SCO Summit 2023: एससीओ शिखर सम्मेलन में आज चीन कर सकता है कुछ बड़ा ऐलान, PM मोदी करेंगे अध्यक्षता
SCO Summit 2023: नई दिल्ली में भारत आज शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जिसे भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी होस्ट करेंगे। आज होने वाले इस वर्चुअल शिखर सम्मेलन में एससीओ के तमाम सदस्य राष्ट्र भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हो रहे हैं।
आपको बता दें, कि एससीओ एक प्रभावशाली आर्थिक और सुरक्षा ब्लॉक है, और सबसे बड़े अंतर-क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठनों में से एक के रूप में बनकर ये उभरा है। एससीओ की स्थापना 2001 में शंघाई में एक शिखर सम्मेलन में रूस, चीन, किर्गिज़ गणराज्य, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपतियों ने की थी और साल 2017 में इसमें भारत और पाकिस्तान शामिल हुआ था।

कौन कौन हो रहा शिखर सम्मलेन में शामिल
भारत, जिसने पिछले साल 16 सितंबर को उज्बेकिस्तान के समरकंद शिखर सम्मेलन में एससीओ की रोटेशन पॉलिसी के तहत एससीओ की अध्यक्षता ग्रहण की थी, वो आज एससीओ शिखर सम्मेलन के वर्चुअल शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। हालांकि, पहले ये शिखर सम्मेलन व्यक्तिगत तौर पर होने वाला था, लेकिन पिछले महीने ही भारत सरकार ने इसे वर्चुअल करवाने का फैसला लिया।
शिखर सम्मेलन आज दोपहर 12.30 बजे के आसपास शुरू होगा और लगभग 3 बजे खत्म होगा।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, इस शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और एससीओ देशों के अन्य नेताओं की मेजबानी करेंगे। पिछले हफ्ते एक भाड़े के समूह वैगनर ने मास्को में सत्ता परिवर्तन की नाकाम कोशिश की थी और उसके बाद ये पहला मौका है, जब राष्ट्रपति पुतिन किसी बहुपक्षीय शिखर सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं।
ये शिखर सम्मेलन भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख सीमा पर तीन साल से ज्यादा समय से चले आ रहे गतिरोध की पृष्ठभूमि में और प्रधानमंत्री मोदी की पिछले महीने अमेरिका की हाई-प्रोफाइल यात्रा के ठीक दो हफ्ते बाद हो रहा है।
बिजनेस टुडे के अनुसार, तुर्कमेनिस्तान को भारत ने अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया गया है। शिखर सम्मेलन में छह अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों के प्रमुखों को भी आमंत्रित किया गया है।
जिन संगठनों को आमंत्रित किया गया है, वो हैं, संयुक्त राष्ट्र, आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई देशों का संघ), सीआईएस (स्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रमंडल), सीएसटीओ (सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन), ईएईयू (यूरेशियन आर्थिक संघ) और सीआईसीए (एशिया में बातचीत और विश्वास निर्माण उपायों पर सम्मेलन)।
इसके अलावा, दो एससीओ निकायों - सचिवालय और एससीओ आरएटीएस (क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना) के प्रमुख भी मंगलवार के आभासी शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे, जिसका थीम है, SECURE SCO।
SECURE का संक्षिप्त नाम प्रधानमंत्री मोदी ने 2018 में हुए SCO शिखर सम्मेलन के दौरान अपने भाषण में गढ़ा था और इसका मतलब है, S- से सुरक्षा, E से आर्थिक विकास, C से कनेक्टिविटी, U से एकता, R से संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए सम्मान, E से पर्यावरण संरक्षण।
एससीओ शिखर सम्मेलन-2023 से क्या हैं उम्मीदें
बिजनेस टुडे के अनुसार, शी जिनपिंग आज की बैठक में 'महत्वपूर्ण टिप्पणी' करने वाले हैं। आउटलेट ने चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग के हवाले से कहा है, कि "एक संस्थापक सदस्य के रूप में, चीन एससीओ को अपने विदेशी मामलों में प्राथमिकता के रूप में देखता है। हम वैश्विक विकास पहल, वैश्विक सुरक्षा पहल और वैश्विक सभ्यता पहल पर कार्य करने, साझा भविष्य के साथ और भी करीबी एससीओ समुदाय का निर्माण करने और यूरेशियन महाद्वीप के लिए एक उज्जवल भविष्य की शुरुआत करने के लिए अन्य सदस्यों के साथ काम करने के लिए तैयार हैं।"
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा, कि "सीएचएस में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की भागीदारी यह दर्शाती है, कि पाकिस्तान एससीओ को क्षेत्रीय सुरक्षा और समृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण मंच और क्षेत्र के साथ बढ़े हुए जुड़ाव के रूप में कितना महत्व देता है।"
लेकिन, सभी की निगाहें व्लादिमीर पुतिन की तरफ होंगी।
एससीओ का मंच, मॉस्को के लिए पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है, जो यह दिखाने के लिए उत्सुक है, कि पश्चिम उसे अलग-थलग करने में नाकाम रहा है।
विल्सन सेंटर के साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के निदेशक माइकल कुगेलमैन ने कहा, कि "यह एससीओ बैठक वास्तव में विश्व स्तर पर उन कुछ अवसरों में से एक है, जिसमें पुतिन को ताकत और विश्वसनीयता का प्रदर्शन करना होगा।"
एससीओ के किसी भी सदस्य देश ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों में रूस की अभी तक निंदा नहीं की है, बल्कि एससीओ के देशों ने यूएन में वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रहने का विकल्प चुना है। चीन ने रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्थता के लिए एक दूत भेजा है, और भारत ने बार-बार संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया है।
राष्ट्रपति पुतिन के लिए व्यक्तिगत रूप से, शिखर सम्मेलन यह दिखाने का मौका तैयार करता है, कि वैगनर ग्रुप के विद्रोह के बाद भी वो रूस में कमजोर नहीं हुए हैं।
ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के एक वरिष्ठ साथी तन्वी मदान ने कहा, कि "पुतिन अपने सहयोगियों को आश्वस्त करना चाहेंगे, कि वह अभी भी रूस के प्रभारी हैं, और इसमें कोई संदेह नहीं है कि उनकी सरकार ने चुनौतियों को कुचल दिया है।" लिहाजा, इस सम्मेलन के जरिए पुतिन पश्चिम को ये संदेश दे सकते हैं, कि एशिया का दरवाजा उनके लिए पहले के मुकाबले अब पूरी तरह से खुल गया है।












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