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India-EU FTA 2026: सस्ते में मिलेंगी लग्जरी कारें! जानें कौन-कौन सी कारों के गिरेंगे दाम

India-EU FTA 2026: भारत यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ प्रस्तावित Free Trade Agreement (FTA) के तहत यूरोप से आने वाली कारों पर इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने की योजना बना रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार जल्द ही इसकी औपचारिक घोषणा कर सकती है। इस कदम से भारत में लग्जरी कार सेगमेंट की पहुंच आसान होगी और दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

महंगी यूरोपीय कारों पर घटेगा टैरिफ!

रॉयटर्स के मुताबिक भारत सरकार यूरोपियन यूनियन से आने वाली 15,000 यूरो (करीब 1,59,617 भारतीय रुपए) से अधिक कीमत वाली सीमित संख्या की कारों पर इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने पर सहमत हो गई है। अभी इन कारों पर 110% तक भारी टैरिफ लगता है, जिसे पहले घटाकर 40% किया जाएगा और बाद में इसे 10% तक लाने की संभावना है। इससे वोक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और BMW जैसी बड़ी यूरोपीय कंपनियों को भारतीय बाजार में विस्तार का मौका मिलेगा।

India-EU FTA 2026

लग्जरी कार सेगमेंट को मिलेगा बूस्ट

BMW ग्रुप इंडिया के अध्यक्ष और सीईओ हरदीप सिंह बराड़ ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि FTA के तहत आयातित कारों पर सीमा शुल्क में कटौती से भारत में लग्जरी कार सेगमेंट को तेज़ी से बढ़ने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, "लग्जरी वाहन भारत के कुल पैसेंजर व्हीकल मार्केट का सिर्फ 1% हिस्सा हैं, इसलिए इससे बड़े पैमाने के घरेलू खिलाड़ियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन ग्राहकों को ज़रूर फायदा होगा।" उनके मुताबिक, यह भारत और यूरोपियन यूनियन दोनों के लिए एक 'विन-विन' स्थिति है।

लंबे इंतजार के बाद फाइनल स्टेज में समझौता

कई सालों की बातचीत के बाद भारत-यूरोपियन यूनियन व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। दोनों पक्ष इसे एक ऐतिहासिक डील मान रहे हैं, जो द्विपक्षीय व्यापार को मज़बूत करेगी। इस समझौते से भारत के निर्यात सेक्टर, जैसे कपड़ा और गहनों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब अगस्त से इन पर अमेरिकी टैरिफ लगाया गया है।

भारत का ऑटो बाजार क्यों माना जाता है सबसे सुरक्षित?

भारत में आयातित कारों पर 70% से लेकर 110% तक का भारी टैरिफ लगता है, जिससे यह दुनिया के सबसे संरक्षित ऑटो बाजारों में गिना जाता है। अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है, इसके बावजूद विदेशी वाहन निर्माता इन ऊंचे शुल्कों को अपनी एंट्री और निवेश के रास्ते में बड़ी रुकावट मानते हैं।

ICE कारों के लिए तय होगा सालाना कोटा

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने यूरोपियन यूनियन को प्रस्ताव दिया है कि FTA के तहत हर साल 2 लाख (200,000) आंतरिक दहन इंजन (ICE) वाहनों पर इम्पोर्ट ड्यूटी में 40% तक की कटौती की जाएगी। हालांकि, इस कोटे की अंतिम संख्या में अभी बदलाव संभव है और बातचीत जारी है।

EV को मिलेगी शुरुआती सुरक्षा

पहले पांच सालों तक बैटरी-इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) इस टैरिफ घटने के दायरे में शामिल नहीं होंगे। सरकार का मकसद टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे घरेलू EV निर्माताओं के शुरुआती निवेश की रक्षा करना है, जब तक भारत में मजबूत स्थानीय EV इकोसिस्टम विकसित नहीं हो जाता। पांच साल बाद EVs पर भी वही शुल्क संरचना लागू की जाएगी।

भारतीय बाजार में यूरोपीय ब्रांडों की हिस्सेदारी

फिलहाल, भारत में सालाना लगभग 44 लाख कारों की बिक्री होती है, जिसमें यूरोपीय ब्रांडों की हिस्सेदारी 4% से भी कम है। भारतीय कार बाजार पर मुख्य रूप से सुजुकी मोटर, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा का दबदबा है, जिनके पास कुल बाजार हिस्सेदारी का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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