37 अरब डॉलर के तेल खरीदकर प्रतिबंधों को किया बेअसर, अब रूस के साथ-साथ भारत पर भी एक्शन लेगा अमेरिका!

West Sanction against Russia: भारत, चीन, मध्य पूर्व, अफ्रीका और लैटिन अमेरिकी देशों ने रूस के खिलाफ लगाए गये अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों को अभी तक बेअसर कर रखा है। पिछले दो सालों में इन देशों ने रूस से इतना तेल खरीदा, कि पुतिन का देश और भी ज्यादा आर्थिक तौर पर मजबूत हो गया है।

लेकिन, अब अमेरिका और यूरोपीय देश रूस के खिलाफ प्रतिबंध पैकेज का 13वां सेट लागू करने जा रहे हैं और इस बार जो प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, वो मॉस्को के साथ साथ उन कंपनियों पर सीधा असर करेगा, जो रूस के साथ कारोबार कर रही हैं।

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ऐसी रिपोर्ट है, कि 24 फरवरी को, जिस दिन रूस और यूक्रेन के बीच शुरू हुए युद्ध के दो साल पूरे होंगे, पश्चिमी देश उस दिन रूस के खिलाफ नये प्रतिबंधों का ऐलान करने जा रहे हैं। जिसमें कुछ भारतीय कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं। लेकिन, इसके बाद भी भारत ने तय किया है, कि रूस के साथ डिस्काउंट पर तेल खरीदने का सिलसिला जारी रहेगा।

भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान साफ शब्दों में कहा है, कि भारत के पास अलग अलग ऑप्शन होना और अलग अलग देशों के साथ कारोबार करना 'स्मार्ट' फैसला है।

प्रतिबंधों से नहीं डरेगी मोदी सरकार

भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से उनकी हर यूरोपीय यात्रा के दौरान पश्चिमी देशों के पत्रकार रूस के खिलाफ भारत के प्रतिबंध में शामिल नहीं होने, रूस के साथ बड़े स्तर पर तेल खरीदने को लेकर सवाल पूछते हैं और एस. जयशंकर ने भी हमेशा हर प्लेटफॉर्म पर भारत के रूख को साफ किया है।

भारतीय विदेश मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है, कि यूरोप के पास भारत से सवाल पूछने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि जब यूरोप ने खुद रूस से गैस खरीदना बंद नहीं किया है, तो फिर वो भारत से सवाल कैसे पूछ सकता है? जबकि भारत ने रूस से तेल खरीदकर तेल बाजार को स्थिर रखा है।

लेकिन, भारत को लेकर पश्चिमी देशों की चिढ़ को समझा जा सकता है, क्योंकि भारत ने चीन और मध्य पूर्व के साथ मिलकर रूस के खिलाफ लगाए गये प्रतिबंधों को नाकाम बना दिया है। रूसी अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ती जा रही है। रूस की तेल और गैस की बिक्री रोकने के प्रयासों के बावजूद, रूसी ऊर्जा बाजार अभी भी मजबूत है। रूसी तेल कंपनियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले दो सालों में भारत ने रूस से 37 अरब डॉलर के पेट्रोल खरीदे हैं।

साल 2022 में रूस के कच्चे तेल और गैस का प्रोडक्शन बढ़ा है और गैसोलीन और डीजल ईंधन उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

सेंट पीटर्सबर्ग में यूरोपीय विश्वविद्यालय की नीना पॉसेनकोवा के मुताबिक, 2022 में रूसी कच्चे तेल का उत्पादन 2% और तेल निर्यात 7% बढ़ गया है। जबकि, उसी वर्ष रूस का पेट्रोलियम राजस्व 28% बढ़ गया है। रूसी तेल कंपनियों ने 2022 में 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 28,000 किमी से ज्यादा कुएं खोदे हैं।

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किन देशों को तेल सप्लाई करता है रूस?

चीन और भारत के अलावा, रूस ने तुर्की, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात को डिलीवरी में उल्लेखनीय वृद्धि की है। इसके अलावा गैर-पारंपरिक ग्राहकों, विशेष रूप से अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में तेल आपूर्ति शुरू कर दी है। जबकि, इस दौरान पश्चिमी देशों ने लगातार रूस की कंपनियों, रूसी नेताओं और रूसी टेक्नोलॉजी पर प्रतिबंध लगाए हैं।

अमेरिका ने मार्च 2022 में रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद, G7 और EU ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और ऊर्जा टेक्नोलॉजी और वस्तुओं की आपूर्ति पर प्रतिबंध लगा दिए। एक्सॉनमोबिल, शेल और बीपी जैसी बड़ी अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों ने अरबों की संपत्ति बट्टे खाते में डालकर रूस छोड़ दिया। विदेशी तेल सेवा कंपनियों ने बड़े पैमाने पर अपनी रूसी गतिविधियाँ रोक दीं।

इसके अलावा, यूरोपीय संघ ने रूसी तेल (5 दिसंबर 2022 से) और पेट्रोलियम उत्पादों (5 फरवरी 2023 से) के समुद्री आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं, रूसी तेल पर 60 डॉलर प्रति बैरल का प्राइस कैप भी लगा दिया, यानि कोई भी देश रूस से 60 डॉलर प्रति डॉलर से ज्यादा की कीमत पर तेल नहीं खरीद सकता है।

भारत ने खरीदे 37 अरब डॉलर के तेल

इन सबके बीच फिनलैंड के सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है, कि पिछले दो सालों में भारत ने रूस से 37 अरब डॉलर के पेट्रोल-डीजल खरीदे हैं, जो एक विशालकाय आंकड़ा है। इस थिंक टैंक ने दावा किया है, कि भारत के विशालकाय आयात ने रूस के खिलाफ यूरोपीय देशों के प्रतिबंधों को बेअसर कर दिया है।

जबकि, सीएनएन की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि युद्ध शुरू होने से पहले सभी यूरोपीय देश मिलकर रूस से जितना तेल खरीदते थे, युद्ध शुरू होने के बाद उतना तेल अकेले भारत ने खरीदना शुरू कर दिया। जबकि, रूस से कच्चा तेल खरीदकर भारत ने करीब एक अरब डॉलर के रिफाइंड तेल अमेरिका को भी बेचा है।

दूसरी तरफ भारत ने बार बार जोर देकर कहा है, कि रूस से डिस्काउंट पर तेल खरीदना उसका अधिकार है और वो किसी भी देश के प्रतिबंध का उल्लंघन नहीं कर रहा है। लेकिन, अब जब रूस के खिलाफ नये प्रतिबंध लगाए जाएंगे, तो फिर देखना होता है, कि भारत का अगला कदम क्या होता है?

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