अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग नहीं, नेशनल असेंबली भंग, क्या कहते हैं पाकिस्तान के संविधान-लीगल एक्पर्ट्स?
पाकिस्तान के वरिष्ठ वकील अब्दुल मोइज़ जाफ़रिक ने कहा कि, ‘झूठ को बड़ा बनाओ, उसे सरल बनाओ, झूठ बार बार कहते रहो और अंतत: आप संविधान को फाड़ सकते हैं।‘
इस्लामाबाद, अप्रैल 02: पाकिस्तान नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर कासिम शाह सूरी ने रविवार को प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव को संविधान के अनुच्छेद 5 का उल्लंघन बताते हुए खारिज कर दिया। यह फैसला सूचना मंत्री फवाद चौधरी द्वारा उठाए गए एक सवाल के जवाब में आया, जिन्होंने सत्र शुरू होने के तुरंत बाद मंच संभाला और कहा, कि राज्य के प्रति वफादारी संविधान के अनुच्छेद 5 के तहत प्रत्येक नागरिक का मूल कर्तव्य है। उन्होंने प्रधानमंत्री के पहले के दावों को दोहराया कि, इस कदम के पीछे सरकार को हटाने की एक विदेशी साजिश थी। इमरान सरकार के इस फैसले पर पाकिस्तान के संविधान विशेषज्ञ और लीगल एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं, आइये जानते हैं।

पाकिस्तान नेशनल असेंबली भंग
पाकिस्तान के कैबिनेट मंत्री फवाद चौधरी ने नेशनल असेंबली में डिप्टी स्पीकर से पूछा, कि इसकी (अविश्वास प्रस्ताव) अनुमति कैसे दी जा सकती है और अविश्वास प्रस्ताव की संवैधानिकता तय करने के लिए डिप्टी स्पीकर से जांच की मांग की। जिसपर डिप्टी स्पीकर सूरी ने कहा कि, प्रस्ताव 8 मार्च को पेश किया गया था और यह कानून और संविधान के अनुसार होना चाहिए। उन्होंने कहा, "किसी भी विदेशी शक्ति को साजिश के जरिए चुनी हुई सरकार को गिराने की इजाजत नहीं दी जाएगी।" उन्होंने कहा कि मंत्री द्वारा उठाए गए बिंदु "वैध" थे। इसके बाद, उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया। डप्टी स्पीकर ने कहा कि, यह कानून, संविधान और नियमों के लिए "विरोधाभासी" है और फिर उन्होंने नेशनल असेंबली के सत्र को स्थगित कर दिया।

क्या कहते हैं पाकिस्तान के लीगल एक्सपर्ट्स?
पाकिस्तान के वरिष्ठ वकील अब्दुल मोइज़ जाफ़रिक ने कहा कि, 'झूठ को बड़ा बनाओ, उसे सरल बनाओ, झूठ बार बार कहते रहो और अंतत: आप संविधान को फाड़ सकते हैं।' उन्होंने कहा कि, डिप्टी स्पीकर ने आज जो किया वह केवल एक संवैधानिक अनुच्छेद का बेतुका दुरुपयोग नहीं है, बल्कि यह पीटीआई के सदस्यों द्वारा समान रूप से गलत तरीके से लागू करने और सार्वजनिक रूप से संविधान की गलत व्याख्या करने और अपने स्वयं के डिजाइनों के लिए संविधान को गलत तरीके से प्रस्तुत करने के कई प्रयासों की परिणति है। उन्होंने कहा कि, जैसे-जैसे राजनीतिक स्थिति बदली है, वैसे ही संबंधित अनुच्छेद पर भी सरकार द्वारा हमला किया जा रहा है।

स्पीकर को संविधान की व्याख्या का अधिकार नहीं
वकील अब्दुल मोइज़ जाफ़रिक ने कहा कि, स्पीकर के पास इस तरह से संविधान की व्याख्या करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि, डिप्टी स्पीकर ने राज्य के प्रति निष्ठा के लिए अपने आचरण को नियंत्रित करने वाले विशिष्ट अनुच्छेदों और अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया का घातक रूप से उल्लंघन किया है। उन्होने कहा कि, स्पीकर ने पहले समय-सीमा का उल्लंघन किया और अब संविधान की अनिवार्य प्रक्रिया की अवहेलना की है। उन्होंने कहा कि, बगैर अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हुए और बगैर प्रधानमंत्री द्वारा संसद में बहुमत हासिल किए, राष्ट्रपति से नेशनल असेंबली को भंग करने के लिए नहीं कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि, 'यह कुछ ऐसा है, जैसे कोई भेड़िया, भेड़ का खाल पहन ले और कोई शैतान अपनी बचाव में शास्त्र का हवाला दे।'

