भारत-कनाडा विवाद में चौधरी बनना चाहता है अमेरिका-UK, बिन मांगे सलाह देने पर भारतीय एक्सपर्ट्स ने लगाई लताड़

India-Canada Row: अमेरिका, जो अपने फायदे के हिसाब से कभी आतंकी संगठनों का निर्माण करता है और कभी अपने फायदे के हिसाब से आतंकी संगठनों के खात्में का ऐलान कर देश के देश तबाह कर डालता है, वो भारत और कनाडा के बीच चल रहे विवाद के बीच चौधरी बनने की कोशिश कर रहा है। जिसको लेकर भारतीय एक्सपर्ट्स ने बाइडेन प्रशासन को अपने 'हद में रहने' की सलाह दी है।

भारत और कनाडा के बीच चल रहे राजनयिक गतिरोध के बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम ने शुक्रवार को 41 कनाडाई राजनयिकों को भारत से बाहर निकाले जाने पर चिंता व्यक्त की है। जबकि, अमेरिका ने भारत से आग्रह किया है, कि वो 41 कनाडाई राजनयिकों को देश से बाहर नहीं निकाले।

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हालांकि, भारत सरकार की सख्ती के बाद कनाडा ने 20 अक्टूबर को अपने 41 राजनयिकों को नई दिल्ली से निकाल लिया है, और कनाडा के प्रधानमंत्री ने भारत की सख्ती को वियना कन्वेंशन का उल्लंघन करार दिया है, लेकिन भारत अपने रूख पर कायम है।

जिसपर ब्रिटेन ने कहा, कि वह भारत सरकार द्वारा लिए गए फैसलों से सहमत नहीं है।

चौधरी बनने की कोशिश में अमेरिका

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन ने कहा है, कि उसने कनाडा के आरोपों को गंभीरता से लिया है और भारत से हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की जांच में कनाडा के साथ सहयोग करने का आग्रह किया है।

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा, कि "भारत में अपनी राजनयिक उपस्थिति को कम करने की कनाडा सरकार की मांग के जवाब में, हम कनाडा के राजनयिकों के भारत से प्रस्थान से चिंतित हैं।"

इस बीच, ब्रिटेन के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा, कि "हम भारत सरकार द्वारा लिए गए फैसलों से सहमत नहीं हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई कनाडाई राजनयिकों को भारत छोड़ना पड़ा है।"

ये बयान कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली की घोषणा के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था, कि नई दिल्ली की सख्ती के बाद कनाडा ने 41 राजनयिकों और उनके परिवारों को भारत से निकाल लिया है, क्योंकि भारत ने कहा था, कि 20 अक्टूबर तक अगर उन्हें नई दिल्ली से वापस नहीं बुलाया गया, तो उनकी डिप्लोमेटिक इम्युनिटी छीन ली जाएगी, ऐसी स्थिति में उनके ऊपर खतरा मंडरा सकता था।

वियना कन्वेंशन का दिया हवाला

ब्रिटेन और अमेरिका, दोनों ने वियना कन्वेंशन का हवाला दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा, कि "हम उम्मीद करते हैं, कि भारत राजनयिक संबंधों पर 1961 वियना कन्वेंशन के तहत अपने दायित्वों को बरकरार रखेगा।"

उन्होंने कहा, कि उन्होंने भारत सरकार से पिछले महीने निज्जर की हत्या पर चल रही कनाडाई जांच में सहयोग करने का आग्रह किया है। ब्रिटेन के विदेश कार्यालय के बयान में कहा गया है, कि "राजनयिकों की सुरक्षा प्रदान करने वाले विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों को एकतरफा हटाना, वियना कन्वेंशन के सिद्धांतों या प्रभावी कामकाज के अनुरूप नहीं है।"

जबकि, कनाडाई प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत और कनाडा में "लाखों लोगों" के लिए "सामान्य जीवन" को "अविश्वसनीय रूप से कठिन" बनाने के लिए भारत सरकार पर फिर से निशाना साधा है।

कनाडा ने भारत के राजनयिक समानता के आह्वान को "अंतर्राष्ट्रीय कानून के विपरीत" करार दिया है। लेकिन, भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने जोर देकर कहा है, कि नई दिल्ली की कार्रवाई पूरी तरह से वियना सम्मेलन के अनुरूप है। विदेश मंत्रालय ने कहा, कि "इस समानता को लागू करने में हमारी कार्रवाई राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेंशन के अनुच्छेद 11.1 के साथ पूरी तरह से सुसंगत है।"

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भारतीय एक्सपर्ट ने लगाई लताड़

भारत के विदेश मामलों के जानकार और ओआरएफ रिसर्च फाउंडेन के सीनियर फेलो सुशांत शरीन ने अमेरिका के बयान को भारत और कनाडा के द्विपक्षीय मामलों में दखल बताया है।

सुशांत शरीन ने अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, कि "क्या किसी द्विपक्षीय मामले पर तीसरे देशों द्वारा टिप्पणी करना सामान्य राजनयिक व्यवहार है? इसके अलावा भारतीय राजनयिकों को जान से मारने की धमकियों और कनाडा में ट्रूडो शासन के समर्थन से खालिस्तानी आतंकवादियों की गतिविधियों पर कुछ चिंता दिखाने के बारे में (अमेरिका के) क्या विचार हैं?"

आपको बता दें, कि कनाडा और अमेरिका भले ही इजराइल का समर्थन कर रहे हैं, बावजूद इसके कनाडाई और अमेरिकी शहरों में हमास के समर्थन में रैलियां निकाली जा रही हैं। इसके अलावा, कनाडा में पिछले हफ्ते तालिबानी झंडों के साथ भी कई लोग देखे गये थे। जिसे भारतीय एक्सपर्ट इन देशों का डबल गेम करार दे रहे हैं।

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