Iran India Oil Trade: 7 साल बाद भारत-ईरान में 'तेल के बदले चावल' की डील, साल 2000 वाला फॉर्मूला लागू?
Iran India Oil Trade: अगर आप साल 2000 की शुरुआत में जाते हैं, तो भारत और ईरान के बीच ट्रेड का एक अलग ही लेवल था। उस समय भारत ईरान से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता था, और बदले में बासमती चावल एक्सपोर्ट करता था। यह सिस्टम खास इसलिए था क्योंकि भारत को सस्ता तेल मिल जाता था और ईरान को भी डॉलर की जरूरत कम पड़ती थी। दोनों देशों का ट्रेड बिना ज्यादा Global Pressure के आराम चलता रहता था।
लेकिन साल 2003 में अमेरिका और ईरान के संबंध सबसे तनावपूर्ण दौर में पहुंच गए। जहां ईरान पर एक के बाद एक कई सेंक्शन लगते चले गए। साथ ही पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इन सेंक्शनों को पहले कड़ा किया और फिर ढील दे दी। लेकिन उन के बाद आए डोनाल्ड ट्रंप ने इन्हें और ज्यादा कड़ा कर दिया।

2010: अमेरिका की एंट्री और पूरा गेम बदल गया
अब यहां कहानी में बड़ा बदलाव आता है। जब अमेरिका ने ईरान पर सख्त sanctions लगाए, खासकर 2010 के बाद, तो भारत को भी अपने ट्रेड में कटौती करनी पड़ी। 2012-13 में भारत, ईरान का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार था, लेकिन 2018 में Donald Trump ने JCPOA डील से बाहर निकलकर फिर से sanctions लगा दिए। इसका सीधा इम्पेक्ट ये हुआ कि भारत का ईरान से तेल आयात लगभग शून्य हो गया और Oil-for-Rice सिस्टम धीरे-धीरे खत्म हो गया साथ ही चाबहार पोर्ट पर भी काम धीमा पड़ गया।

2019-2023: जुगाड़ चलता रहा, लेकिन आधा-अधूरा
भारत ने पूरी तरह ईरान को छोड़ा नहीं, बल्कि एक बैलेंस डिप्लोमेसी खेली। जिसमें कुछ पेमेंट्स रुपए में UCO Bank के जरिए किए। इसके साथ ही चाबहार पोर्ट को स्ट्रेटजिक एसेट की तरह मेनटेन किया गया लेकिन ऑयल इम्पोर्ट बंद ही रहा। यानी दोस्ती बनी रही, लेकिन दूरी भी बनी रही।
2026: India ने फिर शुरू किया Iran से Oil Import
अब आते हैं मौजूदा वक्त पर- 7 साल बाद, भारत ने फिर से ईरान से तेल और LNG आयात शुरू कर दिया है और यहीं से कहानी एक और करवट लेती है। Oil-for-Rice सिस्टम की वापसी की चर्चा भी तेज होने लगती है। एक्सपोर्टर्स फिर से उत्साहित हो जाते हैं लेकिन सरकार अभी भी सतर्क रहकर काम करती रहती है। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि वैश्विक बाजार में तेल के दाम बुरी तरह अस्थिर हैं क्योंकि मिडिल ईस्ट में इस वक्त तनाव चरम पर है। वहीं हमें इस वक्त सस्ते दाम पर तेल की सख्त जरूरत है।

रुपये में ट्रेड Dollar को Side करने की तैयारी?
एक्सपोर्टर्स ने सरकार से साफ कहा है कि डॉलर को छोड़ो, रुपए में डील करो। ये मॉडल कैसे काम करेगा वो भी समझ लेते हैं। जो मॉडल व्यापारियों ने बताया उसके मुताबिक पेमेंट UCO Bank के जरिए होगी। जिसमें भारत से चावल एक्सपोर्ट किया जाएगा और ईरान से तेल इम्पोर्ट किया जाएगा। इससे डॉलर पर भारत और भारतीय व्यापारी दोनों की निर्भरता कम होगी और डॉलर का दबदबा भी कमजोर पड़ेगा।

इसका फायदा क्या है?
अगर भारत रुपए में ट्रेड करता है तो हमें Forex में अच्छी खासी बचत होगी जिसका डायरेक्ट फायदा किसानोंको होगा। साथ ही एक्सपोर्टर्स की डिमांड भी स्थिर रहेगी।
पूरी दुनिया चोक प्वॉइंट- Strait of Hormuz
अब दुनिया को किस बात की चिंता है उसको भी समझ लेते हैं। Strait of Hormuz दुनिया का सबसे critical oil route है। दुनिया के लगभग 20% तेल की सप्लाई यहीं से गुजरती है। यहां तनाव होने का मतलब है कि दुनियाभर में गैस और तेल के दाम आसमान छूना। कुछ देश इस महंगाई को कुछ वक्त के लिए टाल सकते हैं लेकिन ज्यादा नहीं। साथ ही इसे शिपिंग कॉस्ट बढ़ती है, इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ता है और एक्सपोर्ट भी डिले होता है।
अब सबसे बड़ा सवाल: अगर अमेरिका ने बंद की राहत?
यहीं से पूरा रिस्क फेक्टर शुरू होता है। अगर अमेरिका छूट नहीं बढ़ाता, तो भारत को दूसरे देशों से या अमेरिका से ही महंगा तेल खरीदना पड़ेगा। इसके अलावा बैंक भी डील करने से पीछे हटेंगे और पेमेंट सिस्टम भी collapse हो सकता है।
चाबहार पोर्ट: सिर्फ पोर्ट नहीं, गेम चेंजर है
चाबहार पोर्ट भारत के लिए सिर्फ एक पोर्ट नहीं है, बल्कि अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक सीधा रास्ता है, जिसमें पाकिस्तान को बायपास किया जा सकता है। ऐसे में अगर अमेरिका फिर से सेंक्शन लगा देता है तो भारत का प्रोजेक्ट (चावल-तेल डील) रुक सकता है, जो हमारे लिए बड़ा नुकसान होगा।
ईरान अमेरिका में बैलेंस बना पाएगा भारत?
अब जरा सोचिए, एक तरफ अमेरिका और दूसरी तरफ ईरान और इन दोनों के बीच में भारत बैलेंस बनाने की कोशिश कर रहा है। इसमें चुनौती ये है कि ईरान से तेल भी मिलता रहे और अमेरिका से भी संबंध न बिगड़ें, ताकि भारत की ग्लोबल इमेज सुरक्षित रहे।
आम आदमी पर क्या असर?
अगर अमेरिका फिर सेंक्शन लगाता है तो भारत में आम आदमी की बोझ पर काफी वजन पड़ेगा। अगर ईरान से तेल आता रहेगा तो तेल के दाम कंट्रोल में रहेंगे और अगर सेंक्शन लगे तो दाम बढ़ना भी लगभग तय है। अगर सेंक्शन नहीं लगे तो चावल ईरान को एक्सपोर्ट कर सकते हैं जिससे कमाई में इजाफा होगा और अगर सेंक्शन लगे तो ट्रेड रूट ही खतरे में आ सकता है। फिलहाल भारत सेफ गेम खेल रहा है, लेकिन ये देखना होगा कि अमेरिका सेंक्शन में कितनी छूट देता है।
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