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भारत और अमेरिका के बीच फिर हुआ झगड़ा! बाइडेन प्रशासन के इस आदेश से भड़की मोदी सरकार

अमेरिकी कॉन्सुलेट से मिली इस चिट्ठी को मुंबई पोर्ट अथॉरिटी ने, जो शिपिंग और वाटरवेज मंत्रालय के अंदर आता है, उसने शिपिंग महानिदेशालय को इस पत्र के बाबत जानकारी दी और उनसे 'आगे क्या करना है?' इसको लेकर निर्देश मांगे।

नई दिल्ली/वॉशिंगटन, जुलाई 12: अमेरिका का बाइडेन प्रशासन बार बार भारत से झगड़ा करने के मूड में है, अगर ये कहा जाए, तो ये अतिश्योक्ति नहीं होगी। क्योंकि, बाइडेन प्रशासन ने इस बार जो कदम उठाया है, वो सीधे-सीधे भारत के अपने कामकाज में दखलअंदाजी है। दरअसल, अमेरिका की बाइडेन प्रशासन ने इस बार मुंबई पोर्ट अथॉरिटी को डायरेक्ट चिट्ठी लिखी है और आदेश नुमा लहजे में कहा है कि, कि वो अपने बंदरगाह पर रूसी जहाजों को नहीं आने दे। जिसके बाद मोदी सरकार भड़क गई है।

क्या है पूरा मामला?

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यूक्रेन संकट के बाद भारत ने रूस से तेल आपूर्ति बढ़ा दी है, जिसको लेकर बाइडेन प्रशासन भड़का हुआ है और बार बार कोशिश में लगा है, कि किसी भी तरह भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर दे और इसी कोशिश के तहत मुंबई स्थिति अमेरिका के कान्सुलेट जनरल ने सीधे तौर पर मुंबई पोर्ट अथॉरिटी को एक पत्र लिख दिया, जिसमें कहा गया था कि 'मुंबई पोर्ट अथॉरिटी, रूसी जहाजों को अपने बंदरगाह पर आने की इजाजत नहीं दे'। रिपोर्ट के मुताबिक, ये चिट्ठी करीब 8 से 10 दिन पहले लिखी गई है और एक तरह से अमेरिक ने मुंबई बंदरगाह अथॉरिटी को रूसी जहाजों को अपने बंदरगाह पर नहीं आने का आदेश ही दे दिया। जिसको लेकर भारत ने अब कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। यूक्रेन युद्ध के बीच, अमेरिका और उसके सहयोगियों ने रूस के खिलाफ सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन, भारत ने रूस के साथ अपना व्यापार जारी रखा है, जिसकी वजह से रूसी जहाज कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं को लेकर मुंबई बंदरगाह पर आ रही है और अमेरिका ने इसे ही रोकने के लिए कहा है।

बंदरगाह प्रशासन ने चिट्ठी ऊपर भेजी

बंदरगाह प्रशासन ने चिट्ठी ऊपर भेजी

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कॉन्सुलेट से मिली इस चिट्ठी को मुंबई पोर्ट अथॉरिटी ने, जो शिपिंग और वाटरवेज मंत्रालय के अंदर आता है, उसने शिपिंग महानिदेशालय को इस पत्र के बाबत जानकारी दी और उनसे 'आगे क्या करना है?' इसको लेकर निर्देश मांगे। द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई पोर्ट अथॉरिटी के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि, "हम किसी भी जहाज/कार्गो पोत को अनुमति देने से तब तक इनकार नहीं कर सकते, जब तक कि हमें शिपिंग महानिदेशालय या तटरक्षक बल जैसी एजेंसियों से निर्देश नहीं मिलते।" अधिकारी ने कहा कि, "नियामक प्राधिकरण होने के नाते, डीजीएस को निर्णय लेना होगा।" वहीं, डीजीएस ने विदेश मंत्रालय (एमईए) के पाले में गेंद फेंक दी। शिपिंग के महानिदेशक अमिताभ कुमार ने दिप्रिंट को बताया कि, "हमने अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास के पत्र को विदेश मंत्रालय को भेज दिया है और उनसे निर्देश मांगा है।" कुमार ने कहा कि, अभी तक किसी विशेष देश के जहाजों को भारतीय बंदरगाहों में प्रवेश करने से मना करने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा, "अगर वे सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हैं और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का उल्लंघन नहीं करते हैं, तो वे जहाज व्यापार के लिए स्वतंत्र हैं।"

भारत ने कड़ा एतराज जताया

भारत ने कड़ा एतराज जताया

वहीं, अब इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास (मुंबई) के चिट्ठी पर गहरी आपत्ति जताई है, कि रूसी जहाजों को मुंबई बंदरगाह पर अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और कहा है कि राष्ट्रीय हितों पर वैश्विक भागीदारों से निपटने के लिए यह नई दिल्ली का संप्रभु अधिकार है। सूत्रों ने ईटी को बताया कि, राष्ट्रीय हितों में देशों के साथ जुड़ना भारत का संप्रभु निर्णय है। जिसके बाद, अमेरिका की तरफ से कहा गया कि, भारत के साथ ये बातचीत निजी थी। लेकिन यहां सूत्रों ने बताया कि, इस तरह की कूटनीतिक बातचीत निजी नहीं होती है। राजनयिक समुदाय के सदस्यों ने ईटी को बताया कि, अमेरिकी वाणिज्य दूतावास का यह कदम गैर-जरूरी था।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

वहीं, अमेरिका के इस कदम पर आपत्ति जताते हुए रैंड कॉर्पोरेशन के डेरेक जे ग्रॉसमैन, जो भारत और अमेरिका के संबंधों पर गहरी नजर रखते हैं, उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि, "लगता है कि बाइडेन प्रशासन ने भारत पर दबाव डालते हुए रणनीति बदल दी है। नई दिल्ली से सीधे बात करने के बजाय, मुंबई में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास ने रूसी जहाजों को प्रतिबंधित करने के लिए मुंबई पोर्ट अथॉरिटी को एक पत्र लिखा। बेशक, नई दिल्ली को पता चला। अमेरिका का मूर्खतापूर्ण कदम।'' आपको बता दें कि, भारत अपनी तेल की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए न केवल रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है, बल्कि भारत ने साफ कर दिया है, कि उसकी विदेशी नीति स्वतंत्र है और वो ईरान वाली 'गलती' नहीं दोहराएगा। इससे पहले खबर ये आई थी कि, रूस ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को चालू करने के अलावा भारत को महत्वपूर्ण कच्चे माल की आपूर्ति के लिए चार्टर्ड वेसल लॉन्च किया है। और मंगलवार को भारत ने राष्ट्रीय मुद्राओं में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की घोषणा की जिससे रुपया-रूबल व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

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