भारत ने UN में पाकिस्तान को लताड़ा, कहा- आतंकवाद पर अपना माइंडसेट बदलें
न्यूयॉर्क। भारत ने आतंकवाद को लेकर एक बार फिर पाकिस्तान को लताड़ लगाई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद पर अपने 'माइंडसेट' बदलने की जरूरत है। भारत ने यूएन से आतंकवाद के लिए पनाहगाह बने मुल्क और क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म पर फोकस करने के लिए आग्रह किया है। भारत के मुताबिक, आतंकवाद को लेकर मानसिकता में बदलाव नहीं आएगा, तब तक अफगानिस्तान में शांति संभव नहीं है। हाल ही में आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर अमेरिका ने लगातार दबाव बनाने की कोशिश की है।

आतंकवाद से अफगानिस्तान में इकनॉमिक ग्रोथ रेट में आयी कमी
यूएन में भारतीय राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने स्पेशल मिनिस्ट्रियल मिटिंग के दौरान कहा कि आतंकवाद और बाहरी तत्व अफगानिस्तान में शांति, स्थिरता और खुशहाली के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। अकबरुद्दीन ने वर्ल्ड बैंक के डाटा का जिक्र करते हुए कहा कि 2003 से 2014 तक अफगानिस्तान की इकनॉमिक ग्रोथ रेट 9.6 प्रतिशत थी, लेकिन पिछले तीन सालों में आतंकवाद के बढ़ने से 2016 में गिरकर 2.2 प्रतिशत पर आ गई, वहीं 2017 में 2.6 प्रतिशत रही।

अफगानिस्तान में शांति के लिए सिर्फ आवाज उठाना ही काफी नहीं
अफगानिस्तान ने पाकिस्तान का बगैर नाम लिए हमला बोलते हुए कहा कि अफगानिस्तान में शांति के लिए सिर्फ आवाज उठाना ही काफी नहीं है। उन्होंने कहा, हमें आतंकवाद को सुरक्षित पनाह देने वाले और क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म को रोकने के लिए सख्त कदम उठाना होगा। अकबरुद्दीन ने कहा कि अगर हम इसमें कामयाब हुए तो पीड़ित अफगानिस्तान को बदल सकते हैं।

गुड टेररिज्म और बैड टेररिज्म जैसी मानसिकता शांति के लिए खतरा
अकबरुद्दीन ने कहा, 'आतंकवाद के लिए प्रयोग में लायी गई 'गुड टेररिज्म और बैड टेररिज्म' जैसी मानसिकता शांति कभी नहीं ला सकती'। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का माइंडसेट को बदलने की जरूरत है, जो हमारे लोगों और युवाओ के भविष्य निर्माण लिए बिल्कुल भी सही नहीं है। इस हाई-लेवल मीटिंग में कजाकिस्तान और रूस के विदेश मंत्री भी मौजूद थे।

भारत का विजन अफगानिस्तान में शांति
सैयद अकबरुद्दीन ने सुरक्षा परिषद को कहा कि भारत का विजन है कि अफगानिस्तान को फिर से अपनी स्थान मिलें और नई दिल्ली व उनके स्थानीय और इंटरनेशनल पार्टनर्स के साथ अफगानिस्तान में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और खुशहाली के लिए काम करे सके। अकबरुद्दीन ने यूएन को याद दिलाया कि पाकिस्तानी पीएम से लाहौर में मुलाकात करने के एक सप्ताह बाद ही आतंकियों ने पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला कर दिया, जो इनकी माइंडसेट को दिखाता है कि वे किस तरह से काम करे रहे हैं।












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