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इमरान की शांति की गुहार, बोले- भारत को मिलेगी मध्य एशिया तक सीधी पहुंच, जानिए इसे क्षेत्र की खासियत

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान एक तरफ तो भारत में अस्थिरता लाने के लिए सीमा पार से आतंकियों को भेजने समेत सारे जतन करता रहता है वहीं दूसरी तरफ उसके नेता शांति को लेकर बड़बोले दावे भी करते रहते हैं। अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ऐसा ही बड़बोला दावा किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर शांति स्थापित हो जाए तो भारत की सीधे संसाधन संपन्न मध्य एशिया तक पहुंच हो जाएगी।

भारत ने पहले ही सुनाई है खरी-खरी

भारत ने पहले ही सुनाई है खरी-खरी

राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित दो दिवसीय इस्लामाबाद सिक्योरिटी डॉयलॉग के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए इमरान खान ने कहा है कि 2018 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से वह लगातार भारत के साथ शांति स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन भारत सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है।

इमरान खान ने कहा कि भारत को पहला कदम उठाना होगा। जब तक वे ऐसा नहीं करते हम बहुत कुछ नहीं कर सकते।

भारत ने पिछले महीने ही ये कहा था कि भारत पाकिस्तान के साथ आतंक, शत्रुता और हिंसा मुक्त माहौल में एक सामान्य पड़ोसी की तरह पाकिस्तान के साथ रिश्ते रखना चाहता है। भारत ने ये भी कहा था कि इस तरह का वातावरण बनाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान पर है। भारत का ये बयान तब आया था जब इमरान खान ने अपने श्रीलंका दौरे पर भारत के साथ रिश्तों को लेकर बयान दिया था।

इस्लामाबाद सिक्योरिटी डॉयलॉग में राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में पाकिस्तान के नजरिए के बारे में बोल रहे थे। उन्होंने कश्मीर के मुद्दे को भारत और पाकिस्तान के बीच शांति में सबसे बड़ी बताया।

क्या है मध्य एशिया की खासियत ?

क्या है मध्य एशिया की खासियत ?

इमरान खान ने कहा अगर भारत संयुक्त राष्ट्र के तहत (प्रस्ताव) के तहत कश्मीरियों को उनके अधिकार देता है तो यह पाकिस्तान के साथ ही भारत के लिए भी बहुत फायदेमंद होगा।

उन्होंने कहा कि मध्य एशिया के लिए सीधा रास्ता मिलने से भारत को आर्थिक रूप से बहुत फायदा होगा।

आधुनिक विश्व के संदर्भों में सामान्य तौर पर मध्य एशिया को खनिज सम्पदा से भरपूर पांच देशों कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उजबेकिस्तान के रूप में जाना जाता है। यह क्षेत्र प्राकृतिक तेल और गैस के भंडारों से समृद्ध है।

इमरान खान के बयान का अगर मतलब निकाला जाए तो यही होगा कि अगर शांति स्थापित होती है तो पाकिस्तान इस क्षेत्र से पाइपलाइन के माध्यम से गैस या तेल लाने पर सहमति दे सकता है। हालांकि इसके पहले ईरान से पाइपलाइन से तेल लाने की योजना पाकिस्तान की वजह से खटाई में पड़ चुकी है।

पाकिस्तान की तिलमिलाहट

पाकिस्तान की तिलमिलाहट

दरअसल अगस्त 2019 में भारत ने जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा वापस करने के साथ ही इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था। पाकिस्तान तब से ही तिलमिलाया हुआ है और भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहा है लेकिन दूर की बात तो क्या उसे मुस्लिम देशों जैसे सऊदी अरब और यूएई जैसे उसके पुराने सहयोगिगों का भी समर्थन नहीं मिल रहा है।

यही वजह है कि खिसियाया पाकिस्तान पर अब शांति की झूठी अपील कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचना चाहता है। जबकि खुद वह आतंकियों को संरक्षण देने के चलते एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं निकल पा रहा है।

भारत ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट रूप से कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करना उसका आंतरिक मामला था। विदेश मंत्रालय का स्पष्ट कहना है कि जम्मू और कश्मीर का केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है।

भारत और पाकिस्तान ने 25 फरवरी को घोषणा की थी कि वे जम्मू-कश्मीर और अन्य क्षेत्रों में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर संघर्ष विराम पर सभी समझौतों का सख्ती से पालन करने के लिए सहमत हुए हैं।

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English summary
imran khan says india get direct access to central asia with peace
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