही हैं। लिहाजा, भारत अपने प्रमुख प्रतिद्वंदी चीन से कितना पीछे है, आसानी से समझा जा सकता है। इस के साथ ही भारत के लिए बड़ी चुनौती ये है, कि अंतरिक्ष में भारत के जितने सैटेलाइट हैं, वो सुरक्षित रहे। अंतरिक्ष में सैटेलाइट की सुरक्षा को खतरा अंतरिक्ष में पड़े मलबे के साथ साथ दश्मन देशों से भी होता है और अमेरिका लगातार अपने सैटेलाइट्स की हर एक मूवमेंट की निगरानी करता है और अब इस समझौते के तहत भारत को भी अमेरिकी टेक्नोलॉजी की मदद से अपने सैटेलाइट्स की लगातार निगरानी की सुविधा मिल जाएगी। वहीं, भारत अमेरिका के सर्विलांस सैटेलाइट का इस्तेमाल अपने बॉर्डर की रक्षा तो कर ही सकता है, इसके साथ ही आने वाले वक्त में जब बांग्लादेश, नेपाल अपना अंतरिक्ष प्रोग्राम शुरू करेंगे, तो भारत इस सुविधा के जरिए उन्हें मदद देकर अपनी स्थानीय ताकत और डिप्लोमेसी को आगे बढ़ा सकता है।

चीन को क्यों है भारी चिंता?
इंडो-पैसिफिक में चीन को रोकने के लिए इस समझौते के तहत अंतरिक्ष में अमेरिकी सैटेलाइट क्या कर रहे हैं, भारत उसकी सीधी जानकारी ले सकता है और अमेरिका की तरफ से ये भी कहा गया है, कि "भारत इस समझौते के तबक प्रमुख अमेरिकी रक्षा प्लेटफॉर्म से सैन्य जानकारियां हासिल कर सकता है और यह हमारे रक्षा औद्योगिक ठिकानों के बीच महत्वपूर्ण नए संबंध बना रहा है।' अमेरिका ने कहा कि, 'हम यह सब इसलिए कर रहे हैं क्योंकि अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका भारत को रक्षा उद्योग का एक लीडर मानता है और भारत की सुरक्षा की दृष्टि से अहम मानता है। भारत और अमेरिका के बीच हुए इस समझौते से चीन को सबसे बड़ी चिंता ये है, कि अचानक भारत को अमेरिका की सभी 4 हजार से ज्यादा सैटेलाइट्स की एक्सेस मिल गई है और अब भारत सरहद पर चीन की सेना की हर एक हरकत को सीधा देख सकता है, लिहाजा, इस पैक्ट ने चीन को बुरी तरह परेशान कर दिया है।
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