समयसीमा खत्म: पाकिस्तान छोड़ भाग रहे अफगानिस्तान के लोग, अब तक कितने लोगों ने छोड़ा देश?

आज 31 अक्टूबर है। पाकिस्तान सरकार ने अफगानी लोगों देश छोड़ने का जो वक्त दिया था, वो आज खत्म हो रहा है। ऐसे में आज 1 नवंबर की समय सीमा समाप्त होने के कारण हजारों अवैध अप्रवासी गिरफ्तारी या निर्वासन से बचने के लिए पाकिस्तान छोड़ने के लिए भागते नजर आए।

इस महीने की शुरुआत में, आंतरिक मंत्रालय ने अवैध अप्रवासियों को 1 नवंबर तक स्वेच्छा से पाकिस्तान छोड़ने के लिए कहा था या निर्वासन का सामना करने को कहा था। पाकिस्तान का कहना है, कि देश में करीब 17 लाख अफगान शरणार्थी अवैध ढंग से रहते हैं और पाकिस्तान में होने वाले आतंकी हमलों के लिए वो जिम्मेदार हैं।

illegal foreigners leave Pakistan

Image: X- @Anees01738677

पाकिस्तान ने कहा है, कि जो अफगान 31 अक्टूबर से पहले देश नहीं छोड़ेगा, उनकी एक नवंबर से गिरफ्तारी शुरू कर दी जाएगी और उनकी संपत्ति को जब्त कर लिया जाएगा। इस डर से अफगान निवासी तोरखम सीमा पार करके अफगानिस्तान लौटते देखे गए।

अफगान शरणार्थियों के लिए आयुक्तालय के सूत्रों के अनुसार 1 से 28 अक्टूबर तक 4,672 परिवार, जिनमें 67,604 लोग शामिल थे, अफगानिस्तान लौट गए हैं। हालांकि पाकिस्तान में रहने वाले 17 लाख अफगानियों की तुलना में ये आंकड़े बेहद कम हैं।

आखिरी 2 दिन लोगों के पाकिस्तान छोड़ने में काफी ईजाफा देखा गया है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि काफी संख्या में अफगानी लोगों ने पाकिस्तान छोड़ दिया है।

पंजाब के आईजी उस्मान अनवर ने कहा कि वह अवैध अप्रवासियों की वापसी के लिए संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं और 3 नवंबर से पूरे प्रांत में अवैध अप्रवासियों की चरणबद्ध निकासी शुरू हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि रावलपिंडी, सरगोधा, गुजरांवाला, शेखूपुरा, लाहौर और प्रांत के अन्य इलाकों से अवैध निवासियों को निकाला जाएगा।

पंजाब आईजी ने कहा कि अवैध निवासियों को निर्दिष्ट बिंदुओं के माध्यम से प्रांत से निष्कासित किया जाएगा और निष्कासन से पहले उन्हें "होल्डिंग सेंटर" में रखा जाएगा।

अवैध विदेशियों की सम्मानजनक स्वदेश वापसी के लिए सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं और इस उद्देश्य के लिए देश भर में 49 होल्डिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं।

लौटने वालों की स्क्रीनिंग के बाद अवैध अप्रवासियों की सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी सुनिश्चित करने के लिए केंद्र स्थापित किए गए हैं।

पंजाब में, 36 जिलों में होल्डिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं, तीन खैबर पख्तूनख्वा के पेशावर, हरिपुरा और लांडी कोटाल जिलों में जबकि दो कराची के केमारी और मालिर जिलों में स्थापित किए गए हैं।

बलूचिस्तान में, क्वेटा, पिशिन और चगाई जिलों में तीन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जबकि गिलगित-बाल्टिस्तान और इस्लामाबाद में एक-एक केंद्र स्थापित किया गया है।

अवैध आप्रवासियों की स्वदेश वापसी के लिए आठ सीमा पार बिंदुओं का उपयोग किया जाएगा

बॉर्डर पर हजारों की संख्या में लोग जमा हैं
सरकार ने कहा है कि वह बुधवार से बिना दस्तावेज वाले अफगानों को गिरफ्तार करना और उन्हें नए होल्डिंग सेंटरों में ले जाना शुरू कर देगी, जहां से उन पर कार्रवाई की जाएगी और उन्हें जबरन अफगानिस्तान लौटा दिया जाएगा।

तोरखम सीमा पर एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी इरशाद मोहमंद ने एएफपी को बताया, "हजारों अफगान शरणार्थी वाहनों, लॉरियों और ट्रकों में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं और संख्या लगातार बढ़ रही है।" अधिकारी के मुताबिक अक्टूबर की शुरुआत से अब तक 1 लाख से अधिक अफगानी प्रवासी पाकिस्तान छोड़ चुके हैं।

पेशावर के सहायता शिविर में शरणार्थी माता-पिता के घर पैदा हुए जुल्फिकार खान ने पिछले हफ्ते एएफपी को बताया, "पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा किसी भी अपमान से बचने के लिए मैंने छोड़ने का फैसला किया है।"

पाकिस्तनी वेबसाइट द न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में रहने वाले 80 फीसदी से अधिक लोग उत्तरी तोरखम सीमा के माध्यम से चले गए हैं। इस इलाके में कई अफगान प्रवासी रहते हैं।

पाकिस्तान बीते चार दशकों से अफगान रिफ्यूजियों का ठिकाना रहा है। 1979 से 1989 के बीच जब अफगानिस्तान पर सोवियत संघ का कब्जा था, तब लाखों अफगानी भागकर पाकिस्तान आ गए थे।

उसके बाद तालिबान के शासन के दौरान भी बड़ी संख्या में लोग अफगानिस्तान छोड़ने पर मजबूर हुए। साल 2021 में भी अफगानिस्तान में तालिबान के दोबारा कब्जे के बाद लाखों अफगानी नागरिक भागकर पाकिस्तान आ गए थे।

अनुमान है कि 2021 से अब तक एक लाख से ज्यादा अफगान अपना देश छोड़ चुके हैं। आपको बता दें कि दोनों देशों के बीच 2,611 किलोमीटर की सीमा है। इस सीमा का बड़ा हिस्सा खुला है। ऐसे में बड़ी संख्या में अफगानिस्तान से भागकर लोग पाकिस्तान पहुंच जाते हैं।

पाकिस्तान के मुताबिक उनके देश में 44 लाख अफगानी रहते हैं। इनमें से 17 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। 24 लाख अफगानी लोगों को पाकिस्तान सरकार ने रिफ्यूजी का दर्जा दिया है। ऐसे लोगों को आईडी कार्ड दिए गए हैं। वे बैकिंग और स्कूलिंग जैसी गतिविधियों में हिस्सा ले सकते हैं। पाकिस्तान ने कहा है कि रजिस्टर्ड लोगों को नहीं निकाला जाएगा।

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