ISRO vs SUPARCO: इसरो ने दिखाया चांद का सपना, चीनी स्पेसक्राफ्ट में चंद्रमा के लिए सैटेलाइट भेजेगा पाकिस्तान
ISRO vs SUPARCO: पिछले साल चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर उतारकर इसरो ने इतिहास रच दिया था, लेकिन, इसरो की उपलब्धि ने पाकिस्तान को भी चांद का ख्वाब दिखाया और आज, भारत के सफल चंद्र मिशन की बराबरी करने के लिए पाकिस्तान, चीनी चंद्र मिशन चांग'ई 6 पर चंद्रमा की यात्रा शुरू करने जा रहा है।
पाकिस्तान की अंतरिक्ष एजेंसी SUPARCO ने एक छोटा उपग्रह तैयार किया है, जो चंद्रमा के अंतरिक्ष की तस्वीरें खींचेगा, जबकि चीनी लुनार प्रोब, चंद्रमा की सहत से मिट्टी और पत्थर के नमूने लेकर पृथ्वी पर वापस लौटेगा।

इसरो ने दिखाया पाकिस्तान को सपना
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भारत की चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग की पाकिस्तान में काफी प्रशंसा की गई और पाकिस्तान के बुद्धिजीवी वर्ग ने भी भारत से सबक सीखते हुए अपने अंतरिक्ष मिशन को बढ़ाने की जोरदार वकालत की। उन्होंने जोर दिया, कि कैसे भारत ने बेहद कम बजट में महत्वाकांक्षी चंद्रमा कार्यक्रम को पूरा किया। और उस मिशन को पूरा कर दिखाया, जिसे करने में अमेरिका, चीन और रूस भी नाकामयाब रहा था।
भारत की इस सफलता ने पाकिस्तान में भी चांद पर पहुंचने के सपने को हवा दे दी।
भारतीय अंतरिक्ष और अनुसंधान संगठन (ISRO) की औपचारिक स्थापना 1969 में हुई थी और यह विकासशील भारत की सफलता की कहानियों में से एक रही है। दिलचस्प बात यह है, कि पाकिस्तान के सुपार्को की स्थापना 1961 में हुई थी। यानि, इसरो से भी पहले सुपार्को की नींव रख दी गई थी।
पाकिस्तान की अंतरिक्ष एजेंसी ने स्थापना के आठ साल बाद रहबर-1 नाम का स्पेस रॉकेट लांच किया था और ऐसा करने वाला वो इजराइल और जापान के बाद तीसरा देश बन गया। सुपार्को ने नासा और अमेरिकी वायु सेना (यूएसएएफ) के सहयोग से रॉकेट लॉन्च किया था।
भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे पुरानी एजेंसी सुपार्को ने अपने वैज्ञानिकों को नासा में अध्ययन के लिए भेजा। इसके संस्थापक निदेशक, अब्दुस सलाम, 1979 में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले और एकमात्र पाकिस्तानी बने।
लेकिन, देश की गलत प्राथमिकताओं ने सुपार्को को इसरो के मुकाबले दशकों पीछे धकेल दिया। SUPARCO की कमान वैज्ञिनकों के हाथों से सेना के हाथों में चली गई और फिर आरोप लगने लगे, कि जो बजट सुपार्को के लिए जारी किया जाता था, वो सेना खा जाती थी।
पाकिस्तानी एजेंसी से करीब 8 साल बाद बनने के बाद भी, इसरो अभी तक 65 सैटेलाइट लॉन्च कर चुका है, मंगल और चांद मिशन को अंजाम दे चुका है, चंद्रमा पर इंसानों को भेजने की तैयारी कर रहा है, और सूर्य मिशन आदित्य के साथ कई तरह के ऐतिहासिक मिशन को अंजाम दे चुका है, लेकिन सुपार्को अपनी स्थापना के बाद से सिर्फ 2 ही सैटेलाइट लॉन्च कर पाया है।

चीन की मदद से पाकिस्तान का चांद मिशन
सुपार्को चंद्रमा को अपनी पहुंच में लाने के लिए चीनी विंग्स का उपयोग कर रहा है। पाकिस्तान का पहला चंद्र मिशन iCube-Q, आज 3 मई को चीन के चांग 6 मून प्रोब से लॉन्च किया जाएगा।
