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चीन के 'दोस्‍त' पुतिन के सामने भी पीएम मोदी ने किया जिनपिंग के प्रोजेक्‍ट BRI का विरोध

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    नई दिल्ली। चीन ने अपने किंगदाओ शहर में एससीओ (शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन) समिट के दौरान शी जिनपिंग के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट में से एक 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) प्रोजेक्ट के लिए सदस्य देशों का समर्थन चाहा, लेकिन भारत ने इस पर अपना स्टैंड कायम रखते हुए इसे स्वीकार करने से मना कर दिया। समिट में भारत पहला एससीओ का सदस्य था, जिसने चीन के बीआरआई प्रोग्राम का समर्थन नहीं किया। किंगदाओ में 17 पन्नों वाले डिक्लेरेशन में कहा गया कि एक देश को छोड़कर बाकि सभी ने बीआरआई प्रोजेक्ट को स्वीकार किया है। चीन के इस प्रोजेक्ट को रुस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, और तजाकिस्तान का समर्थन मिला है।

    SCO समिट में भारत ने चीन के BRI प्रोजेक्ट को ठुकराया

    चीन के इस प्रोजेक्ट का समर्थन ना करते हुए भारत ने कहा कि हमें इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के नाम पर दूसरों के संप्रभुता का भी सम्मान करना जरूरी है। चीन का बीआरआई प्रोजेक्ट सीपैक (चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कोरिडोर) का हिस्सा है, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से होकर निकलता है। जिसका भारत शुरू से विरोध करता आया है।

    पीएम मोदी ने कहा, 'भारत उन्हीं कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का स्वागत करता है, जो दूसरे राष्ट्रों के संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें।' मोदी ने कहा कि एससीओ और पड़ोसी देशों के साथ कनेक्टिविटी का समर्थन करना भारत की प्राथमिकता में है।

    इससे पहले पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय मुलाकात हुई, जिसमें दोनों देशों ने व्यापार और सीमा विवाद को लेकर एक लंबी चर्चा की। इसके अलावा अफगानिस्तान में शांति के लिए भारत-चीन का ज्वॉइंट प्रोजेक्ट पर भी सहमति बनी। मोदी ने अफगानिस्तान में बढ़ते आतंकवाद को एक दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण बताया।

    चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि एससीओ ने किसी भी रूप के व्यापार संरक्षणवाद का विरोध करते हुए 'खुले, समावेशी, पारदर्शी, गैर-भेदभावपूर्ण और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था' के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया।

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    English summary
    India only SCO member to oppose China’s BRI

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