पाकिस्तान के खिलाफ भारत के लिए 'अचूक हथियार' थे इब्राहिम रईसी.. जानिए कैसे दिल्ली से बनाया दिल का रिश्ता?
Ebrahim Raisi special connection with India: भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को "ईरानी राष्ट्रपति डॉ. सैयद इब्राहिम रईसी की मौत पर गहरा दुख जताया है और कहा है, कि भारत दुख की इस घड़ी में ईरान के साथ खड़ा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट करके लिखा, कि "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के राष्ट्रपति डॉ. सैयद इब्राहिम रईसी के दुखद निधन से बहुत दुखी और स्तब्ध हूं। भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उनके परिवार और ईरान के लोगों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं। दुख की इस घड़ी में भारत ईरान के साथ खड़ा है।"

भारत के साथ थे रईसी के स्पेशल संबंध
इब्राहिम रईसी जब राष्ट्रपति चुनाव जीते थे, तो उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया था।
2021 में ईरान के उदारवादी राष्ट्रपति हसन रूहानी को हटाकर सत्ता में आने के बाद इब्राहिम रईसी और उनके विदेश मंत्री अमीर-अब्दुल्लाहियन ने ईरान और भारत के बीच के संबंधों को बढ़ाने के लिए काफी काम किया, जिसमें चाबहार बंदरगाह सबसे प्रमुख है। रईसी की वजह से ही ईरान के चाबहार पोर्ट में भारत महत्वपूर्ण निवेश करने में कामयाब हो पाया, और इस सौदे की वजह से भारत को पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान पहुंचने का रास्ता मिल गया।
चाबहार पोर्ट, पाकिस्तान में चीन द्वारा बनाए गये ग्वादर बंदरगाह से सिर्फ 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और चाबहार पोर्ट आज भी पाकिस्तान की आंखों में कांटों की तरह चुभता है, क्योंकि इसने पाकिस्तान की जियो-पॉलिटिकल पॉजिशन को ही ध्वस्त करके रख दिया।
ये पोर्ट, मध्य एशिया में जाने का भारत का रास्ता माना जाता है, जो से रूस के साथ भारत की कनेक्टिविटी महत्वाकांक्षाओं के लिए। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने जनवरी में चाबहार पोर्ट डील और उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर के विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए ईरान का दौरा किया था।
पिछले हफ्ते ही, जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दोनों देशों के लिए एक बड़ी भू-आर्थिक कामयाबी हासिल करते हुए चाबहार बंदरगाह को अगले 10 वर्षों तक संचालित करने के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
नई दिल्ली BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) में शामिल होने के लिए तेहरान का प्रमुख समर्थक रहा है, यह डेवलपमेंट आखिरकार सितंबर 2023 में दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुआ। इससे पहले, नई दिल्ली के सत्ता के गलियारों में, नई दिल्ली के नेतृत्व वाले वॉयस ऑफ द ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन में तेहरान के समर्थन को व्यापक रूप से स्वीकार किया गया था।
1995 से मौजूदा वक्त तक, संयुक्त राज्य अमेरिका ने तेहरान की परमाणु ऊर्जा हासिल करने की कोशिश का हवाला देते हुए, ईरान की अर्थव्यवस्था के विभिन्न हिस्सों पर प्रतिबंध घोषित करने के लिए दस कार्यकारी आदेश जारी किए हैं। 25 अप्रैल 2021 से अगस्त 2024 के बीच, अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान से जुड़ी कई संस्थाओं - धार्मिक, आर्थिक, कट्टरपंथी संगठनों पर प्रतिबंध घोषित करने के लिए कुल 65 आदेश जारी किए हैं।
लेकिन, ईरानी हितों के खिलाफ वाशिंगटन के लगातार कोशिशों के बावजूद, यह भारत ही था, जिसने अपनी मजबूत राजनयिक पूंजी के माध्यम से चाबहार बंदरगाह से संबंधित निवेश के लिए 2018 में अमेरिका से छूट हासिल की थी। तेहरान, नई दिल्ली के भू-आर्थिक महत्व को पहचानता है और राष्ट्रपति रईसी ने इसीलिए, अपनी विदेश नीति में पाकिस्तान की जगह भारत को तरजीह दी।
इसके अलावा भी, जब पिछले दिनों इब्राहिम रईसी ने पाकिस्तान का दौरा किया था, तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कश्मीर मुद्दे का जिक्र तक नहीं किया। जिससे पता चलता है, कि ईरान ने अपनी विदेश नीति से कश्मीर को बाहर कर दिया है। वहीं, अफगानिस्तान में तालिबान को लेकर भी इब्राहिम रईसी ने भारत का साथ दिया है।
-
Israel Iran War: कौन था हुसैन अल-जौहरी? जिसे मारने के लिए इजराइल और अमेरिका ने तेहरान तक हिला दिया! -
'1 April Fools Joke', ईरान ने ट्रंप के ‘नए शासन’ वाले दावे का उड़ाया मजाक, सीजफायर को बताया झूठा और मनगढ़ंत -
Trump Speech: स्पीच में ट्रंप ने बदल दिया मकसद, बोले- डील नहीं तो फिर होगा हमला, होर्मुज पर भी मारी गुलाटी -
Trump U-Turn: अपने ही दावों से फिर पलटे ट्रंप, स्पीच में बदला जंग का टारगेट, 7 बातें जो कर रही कन्फ्यूज -
Iran Donation Money: खामेनेई की मौत के बाद भारत में जुटाया गया मोटा चंदा क्यों ईरान नहीं जा सकता? क्या होगा? -
Khamenei: अमेरिका-इजराइल के अंत तक हिज़बुल्लाह को जारी रहेगा समर्थन, मोजतबा खामेनेई के ऐलान से टेंशन में ट्रंप -
Trump Hormuz Plan: कौन हैं जनरल डेन केन? जिसके कहने पर होर्मुज छोड़ फरार हुए ट्रंप, सरेंडर या मास्टरस्ट्रोक? -
Iran US war: 'अमेरिका ईरान छोड़ देगा', Donald Trump ने किया युद्ध खत्म होने का ऐलान? क्या करेंगे नेतन्याहू? -
Iran America War: 'ईरान के नए राष्ट्रपति ने सीजफायर की लगाई गुहार', ट्रंप ने किया दावा, बताई क्या हैं शर्तें -
Britain In Iran War: ब्रिटिश PM को सता रहा मारग्रेट थैचर वाला डर, खुलवाएंगे होर्मुज? ट्रंप से बनाई दूरी -
IAS Tina Dabi Transfer: दो लव मैरिज-एक से तलाक, विवादों में घिरीं UPSC टॉपर टीना डाबी का कहां-क्यों ट्रांसफर? -
LPG Price Today: युद्ध के बीच जनता पर फूटा महंगाई बम, सिलेंडर के दाम बढ़े, आपके शहर में कहां पहुंचा रेट?












Click it and Unblock the Notifications