UNGA में तालिबान के लिए इमरान खान ने की खुलकर बैटिंग, शांति के लिए आतंकियों का समर्थन करने की मांग

इमरान खान ने कहा कि अगर वैश्विक समुदाय ने तालिबान का समर्थन नहीं किया, तो फिर पूरी दुनिया में आतंकवाद बढ़ेगा।

न्यूयॉर्क, सितंबर 25: संयुक्त राष्ट्र महासभा एक ऐसा वैश्विक मंच है, जहां से कोई देश ये बताता है कि उसने वैश्व की भलाई के लिए क्या काम किए हैं। अपनी उपलब्धियां गिनाता है और वैश्विक समस्याओं को कैसे हल किया जाए, इसके उपाय बताता है। लेकिन, पाकिस्तान एक ऐसा अभागा देश है, जिसके नेता इस वैश्विक प्लेटफॉर्म पर पाकिस्तान की बात नहीं करते हैं, बल्कि कभी आतंकियों की बात करते रहते हैं तो कभी अपनी कट्टरपंथी सोच को आगे बढ़ाते रहते हैं।

तालिबान के लिए ऑलराउंडर बने इमरान

तालिबान के लिए ऑलराउंडर बने इमरान

इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं, लेकिन आपको जानकर ताज्जुब होगा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में वो सिर्फ भारत, अमेरिका, तालिबान, इस्लामोफोबिया पर बोलते रहे और उन्होंने एक शब्द भी पाकिस्तान के बारे में बात नहीं की। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र को संबोधित करते हुए, पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान ने "अफगानिस्तान के लोगों की खातिर" अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को मजबूत और स्थिर करने के लिए वैश्विक समुदाय का आह्वान किया।

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    ''तालिबान को मजबूत करे दुनिया''

    ''तालिबान को मजबूत करे दुनिया''

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर पूरी दुनिया से तालिबान को मजबूत करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि, "एक ही रास्ता है। हमें अफगानिस्तान में मौजूदा सरकार को मजबूत और स्थिर करना चाहिए।" इमरान खान ने कहा कि जब तालिबान शासित अफगानिस्तान की बात आती है तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए दो रास्ते उपलब्ध हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि या तो दुनिया उसकी 'उपेक्षा' कर सकती है या अपनी वर्तमान सरकार को 'स्थिर' कर सकती है।

    ''अफगानिस्तान में मानवीय संकट''

    इमरान खान ने कहा कि, "अगर हम अभी अफगानिस्तान की उपेक्षा करते हैं, तो संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, अफगानिस्तान के आधे लोग पहले से ही कमजोर हैं और अगले साल तक अफगानिस्तान में लगभग 90 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे चले जाएंगे। आगे एक बड़ा मानवीय संकट मंडरा रहा है। और इसका न केवल अफगानिस्तान के पड़ोसियों के लिए बल्कि हर जगह गंभीर असर होगा"। पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान ने कहा कि एक अस्थिर और अराजक अफगानिस्तान में एक बार फिर "अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह" बनने की क्षमता है। इसे रोकने के लिए ही अमेरिका अफगानिस्तान आया था''। इससे पहले, न्यूजवीक के साथ एक इंटरव्यू में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि तालिबान संयुक्त राज्य अमेरिका और पाकिस्तान दोनों के लिए शांति में पार्टनर हो सकता है। उन्होंने तालिबान के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के सख्त रुख को 'अनावश्यक' करार दिया।

    'तालिबान को बात करने के लिए प्रोत्साहित करें'

    'तालिबान को बात करने के लिए प्रोत्साहित करें'

    पाकिस्तान के पीएम इमरान खान के अनुसार, वैश्विक समुदाय को तालिबान को प्रोत्साहित करना चाहिए और उन्हें मानवाधिकारों का सम्मान करने, एक समावेशी सरकार बनाने और अपनी धरती को आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल होने से रोकने की बात पर चलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि, "अगर विश्व समुदाय उन्हें प्रोत्साहित करता है और उन्हें इस बात पर चलने के लिए प्रोत्साहित करता है, तो यह सभी के लिए एक जीत की स्थिति होगी।" उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में गठबंधन बलों ने जो 20 साल बिताए हैं, वे शून्य नहीं होंगे क्योंकि अफगान धरती का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों द्वारा नहीं किया जाएगा।

    'समय बर्बाद नहीं कर सकते'

    'समय बर्बाद नहीं कर सकते'

    पाकिस्तान के नेता ने विश्व समुदाय से तालिबान को समर्थन देने के लिए तेजी से काम करने की अपील की और इसके लिए उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि, अफगानिस्तान वर्तमान में एक "गंभीर" मोड़ पर है। इमरान खान ने कहा, "आप समय बर्बाद नहीं कर सकते। वहां मदद की जरूरत है। वहां तुरंत मानवीय सहायता दी जानी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने साहसिक कदम उठाए हैं। मैं आपसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को लामबंद करने और इस दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह करता हूं।"

    ''अफगानिस्तान संकट में पाकिस्तान की भूमिका''

    ''अफगानिस्तान संकट में पाकिस्तान की भूमिका''

    पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने अपने संबोधन में कहा कि अफगानिस्तान में मौजूदा स्थिति के लिए अमेरिकी और यूरोप के कई नेता पाकिस्तान को दोषी ठहराते हैं, जो सही नहीं है। उन्होंने कहा कि, "इस मंच से मैं चाहता हूं कि उन सभी को पता चले कि अफगानिस्तान के अलावा जिस देश को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, वह पाकिस्तान था, जब हम 9/11 के बाद आतंकवाद के खिलाफ अमेरिकी युद्ध में शामिल हुए थे।" उन्होंने कहा कि 1989 में सोवियत संघ और अमेरिकियों के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद पाकिस्तान को टुकड़ों में छोड़ दिया गया था।

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