Pakistan: डिफॉल्ट होने से बच गया पाकिस्तान, IMF के साथ आखिरी दिन हुआ समझौता, आज खत्म हो रही थी मियाद
Pakistan IMF News: पाकिस्तान और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बीच स्टाफ लेवल समझौता हो गया है और ये पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ी राहत की बात है। जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान और आईएमएफ 3 अरब डॉलर की "स्टैंड-बाय व्यवस्था" पर कर्मचारी-स्तरीय समझौते (एसएलए) पर पहुंच गए हैं।
पाकिस्तान के लिए ये राहत की बात इसलिए है, क्योंकि आईएमएफ प्रोग्राम आज, यानि 30 जून को ही खत्म हो रहा था और अगर 30 जून तक समझौता नहीं होता, तो 2019 में लागू हुआ ये प्रोग्राम खत्म हो जाता और पाकिस्तान को आईएमएफ के नये प्रोग्राम में जाने के लिए नये सिरे से समझौते करने पड़चे और ये काफी मुश्किल होता।

IMF-पाकिस्तान में समझौता
जियो न्यूज के मुताबिक, पाकिस्तान में आईएमएफ के मिशन प्रमुख नाथन पोर्टर ने एक बयान में कहा, कि "मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है, कि आईएमएफ की टीम पाकिस्तान के साथ स्टाफ लेवल एग्रीमेंट तक पहुंच गई है, जो 9 महीनों के स्टैंड बाय एरेंजमेंट (SBA) के तहत होगा। इसके तहत पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर यानि, आईएमएफ के पाकिस्तानी कोटे का 111 प्रतिशत मिलेगा।"
पाकिस्तान के लिए ये बहुत बड़ी राहत है, क्योंकि उसे बाहरी ऋण चुकाने के लिए आईएमएफ के लोन की सख्त आवश्यकता थी। आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच 6.5 अरब डॉलर के लिए डील 2019 में की गई थी और उसी ऋण के एक किश्त 1.1 अरब डॉलर हासिल करने के लिए पाकिस्तान लगातार संघर्ष कर रहा था। 2019 में हुई ये डील 30 जून को खत्म हो रही थी और आखिरी दिन आखिरकार आईएमएफ, पाकिस्तान को ऋण देने के लिए तैयार हो गया।
फिलहाल जो जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक आईएमएफ ने 6.5 अरब डॉलर में से जितना पेंडिंग कर्ज था, उसमें से 3 अरब डॉलर जारी कर दिया है। किश्त के मुताबिक हालांकि पाकिस्तान को 1.1 अरब डॉलर ही मिलने थे, लेकिन आईएमएफ के साथ 3 अरब डॉलर जारी करने को लेकर समझौता हो गया है।
आईएमएफ ने अपने बयान में कहा है, कि "नया एसबीए पाकिस्तान के 2019 ईएफएफ-समर्थित कार्यक्रम के तहत अधिकारियों के प्रयासों पर आधारित है, जो जून के अंत में समाप्त हो रहा है। यह समझौता आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड द्वारा अनुमोदन के अधीन है, जिसके जुलाई के मध्य तक इस अनुरोध पर विचार करने की उम्मीद है।"
पाकिस्तान के वित्तमंत्री इशाक डर ने एक दिन पहले कहा था, कि आईएमएफ के साथ बेलऑउट पैकेज पर अगले 24 घंटे के अंदर समझौता हो जाएगा। डार ने गुरुवार देर रात रॉयटर्स को बताया, "हम आईएमएफ के साथ कर्मचारी स्तर के समझौते पर हस्ताक्षर करने के बहुत करीब हैं।"
पाकिस्तान को कितनी बड़ी राहत
IMF के साथ हुआ ये समझौता पाकिस्तान के लिए बड़ी राहत है, हालांकि ये राहत कुछ ही महीनों के लिए है। फिलहाल के लिए पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर्स आ गये हैं।
आज जारी बयान में, आईएमएफ ने कहा है, कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को 2022 में विनाशकारी बाढ़ और यूक्रेन युद्ध जैसे कई झटकों का सामना करना पड़ा है, जिसने लाखों पाकिस्तानियों के जीवन को प्रभावित किया है और पाकिस्तान में महंगाई काफी बढ़ गई है।
इसके अलावा, पाकिस्तान सरकार के कुछ नीतिगत कदमों ने भी विदेशी मुद्रा भंडार को नुकसान पहुंचाया है। देश का आर्थिक विकास रूक गया है और आवश्यक वस्तुओं की कीमत काफी ज्यादा बढ़ गई है। आयात और व्यापार घाटे को कम करने के अधिकारियों के प्रयासों के बावजूद, विदेशी मुद्रा भंडार बहुत निचले स्तर तक गिर गया है।
Stand-by Arrangement क्या है?
आपको बता दें, कि पाकिस्तान और आईएमएफ Stand-by Arrangement के तहत इस समझौते पर पहुंचे हैं।
स्टैंड-बाय अरेंजमेंट (एसबीए) भुगतान संतुलन की समस्याओं का सामना करने वाले देशों को अल्पकालिक वित्तीय सहायता प्रदान करता है। जैसे पाकिस्तान को फौरन विदेशी कर्ज का भुगतान करना था और अगर वो नहीं कर पाता, तो फिर वो डिफॉल्ट हो जाता।
लिहाजा, पाकिस्तान ने आखिरी हफ्ते में स्टैंड-बाय अरेंजमेंट के तहत आईएमएफ से ऋण मांगा था।
पिछले कुछ वर्षों में एसबीए का चलन काफी बढ़ा है और आईएमएफ ने भी इसका इस्तेमाल संकट में फंसे देशों को अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर ज्यादा से ज्यादा उत्तरदायी और जवाबदेह बनाने के लिए किया है, ताकि वो आर्थिक संकट से बाहर निकल सकें।
इस एग्रीमेंट के तहत अब पाकिस्तान को कर्ज देने वाले देशों तक जल्द पहुंचना होगा और कर्ज हासिल करना होगा, ताकि वो अपने विदेशी ऋणों का भुगतान कर सके। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और चीन, पहले ही आईएमएफ को लिखकर दे चुके हैं, कि वो पाकिस्तान को कर्ज दे देंगे। लिहाजा, अब पाकिस्तान को इन देशों से कर्ज हासिल करना होगा।
एसबीए कर्ज भुगतान सामान्यत: 12 से 24 महीनों के लिए होता है और ये अधिकतम 36 महीनों तक के लिए ही हो सकता है।












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