India Russia Deal: क्यों नहीं हुई 5th Generation Fighter Jet SU-57, S-400 और S-500 की डील! अब पता चली वजह
India Russia Deal: 4-5 दिसंबर को नई दिल्ली में हुए 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन कैसा रहा इसके लिए कई पैमाने हैं। जिसमें से कुछ इसे फायदेमंद बता रहे हैं तो कुछ इसे निराशाजनक। इस बार शिखर सम्मेलन ने ज़्यादा फोकस व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, वर्कफ़ोर्स और आर्थिक साझेदारी पर रखा। लेकिन SU-57, S-400 और S-500 की डील पक्की न होने की चर्चा अभी भी ज्यादा है। इसके कारण जानने की कोशिश करेंगे।
किन चीजों पर रहा फोकस?
कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बार सरकार ने डिफेंस, स्पेस और एविएशन में गहरे सहयोग की नींव रखने पर जोर दिया, न कि बड़े सौदों पर। वजह साफ है-अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत डॉलर में रूस से डील नहीं कर सकता। और भारत के पास S-400 की बाकी रेजिमेंट, 2-3 Su-57 स्क्वाड्रन या SMR (Small Modular Reactors) खरीदने के लिए पर्याप्त रूबल भी नहीं।

भारत चाहता है रुपये में भुगतान करना!
भारत रुपये में पेमेंट करना चाहता है, लेकिन रूस के लिए भारतीय सामान और सेवाओं की मांग अभी कम है। जब तक भारत रूस को अधिक सामान, टेक और सर्विसेज एक्सपोर्ट नहीं करेगा, तब तक रक्षा जैसे बड़े सौदे आगे नहीं बढ़ सकते। शायद इसी वजह से अभी S-400 या Su-57 का कोई नया कॉन्ट्रैक्ट नहीं हुआ।
भारत से रूस को ज़्यादा एक्सपोर्ट बढ़ाना
पर्दे के पीछे भारत ने शिखर सम्मेलन ने भारतीय निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया, जैसे-
• खाद्य उत्पाद
• भारतीय श्रम/वर्कफ़ोर्स
• हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग
इसके साथ दो बड़े, पर कम रिपोर्टेड रणनीतिक MoUs साइन हुए-जहाज निर्माण और आर्कटिक नेविगेशन ट्रेनिंग।
भारत-रूस का नया स्ट्रेटेजिक गेम: आइस क्लास जहाज
दोनों देशों ने एक नया फ्रेमवर्क तैयार किया जिसमें शामिल है:
• ज्वॉइंट शिप डिज़ाइन
• टेक ट्रांसफ़र
• लोकल मैन्युफैक्चरिंग
• मैरीटाइम इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
साथ ही, भारतीय नाविकों को आर्कटिक नेविगेशन ट्रेनिंग देने का समझौता हुआ।
आइस-क्लास जहाज क्या होते हैं? डिफरेंस समझें
• ये ऐसे पोत होते हैं जिनके हल (Hull) बेहद मजबूत होते हैं
• तैरती/टूटी समुद्री बर्फ में सुरक्षित नेविगेशन के लिए डिज़ाइन
• ये आइसब्रेकर नहीं होते
• आइसब्रेकर बर्फ को तोड़ते हैं और खास तौर पर पावरफुल होते हैं, कई बार न्यूक्लियर-पावर्ड
भारत कैसे बनेगा आइस-क्लास जहाजों का बड़ा एक्सपोर्टर?
इन समझौतों के बाद भारत अब NSR (Northern Sea Route) के लिए आइस-क्लास जहाज बना और निर्यात कर सकेगा। साथ ही ट्रेन किया हुआ भारतीय क्रू भी दे सकेगा।
• अभी NSR का वार्षिक कार्गो: 35-40 मिलियन टन
• पुतिन का लक्ष्य 2031 तक: 200 मिलियन टन
दुनिया में अभी इतने जहाज उपलब्ध ही नहीं हैं। यानी भारत के पास एक बड़ा नया मार्केट खुल रहा है।
लाखों भारतीयों को रूस में काम के मौके
एक और अहम समझौता हुआ-दोनों देशों ने ऐसा फ्रेमवर्क बनाया जिससे भारतीय नागरिक रूस में अस्थायी काम कर सकेंगे। रूस ने मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, ट्रेड और सर्विसेज में लाखों भारतीय वर्कर्स लेने की इच्छा जताई।
अभी रूस में भारतीय बहुत सारे सेक्टर में काम कर रहे हैं:
• निर्माण
• टेक्सटाइल
• मशीनरी
• इलेक्ट्रॉनिक्स
रूस में एक्टिव कई भारतीय कंपनियां
• भारतीय कंपनियां रूस के लिए उपकरण, मशीनरी और स्पेयर पार्ट्स भेज रही हैं
• फार्मा सेक्टर में भारतीय जेनेरिक दवाएं रूस के बाजार में मजबूत पकड़ बना रही हैं
• रूस अफ्रीका में दोबारा निर्यात के लिए भारत के साथ ऊर्जा उपकरणों का को-प्रोडक्शन चाहता है
रूस में भारतीय ब्रांड का जलवा
2024 में भारत-रूस कृषि व्यापार 60% बढ़ा।
• दालें
• रेडी-टू-ईट मील
• मिठाइयां
• स्नैक्स
• मसाले
विशेषज्ञ मानते हैं कि चाय, कॉफी, चावल और कपड़ा रूस में यूरोपियन ब्रांड्स की जगह ले सकते हैं।
समुद्री उत्पादों पर बाधाएं-भारत ने चिंता जताई
भारत ने शिकायत की कि नॉन-टैरिफ बाधाओं के कारण समुद्री उत्पादों का निर्यात रुक रहा है।
उदाहरण- श्रिम्प और प्रॉन्स का निर्यात अभी सिर्फ $123 मिलियन है, जबकि इसे कई गुना बढ़ाया जा सकता है।
भारत-रूस का व्यापार लक्ष्य क्या?
दोनों देश 2030 तक व्यापार को $60 बिलियन → $100 बिलियन ले जाने का लक्ष्य रखते हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि यह टारगेट समय से पहले हासिल हो जाएगा-मुख्यत: भारतीय एक्सपोर्ट के ज़बरदस्त विस्तार की वजह से।
Su-57 और S-400 डील कब होगी?
रूस ने भारत को Su-57 ऑफर किया है-प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और लोकल प्रोडक्शन के साथ। लेकिन बातचीत अभी जारी है। IAF की दिलचस्पी है:
• Su-57D ट्विन-सीट वेरिएंट (2026 से टेस्ट फ्लाइट संभव)
• ब्रह्मोस-NG को अंदर ले जाने की क्षमता
S-400 की बाकी दो रेजिमेंटों की डिलीवरी भी बाकी है-और पेमेंट भी पूरा नहीं हुआ।
जब तक वित्तीय, लॉजिस्टिक और तकनीकी बातचीत पूरी नहीं होती-कोई रक्षा अनुबंध नहीं होगा।
इस बार रक्षा पर नहीं, नींव मजबूत करने पर फोकस
रक्षा सौदे इसलिए शामिल नहीं हुए क्योंकि वे अभी तैयार नहीं थे। इस बार शिखर सम्मेलन का फोकस था-
• आर्थिक आधार मजबूत करना
• व्यापार बढ़ाना
• NSR, आइस-क्लास जहाज, लेबर मोबिलिटी जैसे बड़े स्ट्रेटेजिक सेक्टर खोलना यानी असली गेम आगे है-और तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है।
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