कोविड-19 के खिलाफ भारत ने झोंकी पूरी ताकत, ऑक्सीजन, रेमडेसिविर की किल्लत होगी बहुत जल्द खत्म

भारत में मेडिकल सामानों की सप्लाई फिलहाल 21 देशों से की जा रही है और करीब 21 देश और भारत तक मेडिकल हेल्प पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इस वक्त भारत में जरूरत को देखते हुए मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ा दिया गया है।

नई दिल्ली, मई 09: कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित भारत को दुनिया के 42 देश मदद कर रहे हैं जिनमें से 21 देशों से भारत को लगातार मदद मिल रही है और बाकी के देश भारत तक मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत को इस वक्त सबसे ज्यादा ऑक्सीजन और इमरजेंसी दवाओं की जरूरत है, जो विश्व के अलग अलग देशों से भारत तक पहुंच भी रही है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत तक लगातार लिक्विड ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है, जिससे ऑक्सीजन तैयार किया जा रहा है, इसके साथ की बेहद आवश्यक दवाएं और रेमडेसिविर इंजेक्शन भी भारत में पहुंचाया जा रहा है।

42 देशों से भारत को मदद

42 देशों से भारत को मदद

भारत में मेडिकल सामानों की सप्लाई फिलहाल 21 देशों से की जा रही है और करीब 21 देश और भारत तक मेडिकल हेल्प पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इस वक्त भारत में जरूरत को देखते हुए मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ा दिया गया है। मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन इस वक्त भारत में 5700 मिट्रिक टन से बढ़ाकर 9480 मिट्रिक टन कर दिया गया है, लेकिन इसके बाद भी भारत को विदेशों से मदद की जरूरत पड़ रही है। भारत को अभी तक विदेशों से 20 हजार ऑक्सीजन सिलेंडर, 11 हजार ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स, 30 ऑक्सीजन टैंकर, 75 ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट्स मिल चुके हैं।

ऑक्सीजन के लिए भारत की कोशिश

भारत का विदेश मंत्रालय इस कोशिश में है कि भारत में विदेशी मदद से 50 हजार मिट्रिक टन का ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया जा सके। वहीं, 1172 ऑक्सीजन टैंकर्स लाए जा रहे हैं। एक लाख 2 हजार 400 ऑक्सीजन सिलेंडर भारत ने खरीदे जा चुके हैं, वहीं एक लाख ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स भारत खरीदने की कोशिश कर रहा है। वहीं, कई ऑक्सीजन टैंकर्स प्राइवेट कंपनियों से हुई अनुबंध के आधार पर भारत पहुंचाई जा रही हैं।

एक करोड़ रेमडेसिविर इंजेक्शन

वहीं, भारत लगातार रेमडेसिविर इंजेक्शन का उत्पादन भी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। भारत ने एक महीने में एक करोड़ रेमडेसिविर इंजेक्शन तैयार करने का लक्ष्य रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की कोशिश है कि हर दिन देश में 3 लाख रेमडेसिविर इंजेक्शन तैयार किया जाए। वहीं, अमेरिका की बायोफार्माश्यूटिकल कंपनी गिलिड साइंस ने शनिवार को भारत में डेढ़ लाख रेमडेसिविर वाइल भेजा है और डेढ़ लाख रेमडेसिविर वाइल अभी भारत और आने वाला है। इजिप्ट की कंपनी इवा फार्मा से भी भारत 4 लाख रेमडेसिविर इंजेक्शन मंगा रहा है। वहीं, बांग्लादेश, जर्मनी, उज्बेकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात से भी भारत ने करीब 16 लाख रेमडेसिविर इंजेक्शन मंगाने का फैसला किया है।

टोसिलिजुमैब इंजेक्शन के लिए कोशिश

इसके साथ ही भारत सरकार ने टोसिलिजुमैब इंजेक्शन के लिए भी कई देशों से संपर्क साधा है। स्विटजरलैंड की कंपनी रोक को भारत में टोसिलिजुमैब इंजेक्शन की सप्लाई 60 गुना बढ़ाने के लिए कहा गया है। भारत को अभी तक टोसिलिजुमैब इंजेक्शन का 11000 वाइल्स मिल चुका है, वहीं 21 हजार टोसिलिजुमैब इंजेक्शन भी जल्द ही भारत आने वाली है। इस इंजेक्शन का इस्तेमाल कोविड-19 के शुरूआती समय में डॉक्टर करते हैं। भारत की कोशिश है कि वो विदेशी मदद लेने के साथ साथ दवाओं का उत्पादन भी तेजी से बढ़ाए। इसके साथ ही भारत सरकार ये भी सुनिश्चित कर रही है कि विदेशों से मिली मदद सुरक्षित तरीके से भारत तक पहुंच जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा कोविड-19 पीड़ित मरीजों की जान बचाई जा सके।

भारत का कोविड सेल एक्टिवेटेड

भारत का कोविड सेल एक्टिवेटेड

जैसे ही भारत में कोरोना वायरस के दूसरे लहर ने स्थिति को खराब करना शुरू किया, ठीक वैसे ही भारतीय विदेश विभाग का कोविड सेल एक्टिवेट हो गया। पिछले साल सरकार ने कोविड सेल का गठन किया था, जिसमें 15 से 20 विदेश विभाग के यंग अफसर शामिल हैं। इस कोविड सेल को दम्मू रवि लीड कर रहे हैं, जो भारतीय विदेश विभाग के एडिशनल सेक्रेटरी हैं। नवीन श्रीवास्तव और विनय कुमार भी इस टीम में शामिल हैं, जिनकी जिम्मेदारी कॉर्डिनेशन को पूरी तरह से संभालना है। विदेश मंत्रालय का कोविड सेल लगातार दुनिया के अलग अलग देशों के संपर्क में है और भारत की स्थिति से दुनिया को वाकिफ करवाने के साथ साथ मेडिकल मदद को भारत सुरक्षित लाने की जिम्मेदारी निभा रहा है।

भारत लगातार इस महामारी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है और हमें उम्मीद है कि सामुहिक एकता से हम इस लड़ाई को जरूर जीत लेंगे। हां, जो नुकसान हो चुका है या हो रहा है, उसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती है।

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