पाकिस्तान की 70% जनता करती है मोहब्बत... इमरान खान के सर्वे में भी गोलमाल, जानें तख्ती पर लिखे दावे की सच्चाई
इमरान खान बार बार सर्वे का हवाला देकर कह रहे हैं, कि उन्हें 70 प्रतिशत जनता पसंद कर रही है, जबकि नवाज शरीफ, शहबाज शरीफ और मरियम नवाज को सिर्फ 18 प्रतिशत ही पसंद करते हैं।

Imran Khan Survey News: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अब राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। इमरान खान की पार्टी पर आर्मी क्रैकडाउन कर रही है, जिससे कई नेता, इमरान की पार्टी को डूबता जहाज मानकर उसे छोड़ रहे हैं।
इस बीच इमरान ने दावा किया है, कि पाकिस्तान आर्मी और शहबाज शरीफ की सरकार, उनके खिलाफ अभियान सिर्फ इसलिए चला रही है, क्योंकि पंजाब की 70 फीसदी जनता उन्हें पसंद करती है और अगर आज चुनाव होते हैं, तो फिर से पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की सरकार बन जाएगी।
ऐसे में सवाल ये उठता है, कि इमरान खान के दावे में कितनी सच्चाई है?
इस सवाल का जवाब तलाशें, उससे पहले इमरान खान और जनरल परवेज मुशर्रफ के बीच का एक वाकया जान लेते हैं। जनरल परवेज मुशर्रफ ने जब पाकिस्तान में चुनाव कराने का ऐलान किया, तो इमरान खान उनके पास अपनी पार्टी के गठबंधन के लिए पहुंच गये थे।
इमरान खान ने जनरल मुशर्रफ से गठबंधन करने के लिए 100 सीटें मांगी थी, जिसके बाद मुशर्रफ ने उन्हें अपनी पार्टी दफ्तर से यह कहकर भगा दिया था, कि इमरान खान की औकात पाकिस्तान में 10 सीट जीतने की भी नहीं है।
बाद में मुशर्रफ ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था, कि उन्हें ऐसा लगा था, कि इमरान खान ज्यादा से ज्यादा 20 सीटें मांगेंगे, जिसके लिए वो तैयार भी हो जाते हैं, लेकिन उन्होंने औकात से बढ़कर 100 सीटें मांग ली।
चुनावी परिमाण में इमरान खान की पार्टी को 10 से भी कम सीटें मिली थीं।
लिहाजा, इमरान खान के बारे में हमेशा से कहा जाता रहा है, कि वो बढ़ा-चढ़ाकर अपनी बातें करते हैं। खासकर सोशल मीडिया के इस्तेमाल में वो माहिर माने जाते हैं।
इमरान खान का दावा कितना सही?
इमरान खान एक दिन पहले एक बैनर लेकर कैमरे के सामने आए और दावा किया, कि उनकी पार्टी को 70 फीसदी जनता पसंद करती है और पंजाब प्रांत में भी उनकी लोकप्रियता जबरदस्त बढ़ी है, जिससे शहबाज शरीफ घबराए हुए हैं।
जियो न्यूज की फैक्ट चेक से पता चलता है, कि इमरान खान का ये दावा संदिग्ध और संदेहास्पद डेटा पर आधारित हो सकता है।
इमरान खान ने अलजजीरा को दिए गये एक इंटरव्यू में भी अपने दावे को दोहराया।
जियो न्यूज के मुताबिक, इमरान खान जिस सर्वे का हवाला दे रहे हैं, वह इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक द्वारा आयोजित किया गया था, जिसे रिपब्लिक पॉलिसी के नाम से जाना जाता है।
थिंक टैंक की वेबसाइट के अनुसार, पंजाब में 10 से 15 मई के बीच सर्वे किया गया था और इसके आंकड़ों में पाया गया है, कि 70% जवाब देने वाले लोगों ने इमरान खान के पक्ष में अपनी राय रखी।
जबकि, इमरान खान के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों, नवाज शरीफ, शहबाज शरीफ और मरियम नवाज की संयुक्त लोकप्रियता सिर्फ 18% थी।
हालांकि, इस थिंक टैंक ने अपनी वेबसाइट पर इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी है, कि ये सर्वेक्षण किस पद्धति से किया गया है, सर्वेक्षण करने के लिए किस तरह से और कितने लोगों के सैंपल लिए गये हैं। उनसे सवाल क्या पूछे गये, किन क्षेत्रों में सर्वे किए गये, या फिर सर्वे ग्रामीण इलाकों में किए गये या फिर शहरी इलाकों में?
थिंक टैंक के वेब पोर्टल पर इस तरह की कोई जानकारी नहीं दी गई है। लिहाजा, ये सर्वे संदिग्ध माना जा रहा है।
हालांकि, रिपब्लिक पॉलिसी के प्रमुखों में से एक ताहिर मकसूद चीना ने जियो फैक्ट चेक को फोन पर बताया, कि 10-15 छात्र, जिन्होंने वॉलंटियर के तौर पर काम किया, उन्होंने सर्वे पूरा करने में उनकी मदद की है।
उन्होंने आगे कहा, कि 'मैंने खुद भी लोगों को कॉल किया, जिन लोगों को मैं जानता था, साथ ही फील्ड में टीमें भेजीं'।
सर्वे का सैंपल साइज और भी चौंकाने वाला है।
रिपब्लिक पॉलिसी के सर्वे पर शक क्यों?
ताहिर मकसूद चीना ने जियो न्यूज को टेलीफोन पर बताया, कि थिंक टैंक ने पंजाब प्रांत के प्रत्येक संघ परिषद में 25 लोगों से बात की है। पंजाब में 4,015 से ज्यादा संघ परिषद हैं, जिसका मतलब ये हुए, कि सर्वे एजेंसी ने सिर्फ पांच दिनों में आश्चर्यजनक रूप से 100,375 लोगों से इमरान खान की लोकप्रियता पर बात कर लिया? ये दावा काफी संदिग्ध मालूम होता है।
वहीं, जब नमूने को लेकर ताहिर मकसूद चीना से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने सैंपल साइज बताने से इनकार कर दिया और कहा कि आंकड़ा 90 हजार या एक लाख हो सकता है। उन्होंने वास्तविक आंकड़ा बताने से मना कर दिया, जिससे सर्वे की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं और ऐसा लगता है, कि ये सर्वे किसी प्रोपेगेंडा का हिस्सा हो सकता है!
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वहीं, यह पूछे जाने पर, कि क्या उनकी टीम ने वैज्ञानिक रूप से लोगों की पहचान की, उनकी आय और पेशे के आधार पर ये सर्वे किया है, तो उन्होंने कहा, कि "हमने ऐसा कुछ नहीं किया। आपको यह कहने का अधिकार है, कि हमने इसे [सर्वेक्षण] ठीक से नहीं किया। अगली बार हम इसे ध्यान में रखेंगे।"
आपको बता दें, कि रिपब्लिक पॉलिसी ने मार्च में भी इसी तरह का एक सर्वेक्षण किया था, जहां इसने फिर से पंजाब में इमरान खान की सरकार बनने का दावा किया था और इमरान खान की लोकप्रियता 62% बताया था।












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