श्रीलंका का सबसे बड़ा मददगार बना भारत, चीन ने मुंह फेरा, जापान ने बनाया ये बहाना
नई दिल्ली, 18 जुलाईः श्रीलंका आजादी के बाद अपने सबसे भीषण आर्थिक-राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। इस बीच इस द्वीप देश ने कई देशों से आर्थिक व अन्य मदद मांगी है मगर अब तक भारत के अलावा अन्य कोई देश श्रीलंका की विशेष मदद नहीं कर पाया है। चीन, जो बीते कई सालों से श्रीलंका का 'खास' बना हुआ था, अब मुश्किलों में घिरे इस देश से मुंह मोड़ चुका है।

37.69 करोड़ डॉलर की मदद
भारत, वर्ष 2022 के शुरुआती 4 महीनों में श्रीलंका के सबसे बड़े ऋणदाता के रूप में उभरा है। भारत ने अपने इस पड़ोसी देश को अब तक कुल 37.69 करोड़ डॉलर का ऋण दिया है। वहीं, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन ने श्रीलंका को केवल 6.790 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया है। इससे पहले चीन कई बार श्रीलंका को आर्थिक मदद करने की हामी भर चुका है, लेकिन अब तक उसका ये दावा हवा-हवाई ही साबित हुआ है।

भारत सबसे बड़ा मददगार
समाचार पत्र डेली मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 के पहले चार महीनों यानी 30 अप्रैल तक दिए गए पैसों के अनुसार, भारत ऋणदाताओं की सूची में सबसे ऊपर है। एशियाई विकास बैंक (ADB) इस अवधि में 35.96 करोड़ डॉलर के साथ दूसरा सबसे बड़ा ऋणदाता है, वहीं इसके बाद विश्व बैंक का स्थान आता है जिसने श्रीलंका को अब तक 6.73 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया है।

चीन ने की मामूली मदद
चीन द्वारा दिए गए कर्ज को अखबार ने "मामूली" बताया है। रिपोर्ट में भारत के सहृदयता की प्रशंसा करते हुए यह कहा गया है कि जब श्रीलंका ने इस साल की शुरुआत में विदेशी मुद्रा की भारी कमी का सामना करना शुरू किया तो पड़ोसी देश बचाव में आया था। 2022 के पहले चार महीनों में, श्रीलंका को 96.81 करोड़ डॉलर का विदेशी ऋण मिला है जिसमें 0.7 मिलियन डॉलर का अनुदान भी शामिल है।

भारत ने कई मौकों पर की मदद
2022 की शुरुआत से श्रीलंका के लिए भारत की विदेशी सहायता का पूरा पैकेज शामिल है। भारत ने इस मौके पर श्रीलंका को ईंधन, भोजन और दवाओं की आपातकालीन खरीद के लिए ऋण दिया और एशियाई समाशोधन संघ के भुगतान को आगे बढ़वाया। इसके साथ ही भारत ने श्रीलंका के साथ 3.8 बिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप भी की थी।

संकट से पहले चीन सबसे बड़ा पार्टनर
रिपोर्ट में कहा गया है, "व्यापक उम्मीदों के बावजूद, चीन ने श्रीलंका के बचाव में आने की अनिच्छा दिखाई।" चीन ने इस्तेमाल के लिए श्रीलंका के सेंट्रल बैंक के साथ अपनी 1.5 बिलियन डॉलर के बराबर युआन की स्वैप लाइन को भी अनलॉक नहीं किया है। यानी श्रीलंका चीन के साथ मुद्रा स्वैप नहीं कर पाया। गौरतलब है कि चीन श्रीलंका के 'संकटकाल' से पहले तक सबसे बड़ा द्विपक्षीय फंडिंग पार्टनर था।

जापान ने भी नहीं की मदद
चीन के अलावा श्रीलंका से मुंह फेर लेने वाले देशों में जापान भी शामिल है। कोलंबो में जापानी राजदूत मिजुकोशी हिदेकी ने कहा कि श्रीलंका को वित्तीय सहायता के कुप्रबंधन का जोखिम है और इसलिए जापान इस समय देश का समर्थन नहीं करेगा। हालाँकि उन्होंने कहा है कि जापान इस पर बाद में विचार कर सकता है।












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