तवांग में एक साल से साजिश रच रहा था चीन, 150 मीटर की दूरी पर बनाई सड़क, फिर भारत में घुसा
ऑस्ट्रेलियाई सामरिक नीति संस्थान की यह रिपोर्ट तवांग में 9 दिसंबर को झड़प के बाद आई है। यह रिपोर्ट इस क्षेत्र में LAC के साथ लगते प्रमुख क्षेत्रों की सैटेलाइट इमेज के विश्लेषण पर आधारित है।

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Image: ANI
पाकिस्तान के बन्नु जिले में काउंटर टेररिज्म सेंटर (CTD) पर कब्जा करने वाले तहरीक-ए-तालिबान (TTP) के 33 आतंकियों को पाकिस्तानी सेना ने मार गिराया है। इससे पहले इन आतंकियों ने बंधक बनाए गए लोगों को छोड़ने से इनकार कर दिया था। सरकार और आतंकियों के बीच वार्ता के फेल होने के बाद विशेष बलों ने इन आतंकियों को ठिकाने लगाने के लिए एक विशेष अभियान चलाया। डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ ने संसद को जानकारी देते हुए बताया कि इस ऑपरेशन में 2 कमांडो भी मारे गए हैं।

1 साल से सड़क निर्माण कार्य में जुटा चीन
अरुणाचल के तवांग सेक्टर में स्थित यांग्तसे पठारी इलाके में रिज-लाइन या उच्च भूमि पर यूं तो भारत की रणनीतिक बढ़त पहले से मजबूत है लेकिन अब यहां अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास में चीन भी जुट गया है। चीन ने पिछले एक साल में नए सैन्य और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर बना लिए हैं जिससे वह बेहद तेजी से अपने सैनिकों को भारतीय सीमा तक भेज सकता है। इसे लेकर ऑस्ट्रेलियाई सामरिक नीति संस्थान ने भी चेतावनी दी है। इस नए अध्ययन के मुताबिक चीन एक साल पहले की तुलना में अब अधिक आसानी से यांग्तसे पठार के प्रमुख स्थानों पर पहुंच सकता है।

बड़े पैमाने पर सैन्य तैयारी कर रहा चीन
रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने डोकलाम से अरुणाचल प्रदेश तक इतने बड़े पैमाने पर सैन्य तैयारी की है जिससे दोनों देशों के बीच कभी भी संघर्ष छिड़ सकता है। इस इंस्टीट्यूट के मुताबिक चीन ये कदम जानबूझकर उठा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने तवांग सेक्टर के यांग्तसे पठार जिसे चीन ‘दक्षिणी तिब्बत' कहता है, LAC के 150 मीटर के दायरे में एक सड़क का निर्माण किया है। ऑस्ट्रेलिया विशेषज्ञों का कहना है कि रणनीतिक रूप से यह इलाका बेहद अहम है, इसीलिए चीन यहां पर इतना ज्यादा फोकस कर रहा है।

सैटेलाइट तस्वीरों में दिख रही सड़क
ऑस्ट्रेलियाई सामरिक नीति संस्थान की यह रिपोर्ट तवांग में 9 दिसंबर को झड़प के बाद आई है। यह रिपोर्ट इस क्षेत्र में LAC के साथ लगते प्रमुख क्षेत्रों की सैटेलाइट इमेज के विश्लेषण पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत, यांग्तसे पठार की रिज-लाइन पर नियंत्रण रखता है। यह इतनी ऊंची जगह है जहां से भारत न चीनी सैनिकों की हर हरकत पर नजर रख सकता है। इस कमी को दूर करने के लिए चीन लगातार ऊंची पोजिशन पर जगह बनाना चाहता है। इसके लिए उसने रिज-लाइन के 150 मीटर की दूरी तक पर सड़क निर्माण कर लिया है।

भविष्य में युद्ध की योजना बना रहा चीन
रिपोर्ट में इसका भी जिक्र है कि बीते कुछ समय में पूर्वी लद्दाख में गलवान और पैंगोंग त्सो में सैनिकों की वापसी और पुनर्तैनाती के बाद संघर्ष का जोखिम कम हुआ है लेकिन इसके विपरीत तवांग सेक्टर में यांग्त्से पठार पर युद्ध का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। चीनी सेना यांग्तसे में यथास्थिति को खत्म करने के लिए लगातार उकसाने वाले कदम उठा रही है। चीन ने पूर्वी लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक फैले पूरे 3,488 किमी क्षेत्र में LAC के साथ-साथ बुनियादी ढ़ाचे को मजबूत कर लिया जो कि दर्शाता है कि वह शांति नहीं बल्कि, भविष्य में भारत के साथ युद्ध की योजना बना रहा है।

यांग्त्से पठार भारतीय सैनिकों की स्थिति मजबूत
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि, "PLA हमेशा यांग्त्से पठार पर भारतीय सेना की उपस्थिति से नाखुश रही है। यह सही बात है कि चीन ने तवांग सेक्टर में अपने बुनियादी ढ़ाचे को अपग्रेह किया है लेकिन भारत यहां पहले से मजबूत स्थिति में है। भारत के पास यहां स्तरीय सुरक्षा और पर्याप्त भंडार हैं। जितनी जल्दी चीनी सैनिक इस क्षेत्र में इकट्ठा हो सकते हैं उससे कहीं अधिक जल्दी भारतीय सैनिक LAC पर जुट सकते हैं।" अधिकारी ने कहा कि चीनी सेना ने 9 दिसंबर को भारत के इसी स्थिति में बदलाव करने की कोशिश की थी जिसे भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया।

भारत भी तेजी से करा रहा निर्माण कार्य
ASPI की रिपोर्ट के मुताबिक भारत भी सीमा पर अपनी स्थिति को और मजबूत बनाने में लगा हुआ है। केंद्र सरकार सीमावर्ती इलाकों में तेजी से सड़कों का निर्माण करवा रही है। तवांग सेक्टर में झड़प के बाद सेना ने सीमा पर बुनियादी ढांचे के निर्माण की गति तेज कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक 5700 फीट की ऊंचाई पर नेचिपु टनल का निर्माण कार्य चल रहा है। D-शेप में बनी ये सिंगल-ट्यूब डबल लेन टनल है जिसमें टू-वे ट्रैफिक की आवाजाही हो सकेगी। इसके साथ ही BRO द्वारा अरुणाचल प्रदेश के तवांग के पास वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की ओर सेला दर्रा सुरंग का निर्माण किया जा रहा है। इससे भारतीय सेना को सभी मौसम में संपर्क स्थापित करने में सहायता मिलेगी।
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