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तमिलनाडु में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट की क्षमता बढ़ाने पर भारत-रूस में अहम समझौते, विदेश मंत्री जयशंकर की घोषणा

Tamil Nadu's nuclear power plant: भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी पांच दिवसीय मॉस्को यात्रा के दौरान कहा है, कि भारत और रूस ने तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में अतिरिक्त बिजली उत्पादन इकाइयों के निर्माण से संबंधित "कुछ बहुत महत्वपूर्ण" समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह घोषणा द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग पर भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूस के उप प्रधान मंत्री डेनिस मंटुरोव के बीच व्यापक वार्ता के बाद की गई है।

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भारत-रूस में अहम समझौते

भारतीय विदेश मंत्री और रूसी उप-प्रधानमंत्री मंटुरोव ने अपनी द्विपक्षीय बैठक के दौरान परमाणु ऊर्जा और दवाओं, फार्मास्युटिकल पदार्थों और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्रों में कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

जयशंकर ने भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा, कि "आज, मेरी और उप प्रधान मंत्री मंटुरोव की उपस्थिति में, हमने कुडनकुलम परमाणु परियोजना की भविष्य की इकाइयों से संबंधित कुछ बहुत महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।"

भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, कि "मंटुरोव के साथ बैठक में व्यापार, वित्त, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, नागरिक उड्डयन और परमाणु डोमेन में महत्वपूर्ण प्रगति देखी गई।" उन्होंने कहा, "नए अवसरों की खोज पर ज्यादा ध्यान देने की सराहना की गई और विभिन्न आयामों में हमारे सहयोग को ज्यादा संतुलित और मजबूत बनाने पर चर्चा की गई।"

कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजना क्या है?

आपको बता दें, कि वर्तमान में रूस की तकनीकी सहायता से तमिलनाडु में बनाए जा रहे कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र का निर्माण मार्च 2002 में शुरू हुआ था। परमाणु ऊर्जा संयंत्र की पहली बिजली इकाई 1,000 मेगावाट की डिजाइन क्षमता के साथ फरवरी 2016 में काम करना शुरू कर दिया और पूरी क्षमता के साथ साल 2027 तक इसके संचालन शुरू होने की उम्मीद है।

दोनों मंत्रियों ने रूसी सुदूर पूर्व पर सहयोग के कार्यक्रम को भी अंतिम रूप दिया और उम्मीद है कि वे ईएईयू-भारत (यूरेशियन आर्थिक क्षेत्र) एफटीए वार्ताकारों की शीघ्र बैठक आयोजित करेंगे। जयशंकर ने भूमि और समुद्री गलियारों में संयुक्त रूप से कनेक्टिविटी कार्यक्रम आयोजित करने का भी वादा किया।

रूस के साथ संबंधों पर क्या बोले जयशंकर?

मॉस्को में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए, भारतीय विदेश मंत्री ने रक्षा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष से संबंधित कई क्षेत्रों में रूस को "विशेष भागीदार" बताया। उन्होंने कहा, "रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्रों में उन देशों के साथ सहयोग किया जाता है, जिनके साथ आपको उच्च स्तर का भरोसा है।"

भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, कि "अगर कोई आज हमारी अर्थव्यवस्था, प्रभाव और दुनिया पर प्रभाव को देखता है, तो यह 10 साल पहले से बहुत अलग है और 10 साल बाद भी अलग होगा। हम एक दशक पहले 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए हैं। और उम्मीद है, कि बाद में यह तीसरा सबसे बड़ा और उससे भी आगे होगा।"

दोनों देशों के बीच भुगतान की समस्या पर एक प्रश्न का उत्तर देते हुए भारतीय विदेश मंत्री ने यह भी कहा, कि दोनों देशों के अधिकारी अलग-अलग तरीके खोजने की कोशिश कर रहे हैं, जिनमें बैंक एक-दूसरे के साथ डील करते हैं। उन्होंने यह भी कहा, कि रूस के साथ व्यापार करने से दूसरों को अच्छे बैंकों और सुरक्षित मार्गों के बारे में शिक्षित किया जा सकता है।

रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर बुधवार को मॉस्को में अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से मुलाकात करेंगे और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा के साथ-साथ परिवहन, बैंकिंग और वित्तीय श्रृंखला, यूक्रेन और अफगानिस्तान की स्थिति और इजरायल-हमास युद्ध सहित कई मुद्दों पर बातचीत करेंगे।

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