भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के बनाए गये 3 स्तंभ, मोदी-मैक्रों ने तय किए 25 सालों का एजेंडा.. क्या समझौते हुए?

PM Modi France Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच शुक्रवार को द्विपक्षीय वार्ता के बाद भारत और फ्रांस के बीच कई नये समझौते किए गये हैं। इस दौरान दोनों नेताओं ने ना सिर्फ दोनों देशों के बीच 25 सालों के रणनीतिक संबंध का जश्न मनाया, बल्कि अगले 25 सालों के लिए भी लक्ष्य तय किए हैं।

भारतीय विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने कहा, कि दोनों देशों की तरफ से जारी संयुक्त बयान में 63 नतीजे हैं। इस ज्वाइंट स्टेटमेंट में साल 2047 तक भारत और फ्रांस के बीच के रणनीतिक संबंध कैसे होंगे, और जब भारत अपनी आजादी की 100वीं वर्षगांठ मनाएगा और जब दोनों देशों के बीच के रणनीतिक संबंध के 50 साल पूरे हो जाएंगे, तो दोनों देश किस मुकाम तक पहुंचना चाहेंगे, इसके लक्ष्य तय किए गये हैं।

india france joint statement

द्विपक्षीय संबंध के तीन स्तंभ

द्विपक्षीय संबंधों के रोडमैप के तीन स्तंभ बनाए गये हैं, जो हैं सुरक्षा और संप्रभुता के लिए साझेदारी, इस प्लानेट के लिए साझेदारी और तीसरा, लोगों के लिए साझेदारी।

पहला स्तंभ- पार्टनरशिप फॉर सिक्योरिटी, सोवर्जिनिटी

डिफेंस-- भारतीय वायुसेना के लिए 36 राफेल जेट की समय पर डिलीवरी और P75 कार्यक्रम (छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियों) की सफलता के बाद, लड़ाकू जेट और पनडुब्बियों पर सहयोग जारी रखना।

अंतरिक्ष-- फ्रांस के CNES और भारत के ISRO के बीच कई समझौतों के जरिए वैज्ञानिक और वाणिज्यिक साझेदारी को बढ़ाया जा रहा है। विशेष रूप से फिर से इस्तेमाल किए जाने वाले लॉन्चर को लेकर काम होगा। इसके अलावा ज्वाइंट अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को लेकर काम होगा।

इसके अलावा, समुद्री सैटेलाइट TRISHNA को लेकर दोनों देशों के बीच सहयोग जारी रहेगा और उसे अंतिम रूप दिया जाएगा। ये हिंद महासागर में सर्विलांस सैटेलाइट के समूह का पहला चरण है और अंतरिक्ष में किसी टकराव से निपटने के लिए भारत और फ्रांसीसी सैटेलाइट की सुरक्षा के लिए भी दोनों देश साथ काम करेंगे।

नागरिक परमाणु ऊर्जा-- दोनों पक्षों ने महाराष्ट्र के जैतापुर में 6-ईपीआर बिजली संयंत्र परियोजना पर प्रगति का स्वागत किया है। दोनों नेताओं ने, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों और एडवांस मॉड्यूलर रिएक्टरों पर एक सहयोग कार्यक्रम शुरू करने का फैसला लिया है।

इंडो-पैसिफिक-- इंडो-पैसिफिक में संयुक्त कार्रवाई के लिए एक रोडमैप को अपनाया गया है। जिसमें क्षेत्र के लिए हमारी व्यापक रणनीति के सभी पहलुओं को शामिल किया गया हो। तीसरे देशों के लिए एक इंडो-फ़्रेंच विकास निधि को अंतिम रूप देने पर काम करने का फैसला किया गया है, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सतत विकास परियोजनाओं के संयुक्त वित्तपोषण को सक्षम करेगा।

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दूसरा स्तंभ- पार्टनरशिप फॉर पीपुल

छात्रों को लेकर समझौता-- साल 2030 तक फ्रांस में 30,000 भारतीय छात्रों का स्वागत करने का नया लक्ष्य रखा गया है। फ्रांस के एक विश्वविद्यालय में अध्ययन कर चुके मास्टर डिग्री वाले भारतीय छात्रों के लिए 5 साल का अल्पकालिक शेंगेन वीजा जारी करने का फैसला किया गया है।

कूटनीति: मार्सिले में भारत का महावाणिज्य दूतावास और हैदराबाद में ब्यूरो डी फ्रांस खोलने की घोषणा की गई है।

रिसर्च-- फ्रांस और भारत मिलकर नई परियोजनाओं को वित्तपोषित करने के लिए इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर द प्रमोशन ऑफ एडवांस्ड रिसर्च (आईएफसीपीएआर/सीईएफआईपीआरए) की फंडिंग बढ़ाएंगे।

स्पोर्ट्स-- विशेष रूप से प्रमुख आगामी खेल आयोजनों को ध्यान में रखते हुए, स्पोर्ट्स सेक्टर में सहयोग को बढ़ाया जाएगा।

नागरिक समाज-- साल 2025 तक भारत और फ्रांस में एकजुटता और नागरिक सेवा अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवकों की संख्या दोगुनी करने का फैसला लिया गया है।

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तीसरा स्तंभ- पार्टनरशिप फॉर प्लानेट

भारत और फ्रांस, भारत के शहरीकरण और औद्योगीकरण से प्रेरित ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और एसडीजी7 और पेरिस जलवायु समझौते के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सहमत हुए हैं।

संयुक्त बयान में कहा गया है, कि भारत और फ्रांस मानते हैं कि पेरिस समझौते के दीर्घकालिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए ऊर्जा मिश्रण में स्वच्छ स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाना आवश्यक है।

भारत और फ्रांस का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में स्थायी समाधानों में परमाणु ऊर्जा का उपयोग शामिल है।

जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई और इंडो-पैसिफिक में पर्यावरण की सुरक्षा के लिए, भारत और फ्रांस इंडो-पैसिफिक पार्क पार्टनरशिप, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन सहित बहुपक्षीय और तीसरे देश की पहल के माध्यम से क्षेत्र के देशों को सतत विकास समाधान प्रदान करेंगे।

भारत और फ्रांस नीली अर्थव्यवस्था (समुद्री अर्थव्यवस्था), क्षेत्रीय लचीलेपन और जलवायु वित्त से संबंधित मुद्दों पर बातचीत और सहयोग को बढ़ावा देंगे।

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