भारत ने किया बीजिंग ओलंपिक खेलों का डिप्लोमेटिक बहिष्कार, अमेरिकी सीनेटर्स कमेटी ने किया स्वागत
भारत से पहले अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देश बीजिंग ओलंपिक खेलों का डिप्लोमेटिक बहिष्कार कर चुके हैं और अब भारत सरकार के फैसले का अमेरिका ने स्वागत किया है।
नई दिल्ली/वॉशिंगटन, जनवरी 04: अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों के बाद आखिरकार भारत ने भी बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक खेलों का डिप्लोमेटिक बहिष्कार कर दिया है। गलवान घाटी हिंसा में सामिल चीनी सैनिक के हाथ में ओलंपिक खेलों की मसाल पकड़ाकर चीन ने जो राजनीति की है, उसे भारत ने अफसोसनजनक बताया है और बीजिंग ओलंपिक का डिप्लोमेटिक बहिष्कार कर दिया है। वहीं, भारत सरकार के इस फैसले का अमेरिका में स्वागत किया गया है।

बीजिंग ओलंपिक खेलों का बहिष्कार
गलवान संघर्ष में शामिल एक चीनी सैनिक को ओलंपिक मशाल वाहक के रूप में चुनने के बीजिंग के कदम को "अफसोसजनक" बताते हुए भारत ने बीजिंग ओलंपिक खेलों का डिप्लोमेटिक बहिष्कार कर दिया है। गुरुवार को भारत ने कहा कि, बीजिंग स्थिति उसके दूत शुक्रवार से शुरू होने वाले शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन या समापन समारोह में शामिल नहीं होगा। यानि, भारत सरकार ने राजनयिक स्तर पर बीजिंग ओलंपिक खेलों का बहिष्कार कर दिया है। हालांकि, भारत की तरफ से खिलाड़ी शामिल होंगे और बीजिंग ओलंपिक के अलग अलग खेलों में हिस्सा लेंगे। जून 2020 में गलवान संघर्ष में भारत के एक कर्नल संतोष बाबू समेत 20 सैनिक शहीद हो गये थे, वहीं चीन को भी काफी नुकसान पहुंचा था और ओलंपिक खेलों में गलवान संघर्ष को लाने की वजह से भारत सरकार ने बीजिंग ओलंपिक का राजनीतिक बहिष्कार किया है।
अमेरिका ने किया फैसला का स्वागत
भारत से पहले अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देश बीजिंग ओलंपिक खेलों का डिप्लोमेटिक बहिष्कार कर चुके हैं और अब भारत सरकार के फैसले का अमेरिका ने स्वागत किया है। अमेरिकी सीनेट फॉरेन रिलेशन कमिटी के चेयरमैन ने बयान जारी करते हुए कहा है कि, ''मैं बीजिंग ओलंपिक का डिप्लोमेटिक बहिष्कार में शामिल होने के लिए भारत की सराहना करता हूं। हम उन सभी देशों के साथ खड़े हैं जो #Olympics2022 को राजनीतिक जीत में बदलने की कोशिश करने वाले चीन कम्युनिस्ट पार्टी के के शिनजियांग में जघन्य तरीके से मानवाधिकारों के हनन और कोल्ड ब्लड जुर्म के खिलाफ हैं।''

खेल में राजनीति लाने की कोशिश
गलवान संघर्ष में शामिल एक चीनी सैनिक को मशालवाहक के तौर पर चुनने के बाद भारत सरकार की तरफ से गहरी नाराजगी जताई गई है और भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि, ''यह वास्तव में खेदजनक है कि चीनी पक्ष ने इस तरह की घटना का राजनीतिकरण करने के लिए ओलंपिक के मंच को चुना है। लिहाजा, बीजिंग में भारतीय दूतावास के प्रभारी बीजिंग 2022 शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन या समापन समारोह में शामिल नहीं होंगे।'' वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय ने अरूणाचल प्रदेश के लड़के को चीन द्वारा अपहरण के मामले पर कहा कि, भारत की तरफ से चीन के सामने इस मुद्दे को उठाया गया है।

जान बचाकर भागा था चीनी सैनिक
दरअसल, चीन में हो रहे विंटर ओलंपिक 2022 में बुधवार को ड्रैगन ने पीएलए के जिस कमांडर की फाबाओ को मशालवाहक के रूप में उतारकर बड़ा राजनयिक बवाल खड़ा किया है, वह दरअसल जून 2020 में भारतीय सैनिकों की गिरफ्त में आ गया था। ऑस्ट्रेलिया के एक अखबार क्लाक्सॉन लगातार गलवान घाटी को लेकर चीन के झूठे प्रोपेगेंडा की पोल खोल रहा है। अब इसने एक इंवेस्टिगेटिव रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि जब 15-16 जून, 2020 की दरमियानी रात में चीन के सैनिकों ने पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में अचानक भारतीय सैनिकों पर हमला बोलने की कोशिश की थी, तो भारतीय जवानों ने उसके गलवान कमांडर को ही धर-दबोचा था और वहां से जान बचाकर भागने को मजबूर कर दिया था और अब उसी भगौड़े सैनिक के हाथ में चीन ने ओलंपिक खेलों की मसाल देकर प्रोपेगेंडा करने की कोशिश की है।












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