Corona: इंडिपेंडेंट ग्लोबल पैनल का WHO पर बड़ा आरोप , कहा- अलर्ट करने में की देरी
लंदन, मई 12: पिछले डेढ़ साल के ज्यादा के वक्त से कोरोना वायरस पूरी दुनिया को परेशान करने में लगा हुआ है। भारत में इसकी दूसरी घातक लहर अपना भयावह रूप दिखा रहा है। वहीं विदेशों में भी कोरोना के अलग-अलग वेरिएंट ने अपना आतंक मचाया हुआ है। इस बीच इंडिपेंडेंट ग्लोबल पैनल ने अपनी रिपोर्ट में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पर बड़ी बात कही है। पैनल ने दावा किया है कि वायरस के घातक असर को रोका जा सकता था, इसके लिए WHO को अलर्ट करना चाहिए था। इसके अलावा पैनल ने WHO की आलोचना भी की है।

चीन से निकले वायरस से आज पूरा विश्व जंग लड़ रहा है। कोरोना की अलग-अलग वेव ने देशों की चिंता बढ़ा दी है। कोरोना के नए वेरिएंट संक्रमण की स्पीड को बढ़ा रहे है। ऐसे में द इंडिपेंडेंट पैनल फॉर पैन्डेमिक प्रीपेयर्डनेस एंड रिस्पॉन्स (IPPPR) नाम के इस ग्लोबल पैनल ने दुनिया भर में फैले कोरोना के प्रकोप को लेकर अपनी जांच की है, जो बुधवार को पूरी हुई।
इस दौरान रिपोर्ट में बताया गया कि WHO इस महामारी को रोकने और पहचानने में पूरी तरह से फेल साबित हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक WHO ने 30 जनवरी 2020 को कोरोना वायरस को लेकर चिंता व्यक्त की थी। फिर इसके 6 हफ्ते बाद कोरोना को महामारी घोषित कर दिया, जिसके लिए उसे एक हफ्ते से ज्यादा का समय नहीं लगना चाहिए था।
IPPPR के मुताबिक कोरोना महामारी असफलताओं और लापरवाहियों का जहरीला मिश्रण है। पैनल ने दावा करते हुए बताया कि कोविड-19 से निजात मिल सकती थी। कोरोना पर काबू पाया जा सकता था, लेकिन विश्वभर की सरकारों ने लापरवाही बरती और उसका नतीजा यह रहा कि लाखों लोगों को अपनी जिंदगी खोनी पड़ी। सरकारों ने एक के बाद एक गलत फैसले लिए गए, जिससे 33 लाख के करीब लोगों की मौत हो गई। वहीं अब पैनल ने कोरोना संक्रमण की स्थिति को काबू में करने के लिए धनी देशों से गरीब देशों को एक अरब वैक्सीन दान करने के लिए कहा है। विश्वभर से इस बीमारी को हटाने के लिए अमीर देशों को आगे आना होगा।












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