गाजा पट्टी में नरसंहार? इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में भिड़े दक्षिण अफ्रीका और इजराइल, आज क्या हुआ?
ICJ genocide case: गाजा पट्टी में 7 अक्टूबर से युद्ध चल रहा है और दक्षिण अफ्रीका ने इजराइल पर गाजा पट्टी में नरसंहार का आरोप लगाते हुए इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में मुकदमा दायर किया हुआ है। जिसपर गुरुवार से सुनवाई शुरू हो चुकी है। आज सुनवाई का दूसरा दिन था, जब दक्षिण अफ्रीका के आरोपों पर इजराइल ने प्रतिक्रिया दी है।
दक्षिणी अफ्रीका ने इज़राइल पर 1948 के नरसंहार सम्मेलन का उल्लंघन करते हुए गाजा पट्टी में नरसंहार का अपराध करने का आरोप लगाया है और हमास नियंत्रित गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है, कि इजराइल के हमले में अभी तक 23 हजार से ज्यादा लोग मारे गये हैं, जिनमें से करीब 10 हजार बच्चे हैं।

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में सुनवाई
आईसीजे न्यायाधीशों के सामने अपनी तीन घंटे लंबी प्रस्तुति में, अंतर्राष्ट्रीय कानून अकादमिक और बैरिस्टर, जॉन डुगार्ड के नेतृत्व में दक्षिण अफ्रीकी टीम ने गाजा में फिलिस्तीनियों की दुर्दशा को बताने की कोशिश की, जो घेराबंदी में फंसे हुए हैं। दक्षिण अफ्रीका ने कहा, कि घेराबंदी में फंसे फिलीस्तीनियों के खिलाफ इजराइल लगातार बमबारी कर रहा है।
हालांकि, आईसीजे को अंतिम फैसले तक पहुंचने में कई साल लग सकते हैं। लेकिन इस सप्ताह की प्रारंभिक कार्यवाही में दक्षिणी अफ्रीका ने अपील की है, कि गाजा पट्टी में जारी हत्याओं और विनाश के खिलाफ आपातकालीन आदेश कोर्ट की तरफ से जारी की जाए, ताकि गाजा में युद्ध बंद हो सके। कुछ विशेषज्ञों का कहना है, कि कुछ हफ्तों में अंतरिम फैसला सुनाया जा सकता है।
दक्षिण अफ्रीका का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ताओं में से एक, आदिला हासिम ने कहा, कि फिलहाल अदालत के लिए अब नरसंहार के आरोपों पर अंतिम फैसला तक पहुंचना संभव नहीं है, लेकिन यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है, कि कम से कम इज़राइल के कुछ कार्य सम्मेलन की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं और कोर्ट उसमें हस्तक्षेप करे।
दक्षिण अफ्रीका के आरोपों पर क्या बोला इजराइल
दक्षिण अफ्रीका और इजराइल, दोनों इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के सदस्य हैं, लिहाजा दक्षिण अफ्रीका की तरफ से जो दलील पेश किए गये हैं, उसपर आज इजराइल की तरफ से जवाब दिया गया है।
इजराइल ने संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान 7 अक्टूबर को हमास आतंकवादियों द्वारा किए गए अत्याचारों के मल्टीमीडिया, मौखिक और लिखित सबूत पेश किए हैं। दक्षिण अफ्रीका के आरोपों पर जवाब देते हुए इजराइल ने कहा है, कि "अगर किसी तरह के नरसंहार किए गये हैं, तो वो इजराइल के खिलाफ किए गये हैं।"
इज़राइल ने कहा, कि वह "अदालत के साथ 7 अक्टूबर की भयावहता का कुछ अंश साझा करने के लिए मजबूर है" लेकिन उसने जोर देकर कहा, कि वह जानता है, कि यह वो 7 अक्टूबर को हुए हमले के जवाब में कानून के उल्लंघन को उचित नहीं ठहराता।

इज़राइल का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ताल बेकर ने कहा, कि "हम ऐसा इसलिए नहीं करते, क्योंकि ये कृत्य, चाहे वे कितने भी दुखद और व्यवस्थित हों, इज़राइल को कानून बनाए रखने के अपने दायित्वों से मुक्त कर देते हैं, क्योंकि हम अपने नागरिकों और क्षेत्र की रक्षा करता है - यह निर्विवाद है।"
उन्होंने कहा, कि "हम ऐसा इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि इजराइल जिस खतरे का सामना कर रहा है, उसकी प्रकृति और उसका सामना करने वाले सशस्त्र बल की क्रूरता और अराजकता को समझे बिना गाजा में सशस्त्र संघर्ष को समझना असंभव है।"
बेकर ने तर्क दिया, कि 7 अक्टूबर को हमास के कृत्य नरसंहार प्रकृति के थे, और उन्होंने हमास के नेताओं के "गर्व से विनाश के घोषित एजेंडे" का सबूत दिया।
बेकर ने कहा, "हमास के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य ने 'फिलिस्तीन को यहूदियों की गंदगी से मुक्त करने' के लक्ष्य का ऐलान किया, विनाशवादी भाषण दिए और हमास को अपने किए पर गर्व था।"
इसके बाद इजराइल की तरफ से आईसीजे में 7 अक्टूबर के तुरंत बाद एक इंटरव्यू दिखाया गया, जिसमें हमास के एक वरिष्ठ नेता गाजी हमद ने एक लेबनानी टीवी चैनल से कहा, कि "हम ऐसा बार-बार करेंगे।" हमास का नेता वीडियो में कह रहा होता है, कि "ये हमला अभी पहली बार हुआ है, लेकिन ये दूसरी बार, तीसरी बार, चौथखी बार .. बार बार होगा।"
इजराइल ने तर्क दिया, कि दक्षिण अफ्रीका द्वारा अदालत से इज़राइल को अपने सैन्य अभियानों को निलंबित करने का आदेश देने के लिए अनुरोध किए गए अनंतिम उपाय इज़राइल को "अपने नागरिकों, बंधकों के वापस घर लौटने और 110,000 से ज्यादा आंतरिक रूप से विस्थापित इजरायलियों की रक्षा के लिए अपने दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ" कर देंगे।
उन्होंने कहा, इजराइल के पास अपने नागरिकों की रक्षा के लिए सभी वैध उपाय करने का "अंतर्निहित अधिकार" है।












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