पाकिस्तान में शाहबाज सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए फिर से इमरान ने कसी कमर, विरोध प्रदर्शन शुरू
चौधरी ने चुनावों को "एकमात्र रास्ता" कहा और जोर देकर कहा कि पाकिस्तान में एक टेक्नोक्रेट सरकार लाने का विचार "बर्दाश्त नहीं किया जाएगा"।

Image: ANI
इमरान खान एक बार फिर से पाकिस्तान सरकार के खिलाफ मुश्किल खड़ी करने की कोशिशों में जुट गए हैं। पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। इसका फायदा उठाते हुए विपक्षी इमरान खान एक बार फिर से पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई और डूबती अर्थव्यवस्था के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है।
अभी प्रदर्शन से नहीं जुड़ेंगे इमरान
पीटीआई के नेता फवाद चौधरी ने कहा कि उनकी पार्टी शुक्रवार से सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरेगी। हालांकि पीटीआई प्रमुख इमरान खान अभी प्रदर्शन से नहीं जुड़ेगे। इस दौरान फवाद चौधरी ने इमरान का हेल्थ अपडेट भी दिया है। पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन ने गुरुवार को फवाद चौधरी के हवाले से कहा, "शुक्रवार से, मुद्रास्फीति और डूबती अर्थव्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा और यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि मौजूदा सरकार को हटा नहीं दिया जाता।"
फवाद चौधरी ने बताई योजना
डॉन की खबर के मुताबिक, फवाद चौधरी ने घोषणा की कि विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व नेशनल असेंबली के पीटीआई सदस्य निर्वाचन क्षेत्रों में करेंगे और कहा कि आंदोलन हर शहर में जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि इमरान खान तीन सप्ताह के बाद अगली कार्ययोजना के बारे में घोषणा करेंगे। उन्होंने कहा कि इमरान खान ने पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों के साथ बैठक कर यह फैसला किया है।
हर शहर में होगा आंदोलन
डॉन ने फवाद चौधरी के हवाले से कहा, "इन विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व पीटीआई एमएनए अपने निर्वाचन क्षेत्रों में करेंगे।" उन्होंने कहा कि आंदोलन हर शहर में जारी रहेगा। चौधरी ने कहा, "तीन सप्ताह के बाद, इमरान खान अगली कार्ययोजना की घोषणा करेंगे।" इसके अलावा, फवाद चौधरी ने यह भी घोषणा की कि हिरासत में लिए गए पार्टी सीनेटर आजम स्वाती की रिहाई के लिए "भारी विरोध" आयोजित किया जाएगा, जो वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के खिलाफ विवादास्पद ट्वीट्स में हिरासत में हैं।
चुनाव को बताया एकमात्र रास्ता
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, चौधरी ने चुनावों को "एकमात्र रास्ता" कहा और जोर देकर कहा कि पाकिस्तान में एक टेक्नोक्रेट सरकार लाने का विचार "बर्दाश्त नहीं किया जाएगा"। चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान में "कुछ तबके" मध्यावधि चुनाव के खिलाफ थे और उन्होंने इस प्रयोग के लिए सत्ता प्रतिष्ठान को जिम्मेदार ठहराया। डॉन ने फवाद चौधरी के हवाले से कहा, "यदि आप संविधान को देखते हैं, तो चुनाव ही एकमात्र रास्ता है। जनता एक तकनीकी सरकार को स्वीकार नहीं करेगी। वे केवल आम चुनाव को स्वीकार करेंगे।"
बताचीत से हल का रास्ता निकले
समाचार रिपोर्ट के अनुसार, फवाद चौधरी ने जोर देकर कहा कि मुद्दों को बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए और बम और मिसाइल कोई समाधान नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार ने पूर्व प्रशासित कबायली क्षेत्र के खैबर पख्तूनख्वा में विलय के बाद कबायली जिलों के विकास पर पैसा खर्च करना बंद कर दिया।












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