विदेशी धरती पर भारत को मिला एक और बंदरगाह पर अधिकार, चाबहार के बाद चीन के दोस्त से हुई बड़ी डील
India gets Myanmar Sittwe Port Right: ईरान के बाद भारत को विदेश धरती पर एक और बंदरगाह ऑपरेट करने का अधिकार हासिल हो गया है और ये देश, चीन का दोस्त रहा है। भारत ने ईरान में चाबहार बंदरगाह के बाद म्यांमार के सिटवे (Sittwe Port) में अपना दूसरा विदेशी बंदरगाह संचालित करने का अधिकार सुरक्षित कर लिया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने कालादान नदी पर स्थित पूरे बंदरगाह के संचालन को संभालने के लिए इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल (आईपीजीएल) के एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

म्यांमार में भारत के अधिकार मे आया बंदरगाह
इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) और दीनदयाल पोर्ट ट्रस्ट (तत्कालीन Kandla Port Trust) के बीच एक संयुक्त उद्यम है। इसे विदेशों में बंदरगाहों के विकास के लिए शिपिंग मंत्रालय (MoS) के निर्देशों के अनुसार कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत जनवरी 2015 में बनाया और शामिल किया गया था।
जहाजरानी मंत्रालय ने वर्तमान में आईपीजीएल को ईरान के चाबहार बंदरगाह पर कंटेनर/बहुउद्देश्यीय टर्मिनलों के उपकरण और ऑपरेशन का काम सौंपा है।
सिटवे पोर्ट कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इस परियोजना का लक्ष्य कोलकाता के पूर्वी भारतीय बंदरगाह को समुद्र के रास्ते म्यांमार के सिटवे बंदरगाह से जोड़ना है, और आगे सिटवे बंदरगाह को कलादान नदी जलमार्ग के माध्यम से म्यांमार के पलेतवा से जोड़ना है, और एक सड़क मार्ग के जरिए पलेतवा को मिजोरम के जोरिनपुई से जोड़ना है।

यह लिंक न सिर्फ पूर्वोत्तर राज्यों में माल भेजने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगा, बल्कि कोलकाता से मिजोरम और उससे आगे तक सामान ढोने में होने वाली लागत और दूरी को भी काफी कम कर देगा। इससे सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर निर्भरता भी कम हो जाएगी, जिसे चिकन नेक के नाम से जाना जाता है, जो भूटान और बांग्लादेश के बीच स्थित है।
पिछले साल मई में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और म्यांमार के उपप्रधानमंत्री एडमिरल टिन आंग सान ने संयुक्त रूप से सिटवे बंदरगाह का उद्घाटन किया था और पहले भारतीय मालवाहक जहाज का स्वागत किया था।
म्यांमार और चीन के बीच काफी अच्छे संबंध हैं, खासकर म्यांमार में सैन्य शासन स्थापित होने के बाद म्यांमार में चीन ने काफी घुसपैठ की है। म्यांमार के सैन्य शासन को चीन का आशीर्वाद मिला है और ऐसी रिपोर्ट है, कि म्यांमार अपना एक द्वीप, चीन को सैन्य अड्डा बनाने के लिए भी दे सकता है। जो भारत के लिए खतरा साबित हो सकता है।
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