अफगानिस्तान में 3 महिला मीडियाकर्मियों की बेरहमी से हत्या, भारतीय सीरियल्स की करती थीं अफगानिस्तानी डबिंग
अफगानिस्तान में तीन महिला पत्रकारों की बेरहमी से हत्या कर दी गई है। तीनों महिला पत्रकार भारतीय सीरियल्स का अफगानिस्तानी भाषाओं में डबिंग करती थीं।
काबुल: अफगानिस्तान में 3 महिला मीडियाकर्मियों की बेरहमी से हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पूर्वी अफगानिस्तान में 3 महिला मीडियाकर्मियों की गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया। तीनों महिला मीडियाकर्मी एक टीवी चैनल के लिए काम करती थीं। ये महिलाएं प्रसिद्ध भारतीय नाटकों और सीरियल्स को अफगानिस्तान की स्थानीय भाषाओं में ट्रांसलेट और डब किया करती थीं।

3 महिला मीडियाकर्मियों की हत्या
एनिकास टीवी में काम करने वाली महिलाओं को अफगानिस्तान के अज्ञात आतंकियों ने निशाना बनाया है। चश्मदीदों के मुताबिक पहली घटना जलालाबाद की है जब सादिया और शहनाज नाम की महिला मीडियाकर्मी घर के बाहर टहल रही थीं उसी वक्त अज्ञात हमलावर ने उनके ऊपर गोलियों की बरसात कर दी। दोनों महिला मीडियाकर्मियों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं दूसरी घटना जलालाबाद के सिटी की है जहां मुरसल हबिबी नाम की महिला मीडियाकर्मी की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
तीन महिला मीडियाकर्मियों की हत्या के बाद टीवी और रेडियो नेटवर्क के प्रमुख जालमे लतिफी ने उसे अफगानिस्तान मीडिया के लिए सबसे खराब दिन बताया है। उन्होंने कहा कि तीनों महिलाएं डबिंग सेक्शन के लिए सबसे प्रमुख थीं। उन्होंने कहा कि तीनों मीडियाकर्मियों के पास कई सालों का अनुभव था और उनके द्वारा किया जाने वाला काम पूरे अफगानिस्तान में काफी पसंद किया जाता था और अब उनके काम की भरपाई करना नामुमिकन होगा। ये टीवी मीडिया के लिए काला दिन है।
तालिबानी आतंकी गिरफ्तार
बताया जा रहा है कि एनिकास टीवी को पहले ही मीडियाकर्मियों पर होने वाले हमले को लेकर इंटेलीजेंस रिपोर्ट दी गई थी और उन्हें आगाह कर दिया गया था। अफगानिस्तान नेशनल इंटेलीजेंस ने टीवी चैनल को बकायदा रिपोर्ट देकर हमले की आशंका के बारे में बताया था मगर टीवी चैनल द्वारा लापरवाही बरती गई। वहीं, इस गोलीबारी में दो और महिलाएं घायल हुई हैं, जिनका अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। इस हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी भी आतंकवादी संगठन ने नहीं लिया है। वहीं, नानगरहर के पुलिस चीफ ने कहा है कि तालिबान ने अभी तक हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है और आशंका है कि किसी स्थानीय आतंकवादी ने महिला पत्रकारों को निशाना बनाया होगा। वहीं, अफगानिस्तान पुलिस ने कारी बसीर नाम के एक आतंकवादी को हिरासत में सिया है जो तालिबान का आतंकी है। आतंकी कारी बसीर के पास से कई गोलियां और बंदूक बरामद किए गये हैं।
इससे पहले भी अफगानिस्तान में मीडियाकर्मियों को आतंकी निशाना बनाते रहे हैं। एनिकास टीवी के ही एक और पत्रकार की मलालाई मैवाड़ को 10 दिसंबर 2020 को उनके ड्राइवर के साथ गोलीमारकर हत्या कर दी गई थी। मलाला अफगानिस्तान की एक महिला एक्टिविस्ट भी थीं।
पूरी दुनिया में हत्याकांड की निंदा
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने तीन महिला मीडियाकर्मियों की हत्या की निंदा की है और उन्होंने इस हमले को आतंकी हमला कहा है। राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा कि इस्लाम किसी पर हमला करने की इजाजत नहीं देता है खासकर किसी महिला पर तो बिल्कुल नहीं। ये आतंकी वारदात सिर्फ इस्लाम ही नहीं बल्कि अफगानिस्तान कल्चर के भी खिलाफ है। राष्ट्रपति ने कहा है कि ऐसे हमले अफगानिस्तान की शांति पर हमले हैं और अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकी दहशत का माहौल कायम कर रहे हैं। वहीं, अफगानिस्तान स्थिति अमेरिकी दूतावास ने ट्वीट कर महिला मीडियाकर्मियों की हत्या की निंदा की है। ट्वीट में कहा गया है कि अफगानिस्तान की तीन महिला पत्रकारों की गोली मारकर हत्या कर देना सनसनीखेज है जिसने पूरे देश में भय का माहौल बना दिया है। वहीं यूरोपीय यूनियन ने भी अफगानिस्तान में तीन महिला पत्रकारों की हत्या की निंदा की है। यूरोपीय यूनियन ने इस हत्याकांड को खौफनाक करार दिया है।












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