खालिस्तानी आतंकियों के नाक में कनाडा में भी डाली जाएगी नकेल, भारत सरकार ने उठाया बड़ा कदम
भारत की सुरक्षा एजेंसी ने कनाडा सरकार से भारत में प्रतिबंधित खालिस्तान समर्थक सिख फॉर जस्टिस के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
ओटावा, नवंबर 06: भारत से पंजाब को काटने का नापाक मंसूबा पालने वाले खालिस्तान समर्थक आतंकियों पर अब कनाडा में भी नकेल कसा जाएगा और इसके लिए भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पिछले कुछ महीनों में देखा जा रहा है कि, पाकिस्तान से मदद पाकर खालिस्तान समर्थक आतंकवादी फिर से एक्टिव हो रहे हैं और पिछले महीने तो इन्होंने ब्रिटेन में जनमत संग्रह भी कराया था।

खालिस्तान समर्थकों पर कसेगा नकेला
भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने औपचारिक रूप से कनाडा सरकार से 'सिख फॉर जस्टिस' नामक संगठन को आतंकवादी संगठन घोषित करने का अनुरोध किया है। एनआईए ने इस हफ्ते ओटावा में अपने कनाडाई कानून प्रवर्तन समकक्षों के साथ बातचीत की और उन्हें एसएफआई के खिलाफ कई सारे सबूत और डोजियर सौंपे हैं। इनमें बताया गया है कि, इस संगठन को भारत सरकार ने क्यों प्रतिबंधित कर रखा है और भारत में, खासकर पंबाज में किस तरह से ये संगठन आतंकी वारदातों को अंजाम देना चाहता है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सुरक्षा एजेंसी एनएआई की तरफ से कनाडा सरकार से ये अपील इस साल की शुरूआत में की गई है।

हिंसक तत्वों का बढ़ावा देता एसएफआई
कनाडा सरकार से एसएफआई के खिलाफ एक्शन लेने की अपील करने के लिए एनआईए टीम ने इस साल की शुरूआत में ओटावा की यात्रा ती थी और कनाडा सरकार की सुरक्षा एजेंसी को सबूतों के साथ बताया खा कि, एसएफजे भारत में, विशेष रूप से पंजाब में, अपने अलगाववादी एजेंडे के हिस्से के रूप में हिंसा को बढ़ावा दे रहा है, जिसमें पंजाब जनमत संग्रह का नेतृत्व भी शामिल है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से मदद पाकर एसएफजे का गुरपतवंत पन्नून भारत के खिलाफ साजिशें रच रहा है और खालिस्तान हिंसक कार्रवाईयों को अंजाम दे रहा है। आपको बता दें कि, भारत ने गुरपतवंत पन्नून को आतंकवादी घोषित कर रखा है।

खालिस्तान समर्थकों पर होगी कार्रवाई?
एनआईए की टीम रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस, जिसे आरसीएमपी कहा जाता है, उसके निमंत्रण पर गुरुवार और शुक्रवार को ओटावा में थी और एनआईए ने इस मौके पर "अंतर्राष्ट्रीय अपराध और आतंकवाद विरोधी ब्यूरो ऑफ ग्लोबल अफेयर्स कनाडा के साथ और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के डिवीजन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अतिरिक्त बैठकें भी की हैं। ओटावा में भारत के उच्चायोग द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, आतंकवाद और वैश्विक आतंकवादी वित्तपोषण के निषेध पर भारत-कनाडा सहयोग को गहरा और विस्तारित करने के उद्देश्य से बैठक की गई है। ऐसा माना जाता है कि कनाडा के न्याय विभाग के अधिकारियों से भी मुलाकात हुई है।

कनाडा की सुरक्षा एजेंसी से संबंध मजबूत
भारतीय दूतावाल की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि, एनआईए टीम का यह दौरा "आतंकवाद से जुड़ी संदिग्ध संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ जांच में बेहतर समन्वय बनाने और अन्य आपराधिक मामलों पर चर्चा करने के लिए" था। एनआईए टीम का नेतृत्व एक पुलिस महानिरीक्षक ने किया था और खालिस्तान को लेकर कनाडाई समकक्षों के साथ चर्चा की है और उन्हें कई महत्वपूर्ण सबूत सौंपे हैं। ओटावा में भारत के उच्चायुक्त अजय बिसारिया ने यात्रा का स्वागत किया और ट्वीट करते हुए कहा कि "भारत-कनाडा रणनीतिक साझेदारी से अपराध और आतंकवाद की जांच में मजबूत सहयोग भी होता है।"

कितना खतरनाक है सिख फॉर जस्टिस
भारत सरकार 10 जुलाई, 2019 को खालिस्तान समर्थक संगठन दि सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) को इसकी राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में एसएफजे को गैर कानूनी गतिविधियां निरोधक कानून के तहत प्रतिबंधित घोषित करने का फैसला किया गया था। खालिस्तान समर्थक सिख फॉर जस्टिस संगठन अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों में बैठकर चलाया जाता है। इस संगठन को यूएपीए-1967 की धारा (1) के प्रावधानों के तहत गैर कानूनी घोषित किया गया था।

16 सदस्य हैं आतंकी घोषित
एनआईए ने UAPA के तहत दाखिल चार्जशीट में सिख फॉर जस्टिस संगठन के कुल 16 सदस्यों को आतंकी घोषित किया गया था। इनमें नाम क्रमशः गुरपतवंत मान सिंह पन्नू, हरदीप सिंह निज्जर, परमजीत सिंह पम्मा, अवतार सिंह पन्नू, गुरप्रीत सिंह बागी, हरप्रीत सिंह, सरबजीत सिंह, अमरदीप सिंह पुरेवाल, जे एस धालीवाल, दुपिंदरजीत सिंह, कुलवंत सिंह, हरजाप सिंह, जतिंदर सिंह ग्रेवाल, कुलवंत सिंह मोताथा और हिम्मत सिंह का नाम शामिल हैं।












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