अमेरिकी प्रतिबंध होंगे बेअसर, भारत-रूस बना रहे व्यापार का ‘रुपया-रूबल’ तंत्र, नहीं झुकेगा भारत
रूस और भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ और भागीदारों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को "बाईपास" करने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं।
नई दिल्ली, अप्रैल 02: अगर साल 1971 में रूस भारत की मदद किए अपने जहाज नहीं भेजता, तो आज भारत की स्थिति कुछ और हो सकती थी और अगर कश्मीर पर रूस एक के बाद एक वीटो का इस्तेमाल नहीं करता, तो कश्मीर पर भारत का पॉजीशन भी कुछ और होता और वो अमेरिका ही है, जिसके बल पर पाकिस्तान ने एक बार नहीं, बल्कि तीन तीन बार भारत पर हमला करने की गुस्ताखी की और वो रूस है, जो हर बार बिना किसी स्वार्थ के भारत की मदद के लिए खड़ा रहा और अब बारी भारत की अहसान चुकाने की है और भारत वही कर रहा है, भले तरीका थोड़ा अलग है। भारत और रूस, अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए व्यापार करने की दिशा में आगे बढ़ गये हैं।

रूस के साथ व्यापार करेगा भारत!
रूस और भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ और भागीदारों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को "बाईपास" करने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शुक्रवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बातचीत के बाद इसकी जानकारी दी। इसके साथ ही रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी मुलाकात की है और रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी को रूसी विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति पुतिन का खास संदेश दिया है। रूसी विदेश मंत्री और पीएम मोदी के मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि, "प्रधानमंत्री मोदी ने हिंसा की जल्द समाप्ति के लिए अपने आह्वान को दोहराया है और शांति प्रयासों में किसी भी तरह से योगदान करने के लिए भारत की तत्परता से अवगत कराया है।"

यूक्रेन युद्ध पर भारत-रूस में चर्चा
रूसी विदेश मंत्री के दौरे को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच यूक्रेन युद्ध के प्रभाव को लेकर भारत की चिंताओं से अवगत कराया, जिसमें टेक्नोलॉजी की आर्थिक स्थिति की स्थिरता को लेकर बात की गई। भारतीय विदेश मंत्रालय नें अपने बयान में कहा कि, 'भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रेखांकित किया है कि, एक विकासशील अर्थव्यवस्था होने के नाते विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक अस्थिरता भारत के लिए विशेष चिंता की बात है और दोनों देशों के लिए यह महत्वपूर्ण है, कि उनके आर्थिक, तकनीकी और लोगों से लोगों के संपर्क स्थिर रहे'।

पश्चिमी देशों का भी भारत दौरा
रूसी विदेश मंत्री ने भारत का दौरा उस वक्त किया है, जब कई पश्चिमी देशों के शीर्ष अधिकारी भारत दौरा समाप्त कर लौटे हैं, जिसमें ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज ट्रस और यूरोपीय संघ के भी कई अधिकारी शामिल थे। इस दौरे दौरान पश्चिमी देशों एक तरह से भारत को डॉलर को दरकिनार कर 'रुपया-रूबल' व्यापार समझौता नहीं करने के लिए भी आगाह किया है। पश्चिमी देशों ने यह भी आशा व्यक्त किया है कि, भारत रूस से तेल खरीदने में और वृद्धि नहीं करेगा, जो पिछले कुछ हफ्तों में पहले ही बढ़ चुका है। लेकिन, भारत की तरफ से साफ कहा गया है, कि यूरोप देश खुद रूस से काफी तेल खरीद रहा है, लिहाजा भारत को ज्ञान देने की जरूरत नहीं है। तेल के मुद्दे पर भारत और ब्रिटेन की विदेश मंत्री की तीखी बहस भी एक कार्यक्रम के दौरान हुई है।

पश्चिमी देशों की चेतावनी
अमेरिका और पश्चिमी देश लगातार भारत के खिलाफ चेतावनी जारी कर रहे हैं और अमेरिका के डिप्टी एनएसए दलीप सिंह ने इसी हफ्ते भारत का दौरा किया है, जिसमें उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में भारत को कहा, कि अगर भारत के एलएसी पर चीन हमला करता है, तो रूस बचाने नहीं आएगा। जिसको लेकर रूस ने पश्चिमी देशों पर भारत को ब्लैकमेल करने की कोशिश के आरोप लगाए हैं। रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि, "मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि कृत्रिम बाधाओं को दूर करने के लिए एक रास्ता खोजा जाएगा, जो पश्चिमी देशों द्वारा अवैध प्रतिबंधों की वजह से उपजे हैं। यह सैन्य और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र से भी संबंधित है। हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि समाधान मिल जाएगा और संबंधित मंत्रालय काम कर रहे हैं" श्री लावरोव ने अपनी द्विपक्षीय वार्ता के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि, रूसी मुद्रा में व्यापार करने के लिए भारत और चीन... दोनों देशों के साथ वो काम कर रहा है और प्रणाली का विकास किया जा रहा है।