इस्लामाबाद स्थित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी संस्थान ने चीन के शंघाई विश्वविद्यालय SJTU और SUPARCO के साथ साझेदारी में सैटेलाइट विकसित किया है। इसका वजन 7 किलोग्राम है, इसमें दो ऑप्टिकल कैमरे हैं और यह चंद्रमा की सतह की तस्वीरें खींचेगा। इसमें ऊंचाई नियंत्रण, थर्मल प्रबंधन और गहरे अंतरिक्ष संचार के लिए सिस्टम शामिल हैं।
अगर ये मिशन कामयाब होता है, तो ये उपग्रह चंद्रमा के सतह की तस्वीरें, भूवैज्ञानिक विशेषताओं के साथ साथ कई तरह की अन्य जानकारियां भी भेजेगा।
चेंग'6 को चीन के हैनान द्वीप पर वेनचांग सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लॉन्च किया जाएगा। पाकिस्तान के अधिकारियों के मुताबिक, चंद्रमा पर जाने वाला अंतरिक्ष यान एक चंद्र क्यूबसैट है, और ये मिशन तीन महीने का होगा। पाकिस्तान ने इस मिशन को iCube Qamar नाम दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, चांग'ई 6 चीन का छठा चंद्र अन्वेषण मिशन है। यह मिशन, जिसे चीन के हैनान प्रांत से लॉन्च किया जाएगा,वो चंद्रमा के अंधेरे हिस्से से मिट्टी और चट्टान के नमूने एकत्र करेगा, जिससे यह इस तरह का प्रयास करने वाला पहला मिशन बन जाएगा। चीनी मून प्रोब 2000 ग्राम तक नमूने कलेक्ट करेगी और अपनी तरह के पहले मिशन में पृथ्वी पर वापस आ जाएगी।
इसरो बनाम सुपार्को
iCube-Q के लॉन्च से पाकिस्तान में काफी उत्साह है। पाकिस्तानी मीडिया इसे अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक अच्छी शुरुआत बता रहा है.
पाकिस्तान टुडे के एक लेख में याद दिलाया गया है, कि कैसे भारत 1963 में पाकिस्तान के तीन साल बाद अपना पहला रॉकेट लॉन्च करने में कामयाब रहा और कैसे उस वक्त भारत का मजाक बनाया गया था, जब भारत के रॉकेट को भारतीय वैज्ञानिक बैलगाड़ी से ले गये थे।
लेकिन, आज भारत, अंतरिक्ष अन्वेषण में एक वैश्विक खिलाड़ी बन चुका है। इसरो ने सूर्य के कोरोना का अध्ययन करने के लिए एक मिशन भी शुरू किया है और 2025 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को कक्षा में भेजा जाएगा।
1970 के दशक में, भारत ने अपना पहला सैटेलाइट, आर्यभट्ट-1 लॉन्च किया था और पाकिस्तान ने अपना पहला उपग्रह, Badr1, 1990 में चीनी सहायता से लॉन्च किया था। पाकिस्तान के अंतरिक्ष अन्वेषण में वास्तविक गिरावट 1980 के दशक के अंत में शुरू हुई, जब राष्ट्रपति जिया-उल-हक ने प्रमुख अंतरिक्ष परियोजनाओं के लिए बजट में कटौती कर दी, क्योंकि पाकिस्तान ने अपना ध्यान परमाणु बम बनाने पर केंद्रित कर दिया था। और उसके बाद से पाकिस्तानी अंतरिक्ष एजेंसी पर सेना का कब्जा हो गया।
डॉ. सलाम, जिन्होंने पाकिस्तान के लिए नोबेल पुरस्कार जीता था और सुपार्को की स्थापना की, उन्हें पाकिस्तान में अहमदिया करार देकर उनका बहिष्कार कर दिया और इस तरह से पाकिस्तान का अंतरिक्ष का सपना मिट्टी में मिल गया।
सुपार्को को कई झटके लगे हैं। पाकिस्तानी एजेंसी को कक्षीय स्लॉट छोड़ना पड़ा, क्योंकि यह समय पर लॉन्च करने में नाकाम रहा। एजेंसी का दूसरा उपग्रह 2011 में लॉन्च किया गया था। फरवरी 2017 में, इसरो ने 104 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजकर विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया। जबकि, SUPARCO, फिलहाल, स्वदेशी उपग्रह निर्माण और लॉन्चिंग क्षमताओं को हासिल करने के लिए मिशन 2040 की दिशा में काम कर रहा है।
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