CPEC में तीसरे देश की एंट्री को लेकर भारत ने दी चेतावनी तो भड़क गया पाकिस्तान, लगाया ये आरोप
इस्लामाबाद, 27 जुलाईः CPEC परियोजना में तीसरे देश को शामिल किए जाने की कोशिशों पर भारत की आपत्ति से पाकिस्तान बुरी तरह भड़क गया है। CPEC पर भारत के बयान को पाकिस्तान ने आधारहीन और भ्रामक बताया है। पाकिस्तान का आरोप है कि भारत इस मसले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले चीन और पाकिस्तान द्वारा CPEC परियोजना में अफगानिस्तान को शामिल किए जाने की कोशिशों पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए चेतावनी दे डाली थी।

विदेश मंत्रालय ने जताई आपत्ति
पाकिस्तान के विदेश विभाग के प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर कहा कि CPEC एक ट्रांसफॉर्मेशनल परियोजना है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता लाना और आपसी सहयोग बढ़ाना है। विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि CPEC में चीन के निवेश से ही पाकिस्तान की ऊर्जा और आधारभूत संरचनाओं से जुड़ी समस्याएं दूर होने में मदद मिलेगी।

'भारत की वजह से नहीं हो रहा द. एशिया का विकास'
विदेश विभाग के प्रवक्ता के बयान में कहा गया कि CPEC को लेकर भारत की हालिया बयान उसकी असुरक्षा की भावना और उसके वर्चस्ववादी एजेंडे को दर्शाता है, जिसकी वजह से कई दशकों से दक्षिण एशिया का सामाजिक आर्थिक विकास बाधित रहा है। CPEC में किसी तीसरे देश की एंट्री की संभावनाओं को खारिज करते हुए पाकिस्तान ने कहा कि हकीकत तो ये है कि भारत ने सात दशकों से जम्मू-कश्मीर पर अवैध कब्जा किया हुआ है।

CPEC का भारत करता रहा है विरोध
भारत लगातार सीपीईसी परियोजना का विरोध करता रहा है। भारत का कहना है कि सीपीईसी परियोजना भारतीय क्षेत्र में है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा जमाया हुआ है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बीते मंगलवार को कहा था कि हमने तथाकथित सीपीईसी परियोजनाओं में तीसरे देशों की प्रस्तावित भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर रिपोर्टें देखी हैं। किसी भी पक्ष द्वारा इस तरह की कोई भी गतिविधि सीधे तौर पर भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे में उसे अवैध मानकर ही भारत व्यवहार करेगा। इस तरह की गतिविधियां स्वाभाविक रूप से अवैध, नाजायज और अस्वीकार्य हैं।

सीपीईसी में तीसरे देश की एंट्री पर विचार
बता दें कि इस बीच ऐसी खबरें सामने सामने आई थीं कि पाकिस्तान और चीन ने अरबों डॉलर की सीपीईसी परियोजना में तीसरे देशों को शामिल होने का न्योता दिया है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समन्वय पर सीपीईसी के संयुक्त कार्य समूह की तीसरी बैठक में 22 जुलाई को उठाया गया। सीपीईसी पर पाकिस्तान व चीन की यह साझा बैठक पिछले सप्ताह वर्चुअल तरीके से हुई थी। सीपीईसी चीन की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दक्षिण पूर्व एशिया के तटीय देशों में चीन के ऐतिहासिक व्यापार मार्गों को नवीनीकृत करना है।

चीन ने परियोजना में खूब किया है निवेश
सीपीईसी 2015 में पाकिस्तान में सड़कों, ऊर्जा परियोजनाओं और औद्योगिक क्षेत्रों का निर्माण करके पाकिस्तान और चीन के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने के इरादे से शुरू किया गया था। यह पाकिस्तान के दक्षिणी ग्वादर बंदरगाह को चीन के पश्चिमी शिनजियांग प्रांत से जोड़ेगा। चीन ने इस योजना में 46 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। इस परियोजना में बलूचिस्तान का अहम हिस्सा है। सीपीईसी परियोजना का एक प्रमुख हिस्सा पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है। पाकिस्तान और चीन अब इस परियोजना को अफगानिस्तान तक बढ़ाने की संभावना पर विचार कर रहे हैं।

अफगानिस्तान को शामिल करने की कोशिश
असल में पाकिस्तान के विदेश सचिव सोहेल महमूद ने अफगानिस्तान में चीन के विशेष दूत यू शियाओओंग से इस संबंध में मुलाकात की थी। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान में राजनीतिक और सुरक्षा की स्थिति, पाकिस्तान और चीन द्वारा अफगानिस्तान को मानवीय मदद और आपसी हित के अन्य मामलों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। बयान में कहा गया था कि क्षेत्रीय संपर्क के संदर्भ में, दोनों पक्षों ने आर्थिक विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए अफगानिस्तान में सीपीईसी के विस्तार पर विचारों का आदान-प्रदान किया।












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