इजराइल-US से फंसा ईरान दोस्त भारत से ले रहा पंगे, मुसलमानों पर सुप्रीम लीडर के जहरीले बयान के मायने समझिए

India-Iran Ties: इजराइल और अमेरिका के साथ उलझे ईरान ने अपने करीबी दोस्तों में से एक भारत से पंगे ले लिए हैं और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की भारतीय मुसलमानों को लेकर की गई बयानबाजी ने दोनों दोस्त देशों के बीच दरार पैदा कर दिया है।

अयातुल्ला अली खामेनेई के बयान पर भारत की तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया दी गई है और सोमवार (16 सितंबर) को भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारत में अल्पसंख्यकों पर ईरानी नेता की टिप्पणी की निंदा करते हुए इसे "गलत सूचना" करार दिया है। ईरानी सुप्रीम लीडर का बयान पाकिस्तान की तरफ से होने वाली बयानबाजी से मेल खाता है।

ayatollah ali khamenei

ईरानी सुप्रीम लीडर का बयान हैरानी भरा इसलिए भी है, क्योंकि दोनों देश दशकों पुराने संबंध साझा करते हैं और एख मजबूत साझेदार बने हुए हैं। तेहरान भारत के कच्चे तेल के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से एक रहा है, लेकिन पश्चिमी प्रतिबंधों से यह प्रभावित हुआ है।

लेकिन अयातुल्ला अली खामेनेई ने वास्तव में क्या कहा? नई दिल्ली ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी? और क्या इसका भारत-ईरान संबंधों पर असर पड़ सकता है? हम आपके लिए बड़ी तस्वीर लेकर आए हैं।

ईरान के अयातुल्ला अली खामेनेई ने क्या कहा?

16 सितंबर को ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के मौके पर, पैगंबर मुहम्मद की जयंती पर, अयातुल्ला अली खामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "इस्लाम के दुश्मनों ने हमेशा हमें एक इस्लामी उम्माह के रूप में हमारी साझा पहचान के संबंध में उदासीन बनाने की कोशिश की है। अगर हम म्यांमार, गाजा, भारत या किसी अन्य स्थान पर एक मुसलमान द्वारा झेली जा रही पीड़ा से अनजान हैं, तो हम खुद को मुसलमान नहीं मान सकते।"

ईरान के बारे में बोलते हुए उन्होंने लिखा, कि "दुर्भावनापूर्ण लोग लंबे समय से इस्लामी दुनिया में, विशेष रूप से ईरान में, धार्मिक मतभेदों को बढ़ावा दे रहे हैं।"

ईरानी सुप्रीम लीडर के ट्वीट में भारत के नाम ने नई दिल्ली को हैरान कर दिया और कड़ी प्रतिक्रिया देने के लिए बाध्य कर दिया।

भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

अयातुल्ला अली खामेनेई की ताजा टिप्पणी नई दिल्ली को रास नहीं आई है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ईरान की आलोचना करते हुए एक तीखा बयान जारी किया। बयान में कहा गया, कि "हम ईरान के सर्वोच्च नेता द्वारा भारत में अल्पसंख्यकों के बारे में की गई टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हैं। ये गलत सूचना और अस्वीकार्य हैं। अल्पसंख्यकों पर टिप्पणी करने वाले देशों को सलाह दी जाती है, कि वे दूसरों के बारे में कोई भी टिप्पणी करने से पहले अपना रिकॉर्ड देखें।"

संयोग से, यह टिप्पणी और उसके बाद भारत की फटकार, महसा अमीनी की मृत्यु की दूसरी वर्षगांठ पर आई। महसा अमीनी 22 साल की एक कुर्द लड़की थी, जिन्हें ईरान "ठीक से हिजाब नहीं पहनने" की वजह से गिरफ्तार किया गया था और फिर ईरान की मोरल पुलिस ने उनके साथ बुरी तरह से मारपीट की, जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई। महसा अमीनी के शरीर पर और माथे पर पिटाई के काफी गहरे जख्म मिले थे और सिर में कई हड्डियां टूटी थीं।