रुपया-रूबल पर बातचीत जारी
आपको बता दें कि, इसी हफ्ते रूसी केन्द्रीय बैंक के शीर्ष अधिकारियों ने भारत का दौरा किया था, जहां उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के साथ मुलाकात की थी और 'रुपया-रूबल' व्यापार करने के लिए एक मैकेनिज्म तैयार करने की कोशिश शुरू हो गई है। इस बैठक के दौरान दोनों देशों के अधिकारियों ने इस बात पर प्रमुखता से चर्चा की है, कि किस तरह से पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों को बाइपास करते हुए दोनों देशों के बीच व्यापार तंत्र को मजबूत किया जाए।

चीन करेंसी बनेगा आधार
यानि, जो बातचीत चल रही है, उसके मुताबिक, रूसी बैंक भारतीय रुपये को चीन की करेंसी में ट्रांसफर कर उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं, चीनी बैंक रुपये का उपयोग डॉलर खरीदने के लिए कर सकते हैं, क्योंकि चीन की बैंकों पर कोई प्रतिबंध नहीं है। वहीं, कुछ दूसरे रिपोर्ट्स में सुझाव दिया गया है कि, योजना के मुताबिक, रूस के एसपीएफएस मैसेजिंग सिस्टम के माध्यम से रुपये-रूबल के बीच करेंसी वैल्यू तय कर दोनों देश भुगतान में शामिल हो सकते हैं, जो कि अधिक व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले स्विफ्ट सिस्टम का ही एक विकल्प है, जिसे अब सात रूसी बैंक प्रतिबंधों के बाद इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, सीएनबीसी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि, एक सरल तरीका यह भी अपनाया जा सकता है, जिसमें रूसी बैंक को सिर्फ एक भारतीय बैंक में खाता खोलने की आवश्यकता होगी और एक भारतीय बैंक को रूस में एक खाता खोलना होगा, जिसके माध्यम से रूस को उनके निर्यात के लिए डॉलर या यूरो के बजाय, भारतीय निर्यातकों को स्थानीय मुद्रा में भुगतान करने की सुविधा मिल सकेगी।

पश्चिमी देशों के आगे नहीं झुकेंगे
अपनी सार्वजनिक टिप्पणियों में रूस के विदेश मंत्री लावरोव ने साफ तौर पर कहा कि, रूस, भारत और चीन जैसे देश, पश्चिम के दबाव के आगे नहीं झुकेंगे, और यह कि भारत-रूस साझेदारी किसी भी दबाव के सामने नहीं बदलेगी। उन्होंने कहा कि, "जो लोग इस तरह के दृष्टिकोण को लागू करने की कोशिश करते हैं, वे उन देशों की राष्ट्रीय पहचान को नहीं समझते हैं जिनके साथ वे अल्टीमेटम और ब्लैकमेल का उपयोग करने की धमकी देते रहते हैं।"

भारत पर कितने देशों का दवाब
पिछले एक हफ्ते में भारत पर रूस के साथ 'रुपया-रूबल' व्यापार समझौता नहीं करने और रूस के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करने के लिए भारी दवाब बनाया जा रहा है और पिछले एक हफ्ते में यूरोपीय संघ के विशेष दूत, जर्मनी के एनएसए, अमेरिका के डिप्टी एनएसएस, ब्रिटेन की विदेश मंत्री ने भारत का दौरा किया है और साफ तौर पर भारत को धमकाने की कोशिश की गई है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया के कैबिनेट मंत्रियों ने भी भारत की आलोचना की है। वहीं, पिछले महीने जो बाइडेन ने क्वाड सहयोगियों के बीच भारत की स्थिति को 'अस्थिर' कहा था, वहीं, व्हाइट हाउस ने रूस को लेकर भारत के कदम को 'असंतोषजनक' भी कहा है। बावजूद इसके भारत ने घुटने टेकने से इनकार कर दिए और भारत ने ना सिर्फ रूस से तेल खरीदना बढ़ा दिया है, बल्कि भारत ने कोयले का आयात भी रूस से दोगुना कर दिया है।












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