भारत में कम नहीं हुआ करप्शन, जानिए मोदी सरकार के कार्यकाल में कैसा रहा हाल? पाकिस्तान भी नहीं बदला

भारत की मोदी सरकार ने करप्शन को खत्म करने के लिए कई बड़े वादे किए हैं, लेकिन भ्रष्टाचार खत्म करने को लेकर सरकार के हाथों में ज्यादा कामयाबी नहीं मिल सकी है।

Corruption Perceptions Index

Corruption Perceptions Index: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी पार्टी बीजेपी ने करप्शन मिटाने को लेकर काफी वादे किए थे, लेकिन साल 2022 में भारत करप्शन को खत्म करने में कोई तरक्की नहीं कर पाया। करप्शन परसेप्शन इंडेक्श ने पूरी दुनिया में भ्रष्टाचार को लेकर जो रिपोर्ट पेश किया है, उससे पता चलता है, कि भारत में करप्शन वैसा ही बरकरार है। हालांकि, मोदी सरकार के आने के बाद भारत को करप्शन इंडेक्श (सीपीआई) नें 2 प्वाइंट्स की बढ़त जरूर मिली है, लेकिन ये बढ़त इतना मामूली है, कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।

करप्शन कंट्रोल करने में भारत नाकाम

करप्शन कंट्रोल करने में भारत नाकाम

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा है, कि ज्यादातर दक्षिण एशियाई देश करप्शन को कंट्रोल करने में नाकाम रहे हैं, जिसमें भारत के साथ साथ पाकिस्तान भी शामिल है। इस रिपोर्ट में 180 देशों को शामिल किया गया है और प्वाइंट्स के आधार पर उनकी रैकिंग की गई है। साल 2022 के लिए जारी करप्शन परसेप्शन इंडेक्श में पाकिस्तान कोई भी सुधार करने में नाकाम रहा है और उसे 180 देशों में 140वें नंबर पर रखा गया है। पाकिस्तान पिछले साल भी 140वें नंबर पर ही था। यानि, पाकिस्तान में करप्शन जस का तस बरकरार है। यही हाल भारत का भी है। भारत में सत्ता पक्ष भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के हजारों दावे करता रहता है, लेकिन करप्शन परसेप्शन इंडेक्श (सीपीआई) में भारत को लेकर कोई बदलाव नहीं हुआ है।

भ्रष्टाचारियों की लिस्ट में कहां है भारत

भ्रष्टाचारियों की लिस्ट में कहां है भारत

सीपीआई, जो मापता है कि किसी देश के सार्वजनिक क्षेत्र को उसके विशेषज्ञों और व्यवसायियों द्वारा कितना भ्रष्ट माना जाता है, ये शून्य से 100 के पैमाने का उपयोग भ्रष्टाचार को मापने के लिए करता है। इस इंडेक्स में शून्य प्वाइंट का मतलब अत्यधिक भ्रष्ट होता है, जबकि 100 प्वाइंट हासिल करने का मतलब पानी की तरह स्वच्छ देश होता है। सीपीआई की लिस्ट में इस साल भारत को 40 प्वाइंट ही हासिल हुए हैं और भारत को भ्रष्टाचार की लिस्ट में 85वें नंबर पर रखा गया है। जबकि, 2014 में जब मोदी सरकार भ्रष्टाचार को खत्म करने के वादे के साथ सत्ता में आई थी, उस वक्त भारत को 38 प्लाइंट मिले थे। यानि, पिछले 8 सालों में भारत को सिर्फ 2 प्वाइंट ही ज्यादा मिले हैं। मोदी सरकार के इन 8 सालों के कार्यकाल के दौरान भारत के अधिकतम 41 नंबर 2018 और 2019 में मिले थे।

भारत के पड़ोसी देशों का हाल

भारत के पड़ोसी देशों का हाल

पाकिस्तान को पिछले साल 28 प्वाइंट मिले थे और इस साल 27 नंबर मिले हैं, लेकिन पाकिस्तान की रैकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ है और पाकिस्तान 140वें नंबर पर मौजूद है। वहीं, बांग्लादेश का स्कोर पिछले साल के 26 से गिरकर 25 हो गया है। पाकिस्तान के संदर्भ में सबसे दिलचस्प बात ये पता चला है, कि जिस इमरान खान ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभूतपूर्व अभियान चलाने का दावा किया था, उनके कार्यकाल में ही पाकिस्तान की रैकिंग बुरी तरह गिरी है। पाकिस्तान 2019 में 120वें स्थान पर था और इमरान खान के कार्यकाल में ही पाकिस्तान 140वें नंबर तक पहुंचा है।

कहां पर कितना करप्शन?

कहां पर कितना करप्शन?

सबसे साफ सुथरे देशों की बात की जाए, तो नंबर एक पर डेनमार्क है, जिसे 100 में से 90 नंबर हासिल हुए हैं, वहीं दूसरे नंबर पर 87 प्वाइंट्स के साथ फिनलैंड है। तीसरे नंबर पर न्यूजीलैंड (87), चौथे नंबर पर नॉर्वे (84), पांचवें नंबर पर सिंगापुर (83), छठवें नंबर पर स्वीडन (83), सातवें नंबर पर स्विट्जरलैंड (82), आठवें नंबर पर नीदरलैंड (80), नौवें नंबर पर जर्मनी (79) और दसवें नंबर पर आयरलैंड (79) है। वहीं, करप्शन लिस्ट में जापान 18वें नंबर पर, फ्रांस 21वें नंबर पर, यूनाइटेड किंगडम 18वें नंबर पर, अमेरिका 24वें नंबर पर, सऊदी अरब 54वें नंबर पर है।

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