Superbug Crisis: भारत में सुपरबग से 10 लाख लोगों की मौतें, लैसेंट रिपोर्ट में सनसनीखेज दावा, क्या है वजह?
Bacterial Antimicrobial Resistance: ग्लोबल रिसर्च ऑन एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (GRAM) प्रोजेक्ट के मुताबिक, साल 2019 में भारत में 3 से 10.4 लाख लोगों की मौत बैक्टीरियल एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के कारण हुई है।
यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें रोगजनक बैक्टीरिया के आगे एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर हो जाती हैं। AMR को लेकर किए गये रिसर्च में पता चला है, कि साल 2050 तक पूरी दुनिया में 4 करोड़ लोगों की मौत हो सकती है। यह रिसर्च प्रोजेक्ट, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और वाशिंगटन विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य मीट्रिक्स और मूल्यांकन संस्थान (IHME) के बीच एक साझेदारी के तहत की गई है।

दुनियाभर में 4 करोड़ लोगों की मौत की आशंका
मंगलवार को द लांसेट में प्रकाशित निष्कर्षों में यह भी कहा गया है, कि अनुमान है कि 2050 तक दुनिया भर में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एंटीबायोटिक प्रतिरोधी संक्रमणों की वजह से 39 करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हो जाएगी।
लैंसेट की रिपोर्ट में कहा गया है, कि भारत में 29.9 लाख लोगों की मृत्यु या तो सीधे तौर पर या सेप्सिस से उत्पन्न स्थितियों के कारण हुई है। सेप्सिस एक रक्त विषाक्तता है, जिसमें शरीर किसी संक्रमण की अवस्था में काफी तेजी से प्रतिक्रिया करता है और फिर दवाएं बेअसर हो जाती हैं। स्टडी में एएमआर को व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल कहा जाता है।
ये स्टडी रिसर्च भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस रिसर्च एंड सर्विलांस नेटवर्क (IAMRSN) की तरफ से पिछले हफ्ते जारी की गई वार्षिक रिपोर्ट के बाद आए हैं, जिसमें 2017 से 2023 तक देश के 21 प्रमुख अस्पतालों में सुपरबग्स की खतरनाक मौजूदगी का खुलासा किया गया है, जो कई एंटीबायोटिक दवाओं के लिए प्रतिरोधी और इलाज के लिए बेहद मुश्किल रोगजनक बग है।
अस्पतालों में पाए गये खतरनाक सुपरबग
दिल्ली में AllMS और सर गंगा राम अस्पताल, चंडीगढ़ में पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) और चेन्नई में अपोलो हॉस्पिटल्स सहित अन्य अस्पतालों के आउट पेशेंट डिपार्टमेंट (OPD), वार्ड और गहन देखभाल इकाइयों (ICU) से 2017 और 2023 के बीच एकत्र किए गए मरीज के नमूनों- रक्त, मूत्र और अन्य तरल पदार्थों में सुपरबग पाए गए हैं।
लैंसेट की रिपोर्ट में कहा गया है, कि 2019 में सेप्सिस से होने वाली लगभग 60 प्रतिशत मौतें जीवाणु संक्रमण के कारण हुईं, जबकि बाकी 40 प्रतिशत वायरस, कवक और परजीवियों के कारण हुईं हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है,कि 2019 में देश में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में 3,25,091 मौतें जीवाणु संक्रमण के कारण हुईं। भारतीय बच्चों के लिए सबसे घातक बैक्टीरिया स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया पाया गया, जिसकी वजह से 2019 में 58,212 मौतें हुईं।
रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया है, कि भारत में, जीवाणु AMR मौतें छह प्रमुख सुपरबग्स- एस्चेरिचिया कोली, क्लेबसिएला न्यूमोनिया, स्टैफिलोकोकस ऑरियस, एसिनेटोबैक्टर बाउमानी, माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस और स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया से जुड़ी हैं या उनकी वजह से हैं।
IHME के मुताबिक, 2019 में भारत में 6,86,908 मौतें इन सुपरबग्स से जुड़ी (अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी) थीं, और उसी वर्ष 2,14,461 मौतें इनसे सीधे जुड़ी थीं।












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