ब्राजील की तरह ही कोरोना से कराह रहा है भारत, बार बार मिली चेतावनी लेकिन बने रहे शुतुरमुर्ग

बार बार चेतावनी के बाद भी भारत ने खतरनाक कोरोना वायरस को लेकर ब्राजील से नहीं सीखा सबक, अब भुगत रहा अंजाम।

रियो डी जेनेरियो, अप्रैल 25: ब्राजील से सबक नहीं सीखने का अंजाम भारत को भुगतना पड़ रहा है। अगर भारत ने ब्राजील से सबक लिया होता तो शायद दिन भारत को नहीं देखना पड़ता। ब्राजील में पिछले 2 महीने से कोराना वायरस भयानक कहर बरपा रहा है और ब्राजील में फरवरी महीने से ही हर दिन 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत कोरोना वायरस की वजह से हो रही है लेकिन भारत ने ब्राजील की स्थिति पर ध्यान नहीं दिया। ब्राजील से भारत सरकार ने सबक नही सीखा और उसी का अंजाम अभी हमारे देश के लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है।

ब्राजील से नहीं सीखा सबक

ब्राजील से नहीं सीखा सबक

ब्राजील में पिछले 24 घंटे में 3 हजार 76 लोगों की मौत कोरोना वायरस की वजह से हुई है और पिछले 24 घंटे में ब्राजील में 71 हजार 137 कोरोना वायरस संक्रमित मरीज मिले हैं। अब ब्राजील में कोरोना वायरस से जान गंवाने वालों का आंकड़ा बढ़कर 3 लाख 89 हजार492 हो चुकी है। ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि आखिर भारत सरकार ने ब्राजील से सबक क्यों नहीं सीखा। ब्राजील विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मुल्क है, जहां कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस से होने वाली मौतों में अमेरिका पहले स्थान पर है। वहीं, ब्राजील से ज्यादा कोरोना वायरस से संक्रमित भारत के लोग हो चुके हैं। हालांकि, भारत में ब्राजील से कम लोग कोरोना वायरस से मरे हैं।

लापरवाह सिस्टम, बेपरवाह सरकार

लापरवाह सिस्टम, बेपरवाह सरकार

ब्राजील में कोरोना वायरस का दूसरा लहर इस साल की शुरूआत में ही आ चुका था। और ब्राजील में कितने लोगों की मौत हो रही है, ब्राजील के अस्पतालों में ऑक्सीजन की स्थिति क्या है, हर चीज से भारत की सरकार वाकिफ थी लेकिन उसके बाद भी भारत सरकार ने अस्पतालों के लिए पर्याप्त मात्रा में ना ऑक्सीजन की व्यवस्था की और ना ही बेड्स और वेंटिलेटर्स की। सबक लेना तो दूर भारत के प्रधानमंत्री, अलग अलग राज्यों के मुख्यमंत्री और राजनेता चुनावी सभा में लाखों की भीड़ जुटाकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते रहे। लेकिन, जब लोगों की जान बचाने के लिए शक्ति दिखाने की बारी आई तो हर नेता बिल में दुबक चुके हैं।

कोरोना से कराहता ब्राजील

कोरोना से कराहता ब्राजील

ब्राजील का सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर साओ पालो में कोरोना सबसे ज्यादा खतरनाक स्तर पर है। यहां पर कोरोना वायरस के अब तक 28 लाख 27 हजार 833 संक्रमित मिल चुके हैं, जिनमें से 92 हजार 548 मरीजों की मौत हो चुकी है। वहीं रियो डी जेनेरियो में अब तक 42 हजार से ज्यादा संक्रमितों की मौत हो चुकी है। ब्राजील स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक ब्राजील में मृत्यु दर हर एक लाख मरीजों पर 185 है। ब्राजील में हर दिन 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है और ब्राजील का हेल्थ सिस्टम पूरी तरह से टूट चुका है। अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी किल्लत है और ब्राजील अभी तक तय नहीं कर पाया है कि देश को किस वैक्सीन से वैक्सीनेट करना है। ब्राजील सरकार की नाकामयाबी के खिलाफ ब्राजील की सीनेट ने राष्ट्रपति जैर बोल्सनारो के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।

भारत में कार्रवाई कब ?

भारत में कार्रवाई कब ?

भारत की दुर्दीन के लिए हर कोई जिम्मेदार है। वैक्सीन बनाने वाला सबसे बड़ा देश भारत है लेकन वैक्सीन बनने के साथ ही भारत के विपक्षी नेताओं ने अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए वैक्सीन के नाम पर झूठ बोलना शुरू कर दिया। विपक्षी नेताओं ने वैक्सीन के नाम पर झूठ बोल-बोलकर लोगों के दिल में डर भर दिया। स्थिति ये है कि जो लोग वैक्सीन के बारे में काफी अच्छे से जानते हैं, उनके दिल में भी वैक्सीन को लेकर डर है। भारत में वैक्सीन की 42 लाख डोज एक्सपायर कर गईं लेकिन लोग वैक्सीन लगवाने अस्पताल नहीं गये। ऐसे में सवाल ये है कि आखिर झूठ बोलने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई कब होगी? समाज को डराकर मौत की दहलीज तक लाने वाले नेताओं पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए? बात सरकार की करें तो भारत में बड़े अधिकारियों की कमेटी लगातार भारत सरकार को ऑक्सीजन के लिए वार्निंग दे रही थी लेकिन देश की सरकार मन की बात में व्यस्त रही। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पश्चिम बंगाल में रैलियों में लाखों की भीड़ बुलाकर गर्व महसूस करते रहे। और रही बात भारत की जनता की, तो भारत की जनता अपने कर्मों की सजा भुगत रही है। लोगों ने मास्क लगाना बंद कर दिया, रैलियों में जाने से इनकार नहीं किया और जब आफत सिर पर टूट पड़ी है तो लोग जिम्मेदार को खोज रहे हैं।

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