सलमान अकरम रजा
पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट सलमान अकरम राजा ने कहा कि विपक्ष के पास अब सुप्रीम कोर्ट जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि, "मेरे विचार में, यह एक संवैधानिक कदम के जवाब में स्पीकर द्वारा दिया गया एक असंवैधानिक निर्णय है।" उन्होंने कहा कि, एक सरकारी बयान अचानक सामने आया जिसमें उसने अविश्वास प्रस्ताव को अवैध करार दिया और बाद में सत्र को स्थगित कर दिया। यह संविधान का उल्लंघन है और यह सवाल बना हुआ है कि क्या अदालत इस मुद्दे को उठाएगी। हालांकि, संविधान का अनुच्छेद 69 कहता है कि नेशनल असेंबली या सीनेट के किसी भी कार्य में शीर्ष अदालत द्वारा हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।"
मिर्जा मोइज़ बेगी
पाकिस्तान के एक और वरिष्ठ एडवोकेट मिर्जा मोइज़ बेगी ने ट्वीट करते हुए कहा कि, 'अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करने का अध्यक्ष का फैसला उन सभी मूल्यों के प्रतिकूल है जो हमारी संवैधानिक व्यवस्था का आधार हैं। अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करने के लिए अनुच्छेद 5 को लागू करना अभूतपूर्व है, और इसका कोई कानूनी आधार नहीं है। यह एक खतरनाक मिसाल भी कायम करता है, जिसके तहत कोई भी सरकार उक्त प्रस्ताव लाने वालों पर झूठे आरोप लगाकर उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर सकती है।'

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन
मिर्जा मोइज़ बेगी ने कहा कि, यह सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी उल्लंघन है, जिसने सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था, कि लोगों को मतदान करने से रोका न जाए। जबकि कुछ लोग तर्क दे सकते हैं कि, सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 66 के मद्देनजर हस्तक्षेप नहीं कर सकता है, लेकिन, यह पूरी तरह सही नहीं है और अदालत की जिम्मेदारी है, कि जहां पर सरकार संविधान का उल्लंघन करे, वहां पर सुप्रीम कोर्ट दखल दे सकता है, क्योंकि लोकतांत्रित व्यवस्था और देश के गणतंत्र की रक्षा की जिम्मेदारी संविधान में सुप्रीम कोर्ट को दी गई है और यहां पर डिप्टी स्पीकर ने संविधान का उल्लंघन किया है और ये देश के लिए खतरनाक है, लिहाजा सुप्रीम कोर्ट के पास हस्तक्षेप का पूरा अधिकार है।
असद रहीम खान
वरिष्ठ एडवोकेट असद रहीम खान ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि "एक बार फिर, संसद के भाग्य का फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा किया जाएगा"। जबकि, रीमा ओमेर ने कहा कि, डिप्टी स्पीकर का फैसला स्पष्ट रूप से असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि, इमरान खान के पास राष्ट्रपति को नेशनल असेंबली को भंग करने की सलाह देने का कोई अधिकार नहीं है। किसी ऐसे व्यक्ति की सलाह पर विधानसभा भंग करना जिसके पास ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है, उसका कोई संवैधानिक आधार नहीं है।
देश के लिए काला दिन
वहीं, पाकिस्तान की प्रसिद्ध स्तंभकार शमा जुनेजो ने कहा कि फवाद चौधरी ने संविधान की "गलत व्याख्या" की है। उन्होंने कहा कि, संविधान के उल्लंघन के लिए प्रधानमंत्री और स्पीकर पर "उच्च राजद्रोह का आरोप" लगाया जाना चाहिए। वहीं, पत्रकार फहद हुसैन ने अफसोस जताया कि यह एक "रणनीतिक संकट था जिसने हमारे संवैधानिक ढांचे को दांव पर लगा दिया है"। वहीं, पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक मजहर अब्बास ने प्रधान मंत्री इमरान खान को "पीछे मुड़कर देखने और अपनी गलती स्वीकार करने" की सलाह दी है। वहीं, पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार ने कुछ दिन पहले पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल का इंटरव्यू लिया था, जिसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा था, कि अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग नहीं होना संविधान का उल्लंघन है। वहीं, जब डिप्टी स्पीकर ने अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया, तो पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।












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