महसा अमीनी की मौत ने ईरानी महिलाओं को दहला कर रख दिया और देश में भीषण विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये, जो 2 महीने से ज्यादा वक्त तक चलता रहा, जिसमें दर्जनों लोग पुलिस की गोली से मारे गये और कई प्रदर्शनकारियों को फांसी दे दी गई। विरोध प्रदर्शनों में शामिल ईरानी अधिकारियों ने सैकड़ों महिलाओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया, जिनके साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गई।

अमीनी की दूसरी पुण्यतिथि पर भी ईरान की कई महिलाओं ने अपने बाल खुले रखे और सड़कों पर निकलीं। इसके अलावा, तेहरान की एविन जेल में कई महिलाओं ने अमीनी की याद में भूख हड़ताल भी की।

ये घटना ईरान में महिलाओं और कमजोर समुदाय के साथ होने वाली सरकारी हिंसा को उजागर करती है।

भारत को लेकर सुप्रीम लीडर की पुरानी टिप्पणियां

यह पहली बार नहीं है, जब ईरान के सर्वोच्च नेता ने भारत में मुसलमानों और देश में उनकी स्थिति पर टिप्पणी की है। जब नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देते हुए अनुच्छेद 370 को निरस्त किया था, तब अयातुल्ला ने चिंता जताई थी।

उन्होंने तब एक्स पर पोस्ट किया था, "हमारे भारत के साथ अच्छे संबंध हैं, लेकिन हम उम्मीद करते हैं, कि भारत सरकार कश्मीर के महान लोगों के प्रति न्यायपूर्ण नीति अपनाएगी और इस क्षेत्र में मुसलमानों के उत्पीड़न को रोकेगी।"

इसके अगले साल 2020 में, अयातुल्ला खामेनेई ने नई दिल्ली में हुए दंगों की पृष्ठभूमि में भारतीय अधिकारियों से "कट्टरपंथी हिंदुओं का सामना करने" और "मुसलमानों के नरसंहार को रोकने" का आग्रह किया था। उन्होंने हैशटैग #IndianMuslimsInDanger का इस्तेमाल करते हुए एक्स पर पोस्ट किया था, जिसमें लिखा था, "भारत में मुसलमानों के नरसंहार पर दुनिया भर के मुसलमानों का दिल दुखी है।"

दिलचस्प बात यह थी, कि ईरान के सर्वोच्च नेता की टिप्पणी ईरान के तत्कालीन विदेश मंत्री जावेद जरीफ की तरफ से दंगों की निंदा करने के कुछ ही समय बाद आई थी, जिसकी भारत ने कड़ी निंदा की थी।

और इन सब से पहले, 2017 में ईद पर एक भाषण में खामेनेई ने कश्मीर की तुलना बहरीन और यमन से की थी, और मुस्लिम दुनिया से इन क्षेत्रों के लोगों का समर्थन करने के लिए कहा था। उन्होंने कहा था, "मुस्लिम दुनिया को यमन, बहरीन और कश्मीर के लोगों का खुलकर समर्थन करना चाहिए और उन पर हमला करने वाले उत्पीड़कों और अत्याचारियों का खंडन करना चाहिए।"

भारत-ईरान संबंधों पर पड़ेगा असर?

इस बात की बहुत कम संभावना है, कि अयातुल्ला अली खामेनेई की टिप्पणी भारत-ईरान के उन बड़े संबंधों को प्रभावित करेगी, जो दोनों देशों के बीच लंबे समय से हैं। हाल ही में मई में, दोनों देशों ने ईरान के चाबहार में शाहिद बेहेश्टी पोर्ट टर्मिनल के संचालन के लिए भारत के साथ दीर्घकालिक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। यह अनुबंध पहली बार है जब भारत किसी विदेशी बंदरगाह का प्रबंधन अपने हाथ में लेगा।

भारत और ईरान के बीच हजारों साल पुराने संबंध हैं। समकालीन संबंधों की पहचान उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान, वाणिज्यिक सहयोग, संपर्क और सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों से होती है।

इसके अलावा, व्यापार और संपर्क नई दिल्ली के तेहरान के साथ संबंधों को परिभाषित करते हैं। 2022-23 में, ईरान के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार 2.33 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि, हाल के वर्षों में तेहरान के साथ नई दिल्ली के व्यापार में गिरावट आई थी, जिसके लिए अमेरिकी प्रतिबंध जिम्मेदार है, मगर 2022-23 में कारोबार में 21.77 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।

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